बदहाल बिजली व्‍यवस्‍था! दो-तिहाई गांवों और 40% शहरों में हर दिन होता है पावर कट, 6% लोगों ने ही की शिकायत

देश में बड़ी तादाद में गांवों और शहरों में हर दिन लोगों को बिजली कटौती की समस्‍या से जूझना पड़ता है.
देश में बड़ी तादाद में गांवों और शहरों में हर दिन लोगों को बिजली कटौती की समस्‍या से जूझना पड़ता है.

काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवॉयरमेंट एंड वॉटर (CEEW) और इनिसिएटिव फॉर सस्टेनेबल एनर्जी पॉलिसी (ISEP) की ओर से 21 राज्यों के 152 जिलों के 15,000 घरों में किए गए सर्वे के मुताबिक, उपभोक्‍ता अधिकारों (Consumer Rights) को लेकर जागरूकता की कमी के कारण सिर्फ 6 फीसदी लोगों ने ही बिजली आपूर्ति (Electricity Supply) से जुड़े मामलों की शिकायत संबंधित अथॉरिटी से की है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 13, 2020, 6:58 PM IST
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नई दिल्‍ली. देश की आजादी के 72 साल बाद भी गांवों ही नहीं शहरों में भी लोगों को 24 घंटे बिजली (Electricity) नहीं मिल पा रही है. जर्जर ट्रांसमिशन व डिस्ट्रिब्यूशन व्‍यवस्‍था, डिस्कॉम कंपनियों के घाटे और बिजली चोरी जैसे कारणों को इसके लिए जिम्‍मेदार बताया जाता है. काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवॉयरमेंट एंड वॉटर (CEEW) ने अपनी रिपोर्ट 'स्टेट ऑफ इलेक्ट्रिसिटी एक्सेस इन इंडिया' में कहा है कि देश के दो तिहाई गांवों (Villages) और 40 फीसदी शहरों (Cities) में हर दिन कम से कम एक बार बिजली गुल (Power Cut) जरूर होती है.

उत्तर प्रदेश में बिजली कटौती की सबसे ज्‍यादा समस्या
सर्वे में शामिल 76 फीसदी लोगों ने माना कि उनके घरों में अक्सर बिजली गुल हो जाती है. ज्‍यादा देरी और बार-बार बिजली गुल होने के मामले में उत्तर प्रदेश पहले पायदान पर है. उसके बाद झारखंड, असम, बिहार और हरियाणा में भी अधिक देरी तक और बार-बार बिजली गुल होने की समस्याएं देखने को मिलती हैं. करीब एक तिहाई आबादी को बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता से समझौता करना पड़ता है. वोल्टेज कम या ज्‍यादा होने की समस्या से ब्लैक ऑउट्स, कम रोशनी और घरों में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों के खराब होने की समस्‍या आम बात है. अधिकारों को लेकर जागरूकता की कमी के कारण महज 6 फीसदी लोगों ने ही बिजली आपूर्ति से जुड़े मामलों की शिकायत संबंधित अथॉरिटी से की है.


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सर्वे में ये महत्त्वपूर्ण जानकारियों का भी हुआ खुलासा
आंकड़ों पर गौर करें तो भारत दुनिया में तीसरा सबसे ज्‍यादा बिजली पैदा करने वाला और तीसरा सबसे अधिक बिजली खपत वाला देश है. सरकारों और राजनीतिक दलों की तरफ से लोगों को 24 घंटे सस्ती बिजली आपूर्ति का वादा किया जाता है. हालांकि, सच्‍चाई ये है कि देश की बड़ी आबादी को कई-कई घंटे अंधेरे में बिताने पड़ते हैं. सर्वे में खुलासा किया गया है कि यूपी, एमपी, राजस्थान और बिहार में करीब 2.4 फीसदी घरों में बिजली पहुंची ही नहीं है. इनमें भी ज्‍यादातर लोगों ने कहा कि वे ग्रिड कनेक्शन वाली बिजली का खर्च नहीं उठा सकते हैं. बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता और भरोसा अभी भी देखने को नहीं मिल पाया है.

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बिजली बिल में भी झोल-माल देखने को मिलता है
उपभोक्ताओं से बिजली बिलों की रकम को समय से नहीं वसूले जाने की वजह से भी डिस्कॉम पिछले कई साल से घाटे में चल रही है. सर्वे के मुताबिक, 4 फीसदी यूजर्स अनियमित बिल प्राप्त करते हैं. वहीं, 5 फीसदी ग्रिड यूजर्स ने कहा कि उन्‍होंने कभी भी बिजली बिल नहीं देखा है. ग्रिड यूजर्स को नियमित रूप से बिजली बिल मिलने के मामले में झारखंड में सबसे कम हिस्सेदारी 55 फीसदी देखी गई है. इसके बाद बिहार में यह आंकड़ा 64 फीसदी के आसपास है. असम, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में बिजली बिल की अनियमितता के मामले सबसे ज्‍यादा हैं. इनिसिएटिव फॉर सस्टेनेबल एनर्जी पॉलिसी (ISEP) के साथ मिलकर सीईईडब्ल्यू ने देश के 21 राज्यों के 152 जिलों के 15,000 घरों में सर्वे किया.
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