AGR पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया फैसला- बकाया चुकाने के लिए टेलीकॉम कंपनियों को 10 साल का वक्त मिला

AGR पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया फैसला- बकाया चुकाने के लिए टेलीकॉम कंपनियों को 10 साल का वक्त मिला
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AGR Case Supreme Court Decision-एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए टेलीकॉम कंपनियों को बड़ी राहत दी है. उन्हें एजीआर बकाया चुकाने के लिए 10 साल का वक्त मिल दिया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 1, 2020, 12:30 PM IST
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नई दिल्ली. एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) के मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India) ने फैसला सुनाते हुए टेलीकॉम कंपनियों (India Telecom Companies) को बड़ी राहत दी है. एजीआर बकाया चुकाने के लिए कंपनियों को 10 साल का वक्त दिया है. हालांकि, कंपनियों ने 15 साल का वक्त मांगा था. इस खबर के बाद एनएसई पर वोडाफोन-आइडिया का शेयर 10 फीसदी से ज्यादा टूट गया. वहीं, भारती एयरटेल के शेयर में 5 फीसदी की जोरदार तेजी आई है. AGR की बकाया रकम पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना पहला फैसला 24 अक्टूबर 2019 को सुनाया था. इसके बाद वोडाफोन आइडिया ने खुलकर कहा था कि अगर उसे बेलआउट नहीं किया गया तो उसे भारत में अपना कामकाज बंद करना होगा.

आपको बता दें कि वोडाफोन आइडिया और भारती एयरटेल ने एजीआर बकाया चुकाने के लिए 15 साल का समय मांगा था. अभी तक 15 टेलीकॉम कंपनियों ने सिर्फ 30,254 करोड़ रुपये चुकाये हैं, जबकि कुल बकाया 1.69 लाख करोड़ रुपये का है.

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टेलीकॉम कंपनियों को मिला 10 साल का वक्त-जस्टिस अरुण मिश्रा की अगुआई वाली बेंच ने AGR की बकाया रकम 10 साल में चुकाने की इजाजत दे दी है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में टेलीकॉम कंपनियों से कहा है कि वह AGR की कुल बकाया रकम का 10 फीसदी अभी पेमेंट करें और बाकी रकम अगले 10 साल में करें. टेलीकॉम कंपनियों को AGR की बकाया रकम चुकाने का हलफनामा जमा करना होगा. अगर कंपनियां इन 10 साल के दौरान पेमेंट पर डिफॉल्ट करती हैं तो इंटरेस्ट और पेनाल्टी देनी होगी.



क्या है एजीआर मामला - अगर आसान शब्दों में कहें तो एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) दूरसंचार विभाग (DoT) द्वारा टेलीकॉम कंपनियों से लिया जाने वाला यूजेज और लाइसेंसिग फीस है. इसके दो हिस्से होते हैं- स्पेक्ट्रम यूजेज चार्ज और लाइसेंसिंग फीस, जो क्रमश 3-5 फीसदी और 8 फीसदी होता है. टेलीकॉम डिपार्टमेंट कहता है कि AGR की गणना किसी टेलीकॉम कंपनी को होने वाले कुल आय के आधार पर होनी चाहिए, जिसमें डिपॉजिट इंट्रेस्ट और एसेट बिक्री जैसे गैर टेलीकॉम स्रोत से हुई आय भी शामिल हो.

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वहीं, टेलीकॉम कंपनियों का कहना था कि AGR की गणना सिर्फ टेलीकॉम सेवाओं से होने वाली आय के आधार पर होनी चाहिए. लेकिन पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने टेलीकॉम कंपनियों के खिलाफ फैसला दिया था और यह कहा था कि वे तत्काल एजीआर का बकाया चुकायें. करीब 15 टेलीकॉम कंपनियों का कुल बकाया 1.69 लाख करोड़ रुपये के आसपास है.
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