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राहत! नहीं बढ़ेंगी जीएसटी दरें, सुशील मोदी ने बताई ये वजह

सुशील कुमार मोदी
सुशील कुमार मोदी

FICCI सम्मेलन में बात करते हुए सुशील कुमार मोदी ने कहा कि आर्थिक सुस्ती के इस दौरान में जीएसटी दरों में बढ़ोतरी की कोई गुंजाइश नहीं है. इससे खपत पर असर पड़ेगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 22, 2019, 3:55 PM IST
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नई दिल्ली. बिहार के डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी (Sushil Kumar Modi) ने जीएसटी स्लैब (GST Slab) प्रस्तावित बदलाव की खबरों को खारीज करते हुए कहा है कि जब तक जीएसटी रेवेन्यू (GST Revenue) स्थिर नहीं हो जाता, तब तक ऐसी कोई संभावना नहीं है. उन्होंने कहा कि जीएसटी काउंसिल (GST Council) ने फैसला लिया है कि साल में एक बार दरों की समीक्षा की जाएगी. इस पर हर बैठक में विचार नहीं किया जाएगा.

दरों में कटौती से खपत पर होगा असर
उन्होंने कहा कि जीएसटी दरों में बढ़ोतरी से आर्थिक सुस्ती के इस दौर में खपत प्रीभावित होगा. सुशील मोदी ने कहा, 'मैं आपको सुनिश्चित करना चाहती की एक भी राज्य और केंद्र सरकार जीएसटी दरों में इजाफा करने के लिए तैयार है.'

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टैक्स कटौती की कोई गुंजाइश नहीं


FICCI के 92वें सालाना समारोह में बात करते हुए उन्होंने यह भी कहा कि जब तक जीएसटी रेवेन्यू स्थिर नहीं हो जाता, तब तक दरों में कटौती की कोई गुंजाइश नहीं है. आप एक ऐसे समय पर टैक्स कटौती के बारे में नहीं सोच सकते, जब अर्थव्यवस्था सुस्ती के दौर से गुजर रही.

24 वस्तुओं के इनवर्टेड ड्यूटी पर विचार
बता दें कि पिछले सप्ताह बैठक के दौरान जीएसटी रेवेन्यू वृद्धि पैनल ने जीएसटी रेट स्लैब्स को रिस्ट्रक्चर करने और पुन: विचार करने का प्रस्ताव दिया था. पैनल ने मोबाइल फोन, फुटवियर, फैब्रिक, LED लाइट्स मेडिकल औजार, और बर्तन समेत कुल 24 वस्तुाओं का जिक्र किया, जिनके इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर से सालाना 20 हजार करोड़ रुपये प्राप्त किए जा सकते हैं. इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर का मतलब है कि इन वस्तुओं के इनपुट पर अधिक ड्यूटी देना पड़ता है. फाइनल वस्तु एवं सेवाओं के लिए कम टैक्स देयता होती है.

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गलत इनवॉइस पर इनपुट टैक्स क्रेडिट रोकने का फैसला
पिछले सप्ताह बुधवार की बैठक में जीएसटी काउंसिल में फैसला लिया गया था कि कुछ मामलों में फेक इनवॉइस प्रस्तुत करते हुए पाया जाता है तो उनके इनपुट टैक्स क्रेडिट (Input Tax Credit) को रोक दिया जाएगा. चालू वित्त वर्ष के पहले 8 महीनों में से 4 महीने ऐसे रहे हैं जब जीएसटी रेवेन्यू 1 लाख करोड़ रुपये से कम रहा है.

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