हर साल 70 हजार करोड़ रुपये के टैक्स का नुकसान झेल रही सरकार, जानिए कैसे

द टैक्स जस्टिस नेटवर्क ने अपनी एक रिपोर्ट में इस बारे में जानकारी दी है.
द टैक्स जस्टिस नेटवर्क ने अपनी एक रिपोर्ट में इस बारे में जानकारी दी है.

एक हालिया रिसर्च रिपोर्ट से पता चलता है कि दुनियाभर के कई देशों को सालाना 427 अरब डॉलर के टैक्स चोरी का नुकसान झेलना पड़ रहा है. भारत के लिए यह रकम 10 अरब डॉलर से ज्यादा की है. इसमें कॉरपोरेट टैक्स के अलावा प्राइवेट टैक्स चोरी भी शामिल है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 21, 2020, 11:58 AM IST
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नई दिल्ली. कई देश इंटरनेशनल कॉरपोरेट टैक्स और प्राइवेट टैक्स की चोरी की वजह से हर साल करीब 427 अरब डॉलर का नुकसान झेल रहे हैं. भारत के लिए यह आंकड़ा 10.3 अरब डॉलर यानी करीब 70 हजार करोड़ रुपये है. 'The Tax Justice Network' ने अपनी एक स्वतंत्र रिसर्च के हवाले से इस बारे में जानकारी दी है. यह अंतरराष्ट्रीय स्तर की एक नेटवर्क है, जो कई संगठनों के साथ मिलकर काम करती है. हाल ही में जारी इस रिपोर्ट से पता चलता है कि टैक्स हेवन (Tax Heaven) के नाम से पहचाने जाने वाले देशों की वजह से दूसरे देशों को 427 अरब डॉलर का नुकसान हो रहा है.

इसमें से करीब 246 अरब डॉलर (57.4%) तो बहुराष्ट्रीय कंपनियां कॉरपोरेट टैक्स न देकर बचा रही है. जबकि, 182 अरब डॉलर (42.6%) प्राइवेट टैक्स चोरी की रकम है. इस रिपोर्ट में बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs - Multi-National Companies) की उन्हीं आंकड़ों को शामिल किया गया है, जिन्हें वे स्वयं टैक्स प्राधिकरणों को दी हैं.

कैसे हो रहा इन देशों को भारी नुकसान?
इन बहुराष्ट्रीय कं​पनियों ने अरबों डॉलर के टैक्स बचत के लिए 1.38 लाख करोड़ डॉलर का मुनाफा उन देशों से टैक्स हेवन माने जाने वाले देशों में शिफ्ट किया है, जहां कंपनियों को यह मुनाफा हुआ है. टैक्स हेवेन माने जाने कुछ देशों में इन कंपनियों को बेहद कम कॉरपोरेट टैक्स देना होता है या बिल्कुल ही नहीं देना होता है. जबकि, प्राइवेट टैक्स चोरी करने वाले लोगों ने अपनी कुल रकम का करीब 10 लाख करोड़ डॉलर ​की वित्तीय संपत्ति दूसरे देशों में जमा की है.
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अगर मौजूदा महामारी की पृष्ठभूमि में देखें तो पाएंगे कि 427 अरब डॉलर की यह रकम करीब 34 मिलियन नर्सों के सालाना वेतन या किसी एक नर्स को हर सेकेंड उसकी सालान सैलरी दिए जाने के बराबर है.

भारत पर क्या असर होगा?
भारत के ​परिदृश्य से देखें तो 10.3 अरब डॉलर में से करीब 10.11 अरब डॉलर इंटरनेशनल कॉरपोरेट टैक्स के तौर पर नुकसान हो रहा है. बाकी बचे हुए 202.15 मिलियन डॉलर की रकम प्राइवेट टैक्स चोरी की है.

भारत सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, मौजूदा महामारी के बीच भारत से विदेशों में जाने वाली रकम पहली तिमाही में घटकर 5.7 अरब डॉलर पर रही. पिछले साल की सामान अवधि में यह रकम 11.3 अरब डॉलर पर थी. हालांकि, केंद्र सरकार टैक्स चोरी को रोकने के लिए कई कदम भी उठा रही है. सरकार की इस बात पर भी नजर है कि कहीं कंपनियां अपने रॉयल्टी के नाम पर उन देशों में बड़ी रकम तो नहीं भेज रहे, जहां कम टैक्स का नियम लागू है.

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क्या है समाधान?
इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वैश्विक स्तर पर टैक्स नुकसान के लिए 98 फीसदी तक वही देश जिम्मेदार हैं, जहां लोगों की कमाई ज्यादा है. बचे हुए 2 फीसदी में कम कमाई करने वाले देश शामिल हैं. टीजेएन ने अपनी इस रिपोर्ट में यह भी कहा है कि इन देशों के सरकारों को बहुराष्ट्रीय कंपनियों से ज्यादा प्रॉफिट टैक्स वसूलना चाहिए. इनमें वो कंपनियां भी शामिल हैं, जो वैश्विक स्तर पर डिजिटल सेवाएं देती हैं और कोरोना काल में इनकी सबसे अधिक कमाई हो रही है. इस रिपोर्ट में विदेशों में एसेट्स पर वेल्थ टैक्स लगाने का भी सुझाव दिया है.
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