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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुपरटेक दाखिल करेगा पुनर्विचार याचिका, जानिए क्या है पूरा मामला?

UP: नोएडा स्थित सुपरटेक कंपनी के ट्विन टावर गिराने का आदेश हो गया है.

UP: नोएडा स्थित सुपरटेक कंपनी के ट्विन टावर गिराने का आदेश हो गया है.

रियल एस्टेट कंपनी सुपरटेक (Supertechs) लिमिटेड ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका (Review Petition) दाखिल करने की घोषणा की है.

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    नई दिल्ली. रियल एस्टेट कंपनी सुपरटेक (Supertechs) लिमिटेड ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका (Review Petition) दाखिल करने की घोषणा की है. शीर्ष अदालत ने मंगलवार को भवन निर्माण नियमों का उल्लंघन होने के कारण एमेराल्ड कोर्ट परियोजना के 40 मंजिला दो टॉवरों को गिराने का आदेश दिया था. सुपरटेक के प्रबंध निदेशक मोहित अरोड़ा ने कहा कि कंपनी उच्चतम न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर करेगी.

    सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा अथॉरिटी को फटकार लगाते हुए कहा था कि बिल्डर और अथॉरिटी मिलकर गैर कानूनी काम कर रहे हैं. बिल्डर अपने पैसे के बल पर हर तरह का उल्लंघन कर रहे हैं. नोएडा में गैर कानूनी अतिक्रमण और कंस्ट्रक्शन की बड़ी वजह बिल्डर और अथॉरिटी के अधिकारियों का गठजोड़ है.

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    जानिए क्या होगा खरीदारों का
    शीर्ष अदालत ने कंपनी को फ्लैट खरीदारों को ब्याज के साथ पैसे वापस करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने कहा है कि फ्लैट मालिकों को दो महीने में पैसा ब्याज सहित पैसा वापस करना होगा. 12 परसेंट सालाना का ब्याज देना होगा.

    कोर्ट ने दोनों टॉवर को ठहराया अवैध
    सुप्रीम कोर्ट ने सुपरटेक के नोएडा एक्सप्रेस वे स्थित एमराल्ड कोर्ट प्रोजेक्ट के टॉवर-16 और 17 को अवैध ठहराया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि Emarald Court सोसाइटी में दो टॉवर नियमों का उल्लंघन करके बनाए गए हैं. इन टॉवर में 950 फ्लैट हैं. एक टॉवर 42 मंजिल का है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब नक्शा पास हुआ था तब ये दोनों टॉवर अप्रूव नहीं हुए थे. बाद में नियमों का उल्लंघन करके ये टॉवर बनाए गए थे.

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    देना होगा 2 करोड़ रुपये हर्जाना
    इसके साथ ही सुपरटेक सोसाइटी को आरडब्लूओ को दो करोड़ रुपये का हर्जाना देगा. इन दोनों टॉवरों को सुपरटेक अपने पैसे से गिराएगा. कोर्ट ने इन्हें 3 महीने में गिराने के आदेश दिए हैं.

    कोर्ट ने कहा, अन्य भवनों को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए
    फैसले में कहा गया है कि टॉवर्स को तोड़ते वक्त अन्य भवनों को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह ने इस मामले की सुनवाई की.

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