AGR भुगतान के लिए टेलीकॉम कंपनियों को सरकार दे सकती है 15 साल का समय, जानें पूरा मामला

AGR भुगतान के लिए टेलीकॉम कंपनियों को सरकार दे सकती है 15 साल का समय, जानें पूरा मामला
टेलिकॉम कंपनियां

CNBC आवाज़ को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, एजीआर भुगतान के लिए टेलीकॉम कंपनियों को 15 साल की राहत मिल सकती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 13, 2020, 12:23 PM IST
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नई दिल्ली. टेलीकॉम कंपनियों को एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) की देनदारी से बचाने के लिए केंद्रीय  कैबिनेट में उन्हें राहत देने पर फैसला हो गया है. CNBC आवाज़ को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, एजीआर भुगतान के लिए टेलीकॉम कंपनियों को 15 साल की राहत मिल सकती है. सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च को है, इससे पहले टेलीकॉम कंपनियां और सरकार एक रोडमैप तैयार करना चाहती हैं.

आपको बता दें कि अभी तक वोडाफोन ने अपने 53 हजार करोड़ रुपये के बकाए में से केवल 3,500 करोड़ रुपये चुकाए हैं. वहीं, एयरटेल ने 35,586 करोड़ रुपये में से 18 हज़ार करोड़ रुपये चुकाए हैं. वहीं टाटा समूह ने 13,823 करोड़ रुपये में से 4,197 करोड़ रुपये चुकाए हैं.

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टेलीकॉम विभाग के प्रति इन कंपनियों का करीब 1.63 लाख करोड़ रुपये बकाया है. इसमें कंपनियों की लाइसेंस फीस और स्पेक्ट्रम यूसेज चार्ज शामिल है. लाइसेंस के तौर पर बकाया रकम 92,642 करोड़ रुपये और स्पेक्ट्रम यूसेज चार्ज के तौर पर 70,869 करोड़ रुपये बकाया है. सबसे अधिक बकाया भारती एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया का है.

क्या है एजीआर (What is AGR) - AGR यानी Adjusted gross revenue दूरसंचार विभाग (DoT) द्वारा टेलीकॉम कंपनियों से लिया जाने वाला यूसेज और लाइसेंसिग फीस है. इसके दो हिस्से हैं- स्पेक्ट्रम यूसेज चार्ज और लाइसेंसिंग फीस.

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DOT का कहना है कि AGR की गणना किसी टेलीकॉम कंपनी को होने वाले संपूर्ण आय या रेवेन्यू के आधार पर होनी चाहिए, जिसमें डिपॉजिट इंटरेस्ट और एसेट बिक्री जैसे गैर टेलीकॉम स्रोत से हुई आय भी शामिल है. दूसरी तरफ, टेलीकॉम कंपनियों का कहना है कि AGR की गणना सिर्फ टेलीकॉम सेवाओं से होने वाली आय के आधार पर होनी चाहिए.

(असीम मनचंदा, संवाददाता, CNBC आवाज़)
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