• Home
  • »
  • News
  • »
  • business
  • »
  • होम लोन लिया है तो लॉकडाउन के बीच घर बैठे पूरा कर लें ये काम, घट जाएगी आपकी EMI

होम लोन लिया है तो लॉकडाउन के बीच घर बैठे पूरा कर लें ये काम, घट जाएगी आपकी EMI

..तो क्या RBI की 6 महीने तक EMI ना चुकाने की छूट से आपको होगा फायदा, जानिए सच?

..तो क्या RBI की 6 महीने तक EMI ना चुकाने की छूट से आपको होगा फायदा, जानिए सच?

होम लोन को एक्सटर्न बेंचमार्क से जोड़ने पर ग्राहकों को EMI बचत कम करने में मदद मिल सकती है. खासकर, एक ऐसे समय में जब नीतिगत ब्याज दरों में बड़ी कटौती गई है. आरबीआई ने 1 अक्टूबर 2019 से एक्सटर्नल बेंचमार्क लागू कर दिया है.

  • Share this:
    नई​ दिल्ली. भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा लोन प्राइसिंग को पारदर्शी बनाने के लिए एक्सटर्नल बेंचमार्क रेट्स से लिंक करने के आदेश के बाद भी कुछ बैंक ग्राहकों को इस बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं दे रहे. RBI ने कहा था कि अक्टूबर 2019 के बाद से लोन प्राइसिंग को एक्सटर्नल बेंचमार्क (External Benchmark Rates) से लिंक कर दिया जाएगा.

    कोरोना वायरस की इस संकट में जरूरी है कि अपने बजट पर विशेष ध्यान दिया जाए. ऐसा भी हो सकता है कि आप मौजूदा मार्केट दर से कहीं अधिक ब्याज दर चुका रहे हों. जानकारों का कहना है कि नए एक्सटर्नल बेंचमार्क रेट्स आने के बाद पुरानी व्यवस्था में बने रहने का कोई मतलब नहीं है. नई व्यवस्था ग्राहकों के लिहाज से कहीं बेहतर है.

    ध्यान देने वाली बात है कि मौजूदा ग्राहक अपने आप नए सिस्टम में शिफ्ट नहीं कर सकते हैं. लोन का अग्रीमेंट लोन की पूरी अवधि के लिए लागू होता है. ऐसे में इन ग्राहकों को अपने बैंक से संपर्क कर RLLR को अपनाने के लिए कहना होगा.

    यह भी पढ़ें: लॉकडाउन के बीच अब आपके घर तक सामान पहुंचाएगी सरकार, कर सकेंगे ऑनलाइन ऑर्डर

    कैसे हो रहा ग्राहकों को नुकसान?
    इस मामले से जुड़े एक जानकार का कहना है, 'लोन की ओरिजिनल रकम 14.5 लाख रुपये है. लगातार 13 साल तक इक्वेटेड मंथली इंस्टॉलमेंट्स (EMI) जमा करने के बाद भी आउटस्टैंडिंग प्रिंसिपल 11.03 लाख रुपये ही है.' वो अब तक 17.16 लाख रुपये जमा कर चुकी हैं. लेकिन तब तक कुल जमा किया हुआ प्रिंसिपल 3.12 लाख रुपये ही है. ब्याज दर कम होने के बाद भी बैंक ग्राहकों को नई व्यवस्था में स्विच करने की सलाह नहीं देते हैं.



    क्या है एक्सटर्नल बेंचमार्किंग?
    अगर आपने अप्रैल 2016 से सितंबर 2019 के बीच में कोई लोन लिया है तो संभव है कि मॉर्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) से लिंक हो. अगर आपका लोन इससे भी पुराना है तो यह बेस रेट के आधार पर होगा. ये दोनों बैंक के इंटर्नल बेंचमार्क (Internal Bechmark) हैं.

    मौजूदा लेनदारों की सबसे बड़ी शिकायत है कि जैसे ही RBI नीतिगत ब्याज दरों (Policy Rates) में इजाफा करता है तो बैंक लोन पर ब्याज दर को बढ़ा देते हैं. लेकिन RBI द्वारा इसमें कटौती करने पर बैंक अपने ब्याज दर को नहीं घटाते हैं. कई बार बेहद कम कटौती करते हैं.

    इसी को ध्यान में रखते हुए एक आंतरिक स्टडी में RBI ने पाया कि इंटर्नल बेंचमार्क ग्राहकों के लिहाज से बेहतर नहीं है. इसके बाद RBI ने एक्सटर्नल बेंचमार्क लाने का फैसला किया, जिसे 1 अक्टूबर 2019 से लागू भी कर दिया गया है.

    यह भी पढ़ें: म्यूचुअल फंड्स बंद होने से बैंकों में डिपॉजिट बढ़ा, मिल रहा बेहद कम ब्याज

    उदारहण के तौर पर देखें तो 27 मार्च को RBI ने रेपो रेट (Repo Rate) में 75 आधार अंक की बड़ी कटौती का ऐलान किया. इसके बाद बैंकों को रेपो लिंक्ड लेंडिंग रेट (RLLR) में भी इतनी ही कटौती करनी पड़ी. भारतीय स्टेट बैंक (SBI) का ब्याज दर 1 अप्रैल को 7.4 फीसदी से कम होकर 6.65 फीसदी पर आ गया. वहीं, दूसरी तरफ अक्टूबर 2019 के पहले दिए गए लोन पर MCLR में बेहद मामूली कटौती हुई. SBI ने MCLR में 35 बेसिस प्वाइंट की ही कटौती की जिसके बाद यह 7.75 फीसदी से घटकर 7.4 फीसदी हुआ. यह 10 अप्रैल से लागू किया गया.

    ग्राहकों के लिहाज से बेहतर है नया सिस्टम
    RBI द्वारा ऐलान के बाद RLLR तुरंत प्रभावी हो गया. MCLR के साथ ऐसा नहीं होता. अधिकतर बैंक RBI द्वारा रेपो रेट में कटौती के अगले महीने इसे घटाते हैं. ऐसे में नई व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक पारदर्शी और ग्राहकों के लिहाज से बेहतर है. लेकिन, लेनदारों को एक बात का ध्यान रखना होगा कि जब वो एक्सटर्नल बेंचमार्क को अपना लेते हैं तो उनके पास इंटर्नल बेंचमार्क में जाने का विकल्प नहीं होगा.



    कैसे होगी बचत?
    वर्तमान में RLLR का लाभ अधिकतर बैंकों के ग्राहकों द्वारा लिए गए लोन पर देखने को मिल रहा है. MCLR की तुलना में रेपो लिंक्ड होम लोन सस्ते हैं. 7.5 फीसदी की दर से 30 लाख रुपये के लोन पर RLLR सिस्टम में 2.52 लाख रुपये की बचत हो सकेगी. यह बचत लोन की पूरी अवधि में होगी. इसका मतलब है कि आपको 10 EMI कम जमा करनी होगी.

    RBI के नियमों के मुताबिक, नए सिस्टम में जाने के लिए बैंकों को मदद करना होगा. हालांकि, इसके लिए वो वन टाइम ए​डमिनिस्ट्रेशन चार्ज वसूल सकते हैं. आपको यह भी ध्यान देना होगा कि एक्सटर्नल बेंचमार्क केवल बैंकों के ग्राहकों के लिए ही है. यह हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों से लिए गए लोन पर लागू नहीं होता है.

    लॉकडाउन के बीच कैसे आरएलएलआर में शिफ्ट करें
    लेंडिंग रेट्स के नए सिस्टम में जाने के लिए आप अपने बैंक को ई-मेल या कॉल के जरिए संपर्क कर सकते हैं. आपको बैंक से यह पता करना होगा कि क्या इस प्रक्रिया को आनलाइन पूरा किया जा सकता है या नहीं. अगर यह आपको बैंक ब्रांच के दायरे में होगा तो संभव है कि आपका काम घर बैठे ही पूरा हो जाए. अगर आप अपने लोन बैलेंस को किसी दूसरे बैंक में ट्रांसफर कराना चाहते हैं तो आपको समस्या आ सकती है.

    यह भी पढ़ें: नहीं जा पा रहे ATM तो इन 5 तरीकों से करें पैसों का इंतज़ाम, वो भी बिना Tension

    पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

    हमें FacebookTwitter, Instagram और Telegram पर फॉलो करें.

    विज्ञापन