Corona Impact: निजी वित्‍तीय मामलों पर बदला भारतीयों का रुख, अब फिजूलखर्ची पर लगा रहे ब्रेक

Corona Impact: निजी वित्‍तीय मामलों पर बदला भारतीयों का रुख, अब फिजूलखर्ची पर लगा रहे ब्रेक
एक सर्वे के मुताबिक, कोरोना संकट के दौरान आम भारतीयों में खर्च और बचत को लेकर रुख तेजी से बदला है.

फाइनेंशियल फ्रीडम सर्वे-2020 (Financial Freedom Survey-2020) में लोगों के निजी वित्तीय मामलों (Personal Finance) को लेकर बदलते रुख का पता चलता है. स्क्रिपबॉक्स ने ये सर्वे जुलाई़ 2020 में किया था. सर्वे में 83 फीसदी पुरुष और 17 प्रतिशत महिलाएं शामिल थीं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 9, 2020, 5:37 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. कोरोना वायरस महामारी (Coronavirus in India) ने लोगों के कामकाज के तरीकों, व्‍यवहार के साथ ही निजी वित्‍तीय मामलों (Financial Issues) को लेकर रुख में भी बदलाव कर दिया है. अब लोग खर्च से ज्‍यादा बचत (Savings) पर ध्‍यान दे रहे हैं. डिजिटल मनी मैनेजमेंट सर्विस प्रोवाइटर स्क्रिपबॉक्‍स के एक सर्वे के मुताबिक, करीब 45 फीसदी भारतीय कोविड-19 के बाद आर्थिक सुधार को लेकर बहुत आशावादी नहीं है. उनके मुताबिक, आर्थिक सुधार के मामले में अनिश्चितता का माहौल बना रहेगा. सर्वे में शामिल करीब आधे लोगों का अनुमान है कि कम से कम एक साल के लिए धीमी गति से आर्थिक वृद्धि (Economic Growth) होगी.

50 फीसदी ने कहा, आपात स्थिति के लिए करेंगे ज्‍यादा बचत
स्क्रिपबॉक्‍स के सर्वे में लोगों के निजी वित्तीय मामलों (Personal Finance) को लेकर बदलते रुख का पता चलता है. स्क्रिपबॉक्स ने ये सर्वे जुलाई़ 2020 में किया था. इस सर्वे में 1,400 से अधिक वयस्क भारतीयों की राय ली गई. इनमें से 83 फीसदी पुरुष और 17 प्रतिशत महिलाएं थीं. स्क्रिपबॉक्स के फाइनेंशियल फ्रीडम सर्वे-2020 के अनुसार, 50 फीसदी उत्तरदाताओं ने गैर-जरूरी खर्च (Non-essential Expenditure) बंद करने और किसी आपात स्थिति के लिये ज्‍यादा से ज्‍यादा बचत करने की योजना बनाई है.

ये भी पढ़ें- सरकारी कर्मचारियों के लिए बेहतर है NPS में निवेश, दे रहा FD से ज्‍यादा मुनाफा
EMI बोझ घटाने की योजना बना रहे हैं ज्‍यादातर भारतीय


सर्वे में कहा गया है कि 28 प्रतिशत लोग गैर-आवश्यक चीजों पर खर्च में कटौती करेंगे. वहीं, 22 प्रतिशत लोग किसी आपातकालीन स्थिति के लिए अधिक बचत करेंगे और 10 प्रतिशत ईएमआई (EMI) बोझ को कम करेंगे. सर्वेक्षण में शामिल ज्यादातर लोगों का कहना है कि वैश्विक महामारी (Pandemic) का ये दौर भारी वित्तीय दिक्कतों (Financial Crisis) का भी समय है. लगभग हर दो भारतीय में से एक (45 फीसदी) अर्थव्यवस्था की स्थिति को लेकर अनिश्चित है. ये लोग कम से कम एक साल के लिए धीमी आर्थिक वृद्धि का अनुमान लगा रहे हैं.

ये भी पढ़ें- हर महीने 4500 रुपये की बचत से भी बन सकते हैं करोड़पति, बस ऐसे बनाएं रणनीति

11 फीसदी लोग भर रहे आय के 50 फीसदी से ज्‍यादा EMI
फाइनेंशियल फ्रीडम सर्वे-2020 (Financial Freedom Survey-2020) के अनुसार, करीब 44 प्रतिशत लोग मासिक आय (Monthly Income) के 15 से 30 फीसदी के बराबर ईएमआई भर रहे हैं. वहीं, 11 फीसदी लोग ऐसे भी हैं, जिनकी हर महीने भुगतान की जाने वाली ईएमआई उनकी आय के 50 प्रतिशत से भी ज्‍यादा है. सर्वेक्षण में सामने आया कि कोविड-19 वैश्विक महामारी ने भारतीयों को अधिक बचत करने और फिजूलखर्ची पर नियंत्रण के लिए प्रात्‍साहित किया है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज