एयरइंडिया को खरीदने के मामले में टाटा सूमह ड्राइवर सीट पर! बोली में सबसे आगे

कंपनी पर है 60,000 करोड़ रुपये का बकाया कर्ज

कंपनी पर है 60,000 करोड़ रुपये का बकाया कर्ज

डिपार्टमेंट ऑफ इनवेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट्स मैनेजमेंट (Dipam) की सचिव तुहिन कांता पांडे के अनुसार एयर इंडिया के विनिवेश (divestment )में कुछ महीनों की देरी हो सकती है क्योंकि बोली लगाने वालों की तरफ से फिजिकल इंस्पेक्शन मौजूदा पैंडेमिक के चलते उतनी जल्दी संभव नहीं है.

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नई दिल्ली. एयरइंडिया (Airport) के विनिवेश को लेकर फिलहाल टाटा समूह (Tata Group) की होल्डिंग कंपनी टाटा सन्स प्राइवेट लिमिटेड ड्राइविंग सीट पर नजर आ रहा है. ऐसा इसलिए क्योंकि प्रारंभिक बोली में एयर इंडिया लिमिटेड के लिए स्पाइसजेट (Spice Jet) के प्रमोटर अजय सिंह की तुलना में अधिक कीमत लगाई है. मालूम हो सरकार चाहती है कि साल के अंत तक एयरइंडिया को पूरी तरह से निजी हाथों में सौंप दिया जाए. सूत्रों के अनुसार टाटा संस प्रस्तावित विनिवेश प्रक्रिया में आगे नजर आ रही है. कोविड की दूसरी लहर के कारण लोड फैक्टर कम हो गया है और हवाई यात्रा स्थगित हो रही है, जो एयर इंडिया के नकदी प्रवाह को ना सिर्फ बाधित कर रहा है बल्कि इसका मूल्यांकन को भी कम करता है. 



इस वजह से हो सकती है देरी 



डिपार्टमेंट ऑफ इनवेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट्स मैनेजमेंट (Dipam) की सचिव तुहिन कांता पांडे के अनुसार एयर इंडिया के विनिवेश (divestment )में कुछ महीनों की देरी हो सकती है क्योंकि बोली लगाने वालों की तरफ से फिजिकल इंस्पेक्शन मौजूदा पैंडेमिक (Pandemic) के चलते उतनी जल्दी संभव नहीं है. मिंट इंडिया इनवेस्टमेंट समिट में यह जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि सरकार वित्त वर्ष 2021 की पहली छमाही में एयर इंडिया के विभाजन को पूरा करने का लक्ष्य बना रही है लेकिन समय के लिहाज से इसमें थोड़ी कमी हो सकती है. अब तक टाटा समूह और स्पाइसजेट के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक अजय सिंह ने अपनी व्यक्तिगत क्षमता के अनुसार बोली लगाने के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया है. 



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कंपनी पर है 60,000 करोड़ रुपये का बकाया कर्ज





सरकार एयर इंडिया में अपनी पूरी 100 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचेगी. केंद्रीय मंत्री ने अपने बयान में कहा था हमने फैसला किया है कि एयर इंडिया का 100% विनिवेश होगा. विनिवेश और गैर-विनिवेश के बीच विकल्प नहीं है. हालांकि, एयर इंडिया अब पैसा बना रही है, लेकिन अभी हमें प्रतिदिन 20 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है. कंपनी पर अब तक 60,000 करोड़ रुपये का बकाया कर्ज हो चुका हैबता दें कि  2007 में इंडियन एयरलाइंस (Indian Airlines) के साथ विलय के बाद से ही एयर इंडिया घाटे में चल रही है.



जून तक पूरी होगी विनिवेश की प्रक्रिया!



बता दें कि पिछली बैठक में एयर इंडिया के विनिवेश के लिए शॉर्टलिस्ट किए गए बोलीदाताओं को लिस्टेड किया गया था और बोलियों को 64 दिनों के भीतर मांगी गई थी. सरकार के बयान के मुताबिक, एयर इंडिया की विनिवेश प्रक्रिया मई या जून तक पूरी होने की संभावना है.


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