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काम की बात: जानिए कितना देना होता है Debt Investments पर टैक्स

काम की बात: जानिए कितना देना होता है Debt Investments पर टैक्स

जानिए क्या हैं टैक्स के नियम

जानिए क्या हैं टैक्स के नियम

डेब्ट म्यूचुअल फंड ऐसी स्कीमें होती हैं जो सरकारी और कॉरपोरेट बॉन्ड जैसे फिक्स्ड इनकम इंस्ट्रूमेंट्स या ट्रेजरी बिल जैसे मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करती हैं. ये स्कीमें निवेशकों को थोड़ा कम मुनाफा देती हैं, लेकिन इन्हें सुरक्षित माना जाता है.

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नई दिल्ली. किसी भी निवेशक को निवेश करने से पहले इनकम टैक्स (Income Tax) का भी गणित समझ लेना जरूरी है. इससे निवेशकों को कम जोखिम के साथ अपने पोर्टफोलियो को संतुलित करने में मदद मिलती है. म्यूचुअल फंड को भुनाने (Mutual Fund Withdrawal) से पहले इस पर लगने वाले इनकम टैक्स (Income Tax) कुछ अलग नियम हैं. क्योंकि म्यूचुअल फंड में इक्विटी (Equity) और डेट (Debt) के लिए टैक्स देनदारी अलग-अलग होती है.

डेब्ट म्यूचुअल फंड ऐसी स्कीमें होती हैं जो सरकारी और कॉरपोरेट बॉन्ड जैसे फिक्स्ड इनकम इंस्ट्रूमेंट्स या ट्रेजरी बिल जैसे मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करती हैं. ये स्कीमें निवेशकों को थोड़ा कम मुनाफा देती हैं, लेकिन इन्हें सुरक्षित माना जाता है.

इससे निवेशकों को कम जोखिम के साथ अपने पोर्टफोलियो को संतुलित करने में मदद मिलती है. इन्हें फिक्स्ड इनकम फंड के नाम से भी जाना जाता है. ऐसी योजनाओं को आम तौर पर इक्विटी-ओरिएंटेडेड योजनाओं की तुलना में कम जोखिम भरा माना जाता है क्योंकि ये स्थिर रिटर्न की पेशकश करती हैं.

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डेट फंड पर कैसे लगता है टैक्स
डेट म्यूचुअल फंड में लांग टर्म इन्वेस्टमेंट से मिलेन वाले रिटर्न पर इंडेक्सशन के बाद 20 फीसदी टैक्स लगता है. लेकिन शॉर्ट टर्म इन्वेस्टमेंट पर पैसे भुनाने पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स लगता है, जो निवेशक के टैक्स स्लैब पर आधारित होता है.

FD पर कब कटता है टैक्स
एफडी के ब्याज पर टीडीएस कटने का खास नियम है. अगर एफडी पर 40,000 रुपये से ज्यादा ब्याज मिला है तो उस पर टीडीएस कटेगा. सीनियम सिटीजन के केस में यह राशि 50,000 रुपये है. अगर ब्याज की राशि इससे ज्यादा है तो पूरे अमाउंट पर टीडीएस कट जाएगा. अगर टैक्स के दायरे में नहीं आते हैं तो इसे बचा सकते हैं.

NSC पर टैक्स के नियम
धारा 80सी के तहत NSC निवेश किए गए पैसों पर 1.5 लाख रुपये सालाना तक पर टैक्स छूट मिलती है. इसकी अवधि 5 साल की होती है, इसलिए हर साल इस पर मिलने वाला ब्याज भी फिर से निवेश होता है, इसलिए उस पर धारा 80सी के तहत टैक्स छूट मिलती है, लेकिन मेच्योरिटी पर मिले ब्याज पर टैक्स छूट नहीं मिलती है. अगर फिक्स्ड डिपॉजिट योजनाओं से इसकी तुलना करें तो इसमें निवेश करना काफी फायदे का सौदा साबित होता है.

Tags: Income tax, Income Tax Planning

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