बड़ा फैसला : PSU का 4 लाख करोड़ का बकाया खत्म! सुप्रीम कोर्ट ने टेलीकॉम कंपनियों से पेमेंट का वादा मांगा

हेल्थ वर्कर्स को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला
हेल्थ वर्कर्स को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सरकारी टेलीकॉम कंपनियों से टेलीकॉम डिपार्टमेंट ने जो बकाया रकम की डिमांड रखी है उसे खत्म किया जाए. जस्टिस अरुण मिश्रा की अगुआई वाली बेंच ने शुक्रवार को यह फैसला सुनाया है.

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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Surpeme Court of India) में शुक्रवार को एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) पर सुनवाई करते हुए बड़ा फैसला सुनाया है. ये फैसला सरकारी टेलीकॉम कंपनियों (Telecom Companies) के पक्ष में आया है. सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरुण मिश्रा की अगुआई वाली बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा है कि सरकारी टेलीकॉम कंपनियों से टेलीकॉम डिपार्टमेंट ने जो बकाया रकम की डिमांड रखी है उसे खत्म किया जाए. साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने टेलीकॉम कंपनियों को पेमेंट के रोडमैप पर जवाब देने का निर्देश दिया गया है.

टेलीकॉम कंपनियों से पेमेंट का वादा मांगा - सुप्रीम कोर्ट ने टेलीकॉम कंपनियों से कहा है कि वह लिखित तौर पर दें कि बकाया AGR का पेमेंट करेंगी. जस्टिस अरुण मिश्रा की अगुआई वाली बेंच ने वोडाफोन आइ़डिया सहित दूसरी प्राइवेट कंपनियों को कहा है कि वह 5 दिनों के भीतर बकाया रकम चुकाने से जुड़े रोडमैप का हलफनामा जारी करें.

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई शुरू करते हुए सबसे पहले यही पूछा था कि दूरसंचार विभाग ने सरकारी कंपनियों से डिमांड कैसे की है जबकि हमारे फैसले में कभी सरकारी कंपनियों की कोई बात नहीं की गई थी. सुप्रीम कोर्ट इस मामले में अगली सुनवाई 18 जून को करेगा.



Supreme court
सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'सरकार ने माना है कि प्राइवेट और सरकारी टेलीकॉम कंपनियों को लाइसेंस देने में अंतर है.' कोर्ट ने कहा, 'हमारे फैसले को आधार बनाकर सरकारी कंपनियों से बकाया रकम चुकाने की डिमांड नहीं की जा सकती है.'

अदालत ने कहा कि फैसले के तीन दिन के भीतर यह सफाई देनी है कि सरकारी कंपनियों से किस आधार पर डिमांड की गई है.

क्या है मामला- मार्च में लॉकडाउन शुरू होने से पहले टेलीकॉम डिपार्टमेंट ने 18 मार्च को सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि कंपनियों को AGR का बकाया चुकाने के लिए 20 साल का वक्त दिया जाए.

टेलीकॉम डिपार्टमेंट ने अपनी याचिका में कहा था कि बकाया के तुरंत भुगतान से कंपनियों के दिवालिया होने का खतरा है. इससे करोड़ों कस्टमर्स को भी नुकसान होगा.

टेलीकॉम डिपार्टमेंट ने सुप्रीम कोर्ट के सामने 20 साल में AGR की बकाया रकम चुकाने का फॉर्मूला रखा था. सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर 2019 में टेलीकॉम कंपनियों के खिलाफ फैसला सुनाते हुए कहा था कि वे 1.43 लाख करोड़ रुपये का AGR बकाया चुकाएं.

यह रकम लाइसेंस फीस और स्पेक्ट्रम यूजेज चार्ज की बकाया रकम है. हालांकि 18 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने टेलीकॉम डिपार्टमेंट की उस याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया जिसमें उसने कहा था कि टेलीकॉम कंपनियां AGR की बकाया रकम का खुद आकलन करेंगी.

टेलीकॉम डिपार्टमेंट को फटकार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने तब इसे अदालत के आदेश की अवमानना और धोखाधड़ी कहा था. हालांकि तब कोर्ट इस बात पर राजी हुआ था कि बकाया पेमेंट के लिए 20 साल का वक्त देने पर विचार किया जा सकता है.

वोडाफोन आइडिया ने 6854 करोड़ रुपये चुका दिए हैं. उस पर कुल बकाया 58,254 करोड़ रुपये का था. जबकि कंपनी का अपना आकलन है कि उस पर कुल AGR का कुल बकाया सिर्फ 21,533 करोड़ रुपये है.

इस बीच भारती एयरटेल ने 18,004 करोड़ रुपये चुका दिए हैं. टेलीकॉम डिपार्टमेंट के हिसाब से इस पर कुल बकाया 43,980 करोड़ रुपये है जबकि कंपनी का मानना है कि उस पर कुल बकाया सिर्फ 13,004 करोड़ रुपये होना चाहिए.

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