News18 Rising India: लोकल स्‍तर पर ईज ऑफ डूइंग से ही सुधरेगी मैन्‍युफैक्‍चरिंग की तस्‍वीर

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  • Last Updated: March 16, 2018, 8:59 PM IST
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राइजिंग इंडिया समिट में इंडस्‍ट्री मिनिस्‍टर सुरेश प्रभु ने देश के मैन्‍युफैक्‍चरिंग सेक्‍टर में नहीं हो रही अपेक्षित तरक्‍की की वजह बताई. उन्‍होंने कहा कि जब तक ईज ऑफ डूइंग बिजनेस ग्रासरूट लेवल तक नहीं पहुंचेगा, तब तक मैन्‍युफैक्‍चरिंग सेक्‍टर की दिशा और दशा नहीं सुधर सकती है. उन्‍होंने कहा कि जितनी सुविधाएं देश के विकसित क्षेत्रों या शहरी क्षेत्रों में उपलब्‍ध हैं, वे सभी सुविधाएं लोकल स्‍तर पर भी उपलब्‍ध होनी चाहिए. अगर ऐसा नहीं होता है तो चीजें नहीं सुधरेंगी.

न्‍यू इंडस्ट्रियल पॉलिसी ला रही सरकार
प्रभु ने कहा कि हम मैन्‍युफैक्‍चरिंग सेक्‍टर को ऊंचाई पर ले जाने के लिए न्‍यू इंडस्ट्रियल पॉलिसी लेकर आ रहे हैं. इससे कुल जीडीपी में मैन्‍युफैक्‍चरिंग सेक्‍टर का हिस्‍सा काफी बढ़ेगा. उन्‍होंने कहा कि देश की जीडीपी पर सर्विस सेक्‍टर हावी है, न कि कृषि या मैन्‍युफैक्‍चरिंग सेक्‍टर.

संरचनात्‍मक जटिलताएं दूर होंगी
प्रभु ने कहा कि साफ तौर पर इस प्रक्रिया में कुछ संरचनात्‍मक जटिलताएं हैं. हम अब उन जटिलताओं को दूर करने की कोशिश कर रहे हैं. इस अवसर पर नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने कहा कि हमारा मैन्‍युफैक्‍चरिंग सेक्‍टर अभी भी काफी कम उत्‍पादन कर रहा है, यही वजह है कि हम ग्‍लोबल स्‍तर पर अपनी उपस्थिति दमदार तरीके से दर्ज नहीं करा पा रहे हैं.



भारतीय हैं दुनिया की टॉप कंपनियों के सीईओ
इस अवसर पर मेकमाइट्रिप के प्रमुख दीप कालरा ने कहा है कि देश में टैलेंट और ब्रेन की कमी नहीं है. बस जरूरत उनके उपयुक्‍त इस्‍तेमाल और उचित अवसर की है. देश के सबसे बड़े मीडिया समूह न्‍यूज-18 के राइजिंग इंडिया समिट में उन्‍होंने कहा कि दुनिया की टॉप टेक्‍नोलॉजी और मैन्‍युफैक्‍चरिंग कंपनियों के सीईओ भारतीय हैं. अगर दुनिया के विकसित देशों की टॉप कंपनियों में उन्‍हें सबसे बड़ा ओहदा मिल सकता है तो इससे साफ है कि उनमें किसी कंपनी को शीर्ष पर पहुंचाने का दमखम है.

उचित माहौल की जरूरत
कालरा ने कहा कि हकीकत यह है कि भारत में उन टॉप ब्रेन के उचित इस्‍तेमाल के लिए उपयुक्‍त माहौल अभी तक नहीं बन पाया है. हमें जरूरत उन्‍हें टैलेंट के भरपूर के लिए अवसर प्रदान करने की है.

अतिथि देवो भव: की अवधारणा उतरी धरती पर
दीप कालरा ने कहा कि भारत ने वास्‍तव में अतिथि देवो भव: की अवधारणा को धरती पर उतारा है. अब किसी भी विदेशी कंपनी के लिए भारत में बिजनेस करना उतना ही सरल है, जितना कि यह किसी भारतीय के लिए है.

देश में खपत के साथ बचत की भी जरूरत
इस अवसर पर केकेआर इंडिया के संजय नायर ने कहा कि देश में खपत बढ़ने के साथ ही लोगों को अपनी बचत भी बढ़ाने की जरूरत है. लोगों को अपने बचत और फिर निवेश की जरूरत है. नायर ने कहा कि निजी निवेश लगातार नीचे जा रहा है. इस पर हमें ध्‍यान देने की जरूरत है.

निजीकरण ने नहीं बदलेगी सरकारी बैंकों की किस्‍मत
इस अवसर पर स्‍टेट बैंक ऑफ इंडिया के प्रमुख रजनीश कुमार ने कहा कि अगर देश तेज रफ्तार से विकास करता है तो एनपीए पैदा होगा ही, इसे कम जरूर किया जाना चाहिए, लेकिन इसे पूरी तरह से रोकना संभव नहीं है. कुमार के अनुसार दुनिया में एक भी मुल्‍क ऐसा नहीं है, जहां बगैर एनपीए पैदा हुए इकोनॉमी का तेज विकास हुआ हो.

निजीकरण की मांग बेतुकी
बैंकों के निजीकरण की बढ़ती मांग के मसले पर कुमार ने कहा कि किसी संस्‍थान का स्‍वामित्‍व किसके हाथ में है, इससे उसके परफॉर्मेंस पर कोई खास असर नहीं पड़ता. देश में कुछ ऐसी पीएसयू कंपनियां हैं, जो प्राइवेट सेक्‍टर की हजारों कंपनियों से बेहतर काम कर रही हैं. देश की कुछ पीएसयू कंपनियां जहां ग्रेट हैं, वहीं कुछ कंपनियां अच्‍छा परफॉर्म नहीं कर रही हैं.

प्राइवेट सेक्‍टर की भी कई कंपनियां नहीं कर रहीं अच्‍छा परफॉर्म
कुमार ने कहा कि प्राइवेट सेक्‍टर में भी बड़ी संख्‍या में ऐसी कंपनियां हैं, जो अच्‍छा परफॉर्म नहीं कर रही हैं. ऐसे में यह सवाल उठना या उठाना जायज नहीं है कि बैंकों का निजीकरण करने से उसकी हालत बेहतर हो जाएगी.

रजनीश कुमार ने ये बातें देश के सबसे बड़े मीडिया समूह न्‍यूज-18 द्वारा दिल्‍ली के ताज होटल में आयोजित राइजिंग इंडिया समिट में कहीं. इस समिट में देश और दुनिया के टॉप बिजनेसमैन, उद्योगपति, पॉलिसीमेकर्स, थिंकर, इकोनॉमिस्‍ट, ब्‍यूरोक्रेट्स हिस्‍सा ले रहे हैं.
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