बुरी खबर! इस सेक्टर के 60 हजार से ज्यादा एम्प्लॉई की नौकरी पर लटकी तलवार

टेलिकॉम सेक्टर से इस वित्त वर्ष के आखिर तक 60,000 से अधिक लोगों की छंटनी हो सकती है.
टेलिकॉम सेक्टर से इस वित्त वर्ष के आखिर तक 60,000 से अधिक लोगों की छंटनी हो सकती है.

टेलिकॉम सेक्टर से इस वित्त वर्ष के आखिर तक 60,000 से अधिक लोगों की छंटनी हो सकती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 24, 2018, 11:23 AM IST
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टेलिकॉम सेक्टर से इस वित्त वर्ष के आखिर तक 60,000 से अधिक लोगों की छंटनी हो सकती है. अब मर्जर करने वाली कंपनियों के साथ इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर्स, टावर फर्म्स और इंडस्ट्री से जुड़े रिटेल आर्म्स अधिक एंप्लॉयी नहीं रखना चाहते. स्टाफिंग फर्म टीमलीज सर्विसेज का कहना है कि 31 मार्च 2019 को खत्म होने वाले वित्त वर्ष तक टेलिकॉम सेक्टर से करीब 60,000 से ज्यादा नौकरियां जा सकती हैं. इसका सबसे ज्यादा असर कस्टमर सपॉर्ट और फाइनैंशल वर्टिकल्स पर पड़ेगा. इन दोनों सेगमेंट से क्रमश: 8,000 और 7,000 नौकरियां जाने की आशंका है.

टीमलीज की को-फाउंडर रितुपर्णा चक्रवर्ती का कहना है कि इंडस्ट्री अब स्टेबल हो रही है. इसलिए वित्त वर्ष 2019 के बाद छंटनी रुक सकती है और कंपनियां फ्रेश हायरिंग पर ध्यान देंगी. उन्होंने बताया, 'कंसॉलिडेशन के चलते 2019 में टेलिकॉम सर्विस और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर्स में 60-75 हजार नौकरियां कम हो सकती हैं.'

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एक इंडस्ट्री एग्जिक्यूटिव ने बताया कि वित्त वर्ष 2019 में सितंबर तक की शुरुआती दो तिमाही में टेलिकॉम इंडस्ट्री में 15-20 हजार नौकरियां कम हुई हैं. इस बारे में इकनॉमिक्स टाइम्स के ईमेल से पूछे गए सवालों का भारती एयरटेल, रिलायंस जियो और वोडाफोन आइडिया ने जवाब नहीं दिया. हालांकि, इंडस्ट्री बॉडी का कहना है कि इंडस्ट्री के बुरे दिन खत्म होने वाले हैं.
इंडस्ट्री के जानकारों की राय
एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह लगातार दूसरा साल है, जब इंडस्ट्री ने छंटनी की है. टेलिकॉम सेक्टर ने पिछले कुछ वर्षों में प्राइस वॉर, छोटी कंपनियों के बिजनस बंद करने और कुछ मर्जर देखे हैं. इस बीच कंपनियों के मुनाफे में कमी आई है. इंडस्ट्री में जो कंपनियां बची हैं, वे अपनी लागत कम कर रही हैं. इसका असर टावर, इंफ्रास्ट्रक्चर, रिटेल चेन, डिस्ट्रीब्यूटर्स जैसे दूसरे सहयोगी बिजनस पर भी पड़ा है. वे भी अपनी लागत कम कर रही हैं.

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