वोडाफोन और एयरटेल से ट्राई ने फिर मांगा जवाब, 4 अगस्त तक देना होगा जवाब

वोडाफोन और एयरटेल से ट्राई ने फिर मांगा जवाब, 4 अगस्त तक देना होगा जवाब
भारती एयरटेल से करीब दो दर्जन सवाल पूछे गए हैं.

टेलिकॉम नियामक TRAI ने भारती एयरटेल (Bharti Airtel) और वोडाफोन (Vodafone) प्राथमिकता योजना पर दिए एक सवालों को असंतुष्ट करार देते हुए इन कंपनियों से एक बार फिर से जवाब मांगा है. दोनों कंपनियों को चार अगस्त तक स्पष्ट जवाब देना है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 2, 2020, 11:58 PM IST
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नई दिल्ली. भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) भारती एयरटेल (Bharti Airtel) और वोडाफोन (Vodafone) द्वारा ‘प्रायरटी’ (प्राथमिकता) योजना पर दिए गए जवाबों से संतुष्ट नहीं है. नियामक ने अब दोनों कंपनियों से कुछ अतिरिक्त ‘तकनीकी’ सवाल पूछे हैं और इस पर अपना रुख चार अगस्त तक स्पष्ट करने को कहा है. एक सूत्र ने यह जानकारी दी. नियामक ने दोनों कंपनियों से अपने इस दावे के समर्थन में पुख्ता प्रमाण देने को कहा है कि उनकी वरीयता के आधार पर पेशकश से नेटवर्क के अन्य प्रयोगकर्ताओं के लिए सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित नहीं हुई और न ही इसमें किसी नियम का उल्लंघन किया गया.

एयरटेल से दो दर्जन सवाल
एक अन्य सूत्र ने कहा कि भारती एयरटेल से करीब दो दर्जन सवाल पूछे गए हैं. इसमें एक सवाल यह है क्या प्लैटिनम और गैर-प्लैटिनम प्रयोगकताओं के लिए डेटा स्पीड की कोई सीमा तय की गई थी. प्लैटिनम प्रयोगकर्ताओं के लिए इसके प्रवाह की सीमा क्या थी.

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4 अगस्त तक जवाब देने का मौका


ट्राई ने 31 जुलाई को भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया को नए सवालों का सेट भेजा है. इसपर उन्हें चार अगस्त तक जवाब देने को कहा गया है. इस बारे में एयरटेल और वोडाफोन को भेजे ई-मेल का जवाब नहीं मिला.

ट्राई ने कहा कि यह वांछित है कि उसी दिन होने वाले प्रस्तुतीकरण में उन बिंदुओं को भी शामिल किया जाए, जिनपर सवाल पूछे गए हैं. सूत्र ने कहा कि नियामक ने दोनों कंपनियों से अपने दावों के समर्थन में आंकड़े देने को कहा है.

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कंपनियों द्वारा दिया गया जवाब अस्पष्ट
ट्राई के एक अधिकारी ने कहा कि पूर्व में इन कंपनियों ने जो जवाब दिए हैं वे ‘अस्पष्ट’ हैं और ये जवाब नियामक की इस चिंता को दूर करने का कोई स्पष्ट भरोसा नहीं दिलाते कि कुछ विशेष ग्राहकों को वरीयता देने से अन्य गैर-प्रीमियम श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिए सेवाओं की गुणवत्ता में कमी नहीं आई है. नियामक चाहता है कि ये कंपनियां अपने दावों के समर्थन में आंकड़ा दे कि प्रीमियम/प्लैटिनम योजना की वजह से अन्य ग्राहकों के लिए नेटवर्क का अनुभव खराब नहीं हुआ है.
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