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गन्‍ना किसानों के लिए ‘मीठा’ रहा यह सीजन, हाथों हाथ मिला पैसा, बकाया भुगतान आया 5 साल के निचले स्‍तर पर

समय पर भुगतान न होने से गन्‍ना किसानों को काफी परेशानी होती थी.

समय पर भुगतान न होने से गन्‍ना किसानों को काफी परेशानी होती थी.

चीनी निर्यात में उछाल और इथेनॉल उत्पादन में बढ़ोतरी से चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति सुधरी है और वे किसानों को जल्‍द उनकी ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

वर्ष 2021-22 सीजन में किसानों से 1.18 लाख करोड़ रुपये का गन्‍ना खरीदा गया.
1.12 लाख करोड़ रुपये किसानों को 30 सितंबर तक दिए जा चुके हैं.
उत्‍तर प्रदेश में चीनी मिलों की तरफ किसानों का सबसे ज्‍यादा पैसा बकाया है.

नई दिल्‍ली. गन्‍ना किसानों के लिए यह साल काफी अच्‍छा रहा है. इस साल उन्हें अपनी फसल के पैसे पाने के लिए चीनी मिलों के चक्‍कर नहीं काटने पड़े और तेजी से भुगतान भी मिला. यही कारण है कि गन्‍ने का बकाया भुगतान 5 साल के निचले स्‍तर पर आ गया है. खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग के पास उपलब्ध ताजा आंकड़ों के अनुसार, 30 सितंबर 2022 तक मिलों की तरफ गन्‍ना किसानों के 5,910 करोड़ रुपये बकाया हैं.

चीनी निर्यात में उछाल और इथेनॉल उत्पादन में बढ़ोतरी से चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति सुधरी है और वे किसानों को जल्‍द उनकी फसल की कीमत चुकाने में सक्षम हुई हैं. वर्ष 2021-22 सीजन में किसानों से 1.18 लाख करोड़ रुपये का गन्‍ना खरीदा गया. इसमें से 1.12 लाख करोड़ रुपये किसानों को 30 सितंबर तक दिए जा चुके हैं. अब किसानों के केवल 5,910 करोड़ रुपये बकाया हैं. बकाया भुगतान का यह 5 साल का निम्‍नतम स्‍तर है.

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गन्‍ने की रिकॉर्ड खरीद
इंडियन एक्‍सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग के ज्‍वाइंट सेक्रेटरी सुबोध कुमार सिंह का कहना है कि देश में वर्ष 2021-22 सीजन में गन्‍ने की रिकॉर्ड खरीद हुई है. गन्‍ना मिलों ने 1.18 लाख करोड़ रुपये मूल्‍य का गन्‍ना खरीदा. अब केवल 6,000 करोड़ के करीब राशि ही बकाया है.

सिंह का कहना है कि गन्‍ने को लेकर सरकार की नीतियां स्‍पष्‍ट और स्थिर हैं. पहले चीनी की अधिकता होने पर चीनी मिलों को इन्‍हें बेचने में दिक्‍कत होती थी. इससे उन्‍हें किसानों को उनकी फसल के पैसे देने में परेशानी आती थी. सरकार ने इस मुश्किल को दूर करने के लिए इथेनॉल ब्‍लेंडिंग कार्यक्रम चलाया है. इसी के तहत वर्ष 2020-21 में 22 लाख मीट्रिक टन चीनी बनाए जाने लायक गन्‍ने का इस्‍तेमाल इथेनॉल बनाने में किया. साल 2021-22 में 35 लाख मीट्रिक टन चीनी बनाए जाने लायक गन्‍ने से इथेनॉल बनाया गया.

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चीनी निर्यात में उछाल
चीनी निर्यात में भी इस साल उछाल आया है. पिछले वित्‍त वर्ष में जहां 70 लाख मीट्रिक टन चीनी का निर्यात किया गया था, वहीं 2021-22 सीजन में अब तक 109 लाख मीट्रिक टन चीनी का निर्यात हो चुका है. यह अनंतिम आंकड़ा है जो अंतिम डेटा उपलब्ध होने पर बढ़ सकता है. 2019-20 में 58.59 लाख मीट्रिक टन चीनी का निर्यात भारत ने किया था. चीनी निर्यात के साथ ही इथेनॉल प्रोडक्‍शन भी बढ़ रहा है. वर्ष 2020-21 में इथेनॉल की कुल सप्‍लाई 302 करोड़ लीटर रही. यह आंकड़ा 2019-20 में 173 करोड़ लीटर था.

यूपी में सबसे ज्‍यादा बकाया
उत्‍तर प्रदेश में चीनी मिलों की तरफ किसानों का सबसे ज्‍यादा पैसा बकाया है. यूपी में 2021-22 सीजन के दौरान मिलों द्वारा किसानों को देय 35,201 करोड़ रुपये में से 31,258 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है. 3,943 करोड़ रुपये का बकाया है. 2020-21 सीजन में यूपी में किसानों से 33,023 करोड़ रुपये का गन्‍ना खरीदा गया. इसमें से अभी तक 5,053 करोड़ का भुगतान किसानों को नहीं किया गया है. यूपी के बाद गुजरात का नंबर है. यहां 2021-22 सीजन के दौरान 3,891 करोड़ रुपये की देय राशि के मुकाबले, किसानों को 2,892 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है. इस तरह किसानों को अब तक उनकी फसल के 1,035 करोड़ रुपये नहीं मिले हैं.

Tags: Agriculture, Business news in hindi, Sugar mill, Sugarcane Farmer

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