5 पॉइंट्स में जानिए, टाटा-साइरस मिस्त्री विवाद में क्या है सुप्रीम कोर्ट का फैसला

टाटा बनाम साइरस मिस्त्री

टाटा बनाम साइरस मिस्त्री

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने टाटा ग्रुप की कंपनी टाटा संस लिमिटेड और शापूरजी पलोनजी ग्रुप के साइरस मिस्त्री के मामले पर आज अपना फैसला सुना दिया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 26, 2021, 12:43 PM IST
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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने टाटा ग्रुप की कंपनी टाटा संस लिमिटेड और शापूरजी पलोनजी ग्रुप के साइरस मिस्त्री के मामले पर आज अपना फैसला सुना दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने साइरस मिस्त्री को कंपनी का दोबारा चेयरमैन नियुक्त करने का NCLAT का फैसला पलट दिया. चीफ जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस एएस बोपन्ना और वी रामासुब्रमण्यम की बेंच ने कहा कि साइरस मिस्त्री को टाटा संस के चेयरमैन पद से हटाना सही है. शीर्ष अदालत कहा कि शेयर से जुड़े मामले को टाटा और मिस्त्री दोनों ग्रुप मिलकर सुलझाएं. बता दें कि टाटा संस ने इस फैसले खिलाफ याचिका दायर की थी.

1. कोर्ट ने 17 दिसंबर को इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रखा था. नेशनल कंपनी लॉ अपीलीय ट्राइब्यूनल (NCLAT) ने 17 दिसंबर 2019 को यह फैसला सुनाया था कि टाटा संस के चेयरमैन पद पर मिस्त्री की दोबारा बहाली होगी. सुप्रीम कोर्ट ने आज यह फैसला पलट दिया. हालांकि NCLAT ने 10 जनवरी 2020 को जो फैसला लिया था सुप्रीम कोर्ट ने उसे बरकरार रखा.

2. दरअसल, टाटा संस और मिस्त्री दोनों ने नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) के 18 दिसंबर, 2019 के आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें टाटा संस लिमिटेड के चेयरमैन के रूप में साइरस मिस्त्री की बहाली का आदेश दिया था. इस पर 10 जनवरी 2020 को सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी. मिस्त्री टाटा संस के सबसे युवा चेयरमैन थे. मिस्त्री परिवार की टाटा संस में 18.4% की हिस्सेदारी है. वो टाटा ट्रस्ट के बाद टाटा सन्स में दूसरे बड़े शेयर होल्डर्स हैं.

3. NCLAT ने अपने ऑर्डर में 24 अक्टूबर 2016 के फैसले को अवैध बताया जिसमें मिस्त्री को डायरेक्टर और चेयरमैन पद से हटाया गया था. ट्राइब्यूनल का कहना है कि यह फैसला गलत ढंग से लिया गया है लिहाजा अब मिस्त्री को बहाल कर दिया गया है. ट्राइब्यूनल ने यह भी कहा कि टाटा संस के नए चेयरमैन के तौर पर एन चंद्रशेखरन की नियुक्ति इलीगल है. इस फैसले को लागू करने में 4 हफ्ते का वक्त दिया गया है ताकि टाटा ग्रुप अपील कर सके.
4. फैसले के दूसरे हिस्से में कोर्ट ने कहा है कि तीन कंपनियों में मिस्त्री को तत्काल प्रभाव से लागू करने को कहा है. यह फैसला सिर्फ उन्हीं तीन कंपनियों पर लागू होगा जिससे मिस्त्री को हटाया गया था.

5. सेबी के नियम के मुताबिक, किसी भी कंपनी में किसी भी बदलाव की जानकारी शेयर बाजार को देनी होगी क्योंकि उन फैसलों का असर शेयरों पर होता है. हालांकि टाटा ग्रुप ने अभी तक शेयर बाजार को मिस्त्री की बहाली की जानकारी आधिकारिक तौर पर नहीं दी है.
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