म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं तो ध्यान रखें कैपिटल गेन और डिविडेंट पर अलग-अलग लगता है टैक्स, अनदेखी पर आ सकता है नोटिस

म्यूचुअल फंड के निवेशकों को उसी हिसाब से डिविडेंड मिलता है, जितना यूनिट उनके पास होता है.

म्यूचुअल फंड के निवेशकों को उसी हिसाब से डिविडेंड मिलता है, जितना यूनिट उनके पास होता है.

म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) में मुख्य रूप से दो तरह से कमाई होती है. पहला कैपिटल गेन (Capital Gain)और दूसरे डिविडेंड (Dividend) इनकम. दोनों कमाई पर टैक्स लगता है. इसलिए आईटीआर (ITR) में इसका ध्यान रखना बेहद जरूरी है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 11, 2021, 4:32 PM IST
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नई दिल्ली. फिक्सड डिपॉजिट (Fixed Deposit) पर ब्याज दरें कम होने की वजह से आजकल लोग म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) में निवेश कर रहे हैं. इसमें सीधे शेयर बाजार में निवेश करने वाला जाखिम कम होता है और एफडी से ज्यादा फायदा मिलने की भी उम्मीद होती है. लेकिन एफडी की बजाय इसमें इनकम टैक्स (Income Tax ) का कानून थोड़ा जटिल है.

आईए इस खबर के जरिए हम समझते हैं कि कैसे म्युचुअल फंड में टैक्स की देनदारी बनती है. म्युचुअल फंड में मुख्य रूप से दो तरह से कमाई होती है. पहला कैपिटल गेन (Capital Gain) और दूसरे डिविडेंड (Dividend) इनकम. जब कंपनियों के पास सरप्लस पैसा होता है तो वह स्टेक होल्डर्स में बांट देती है. यह डिविडेंड के रूप में होता है. म्यूचुअल फंड के निवेशकों को उसी हिसाब से डिविडेंड मिलता है, जितना यूनिट उनके पास होता है. कैपिटल गेन तब कहलाता है जब वह अपना यूनिट बेचता है. अगर पर्चेज वैल्यू से सेल्स वैल्यू ज्यादा होती है तो वह कैपिटल गेन होता है. कम होने पर पर कैपिटल लॉस होता है.

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डिविडेंड पर होने वाली कमाई सीधे आपकी इनकम मानी जाती है

वर्तमान नियम के हिसाब से अगर कोई म्यूचुअल फंड डिविडेंड जारी करता है तो यह इनकम आपकी टोटल इनकम में शामिल हो जाती है. उसके बाद आप जिस टैक्स स्लैब में आते हैं, उसी रेट से टैक्स काट लिया जाता है. पहले डिविडेंड इनकम टैक्स फ्री था क्योंकि कंपनियां डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स काटती थीं. 12 मार्च को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट एक सर्कुलर जारी किया है जिसमें म्यूचुअल फंड कंपनियों से कहा गया है कि वे कैपिटल गेन और डिविडेंड बांटने पर इसकी पूरी जानकारी टैक्स विभाग के साथ शेयर करें.

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कैपिटल गेन में भी टैक्स की दरें दो तरह की हैं



कैपिटल गेन पर दो तरह से टैक्स लगता है. यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपका फंड किस तरह का है. अगर आपने इक्विटी फंड में निवेश किया है तो 12 महीने से पहले यूनिट बेचने पर वह शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन होगा और 12 महीने से ज्यादा होल्ड करने के बाद बेचने पर वह लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन होगा. डेट फंड में 36 महीने तक STGC टैक्स लगेगा जबकि उसके बाग LTCG टैक्स लगेगा. दोनों तरह के फंड में शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन पर फ्लैट 15 फीसदी का टैक्स लगता है जबकि लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन में 1 लाख तक कैपिटल गेन टैक्स फ्री है. उसके बाद 10 फीसदी का फ्लैट टैक्स लगता है.

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फिक्स्ड डिपॉजिट में इंट्रेस्ट इनकम आपकी टोटल इनकम में जुड़ती है

फिक्स्ड डिपॉजिट में इंट्रेस्ट इनकम आपकी टोटल इनकम में जुड़ जाती है जिसके कारण हाई टैक्स स्लैब वालों के लिए यह घाटे का सौदा है जबकि म्यूचुअल फंड के साथ ऐसा नहीं होता है. म्यूचुअल फंड को काफी टैक्स फ्रेंडली माना जाता है.

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टैक्स का ध्यान न रखने पर आ सकता है नोटिस

असेसमेंट ईयर 2021-22 चल रहा है. इस समय वित्त वर्ष 2020-21 के लिए रिटर्न फाइल किए जा रहे हैं. सरकार टैक्स चोरों के खिलाफ ज्यादा सख्त हो गई है. ऐसे में इस बात का खयाल रखना जरूरी है कि रिटर्न फाइल करने के दौरान आप अपनी सभी इनकम की पूरी जानकारी दें.
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