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बढ़ने वाले हैं टर्म इंश्योरेंस के प्रीमियम, तो क्या अभी टर्म प्लान लेना ठीक रहेगा? जानिए

बढ़ने वाले हैं टर्म इंश्योरेंस के प्रीमियम, तो क्या अभी टर्म प्लान लेना ठीक रहेगा? जानिए

प्योर प्रोटेक्शन टर्म इंश्योरेंस के प्रीमियम (Pure protection term insurance premiums) एक बार फिर से बढ़ने वाले हैं.

प्योर प्रोटेक्शन टर्म इंश्योरेंस के प्रीमियम (Pure protection term insurance premiums) एक बार फिर से बढ़ने वाले हैं.

प्योर प्रोटेक्शन टर्म इंश्योरेंस के प्रीमियम (Pure protection term insurance premiums) एक बार फिर से बढ़ने वाले हैं. इस बार इनके प्रीमियम में 25 से 45 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है. अंतरराष्ट्रीय री-इश्योरेंस करने वाली कंपनी म्यूनिख रे (Munich Re) ने भारत में लाइफ इंश्योरेंस करने वाली कंपनियों को दिसंबर में प्राइस बढ़ाने के बारे में जानकारी दी थी. कुछ कंपनियां रेट में बढ़ोतरी को पास कर सकती हैं, जबकि कुछ कंपनियां बढ़ोतरी के कुछ हिस्से को अपने तक ही सीमित रहने देंगी या फिर री-इंस्योरेंस कंपनी के साथ बढ़ोतरी को कम करवाने के लिए बात कर सकती है.

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    नई दिल्ली. प्योर प्रोटेक्शन टर्म इंश्योरेंस के प्रीमियम (Pure protection term insurance premiums) एक बार फिर से बढ़ने वाले हैं. इस बार इनके प्रीमियम में 25 से 45 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है. इंडस्ट्री की जानकारी रखने वाले लोग कहते हैं कि ग्लोबल मार्केट में री-इंस्योरेंस (Re-insurance rates) रेट काफी बढ़ गए हैं, जिसके चलते भारत में भी ऐसा होने जा रहा है. कुछ लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों ने तो अपने प्रिय पिछले साल ही बढ़ाए थे. उन्होंने कोविड-19 की वजह से मृत्यु दर (High mortality rates) में हो रहे इजाफे की वजह से प्रीमियम को बढ़ाया था. इस बार भी कारण वही बताया जा रहा है.

    अंतरराष्ट्रीय री-इश्योरेंस करने वाली कंपनी म्यूनिख रे (Munich Re) ने भारत में लाइफ इंश्योरेंस करने वाली कंपनियों को दिसंबर में प्राइस बढ़ाने के बारे में जानकारी दी थी. एक बड़े इंश्योरेंस एग्रीगेटर के अधिकारी ने अपना नाम ना छापने की शर्त पर बताया की कुछ कंपनियां रेट में बढ़ोतरी को पास कर सकती हैं, जबकि कुछ कंपनियां बढ़ोतरी के कुछ हिस्से को अपने तक ही सीमित रहने देंगी या फिर री-इंस्योरेंस कंपनी के साथ बढ़ोतरी को कम करवाने के लिए बात कर सकती है.

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    अभी तक क्यों नहीं बढ़े व्यक्तिगत टर्म प्रीमियम?
    सच तो यह है कि ग्रुप टर्म इंश्योरेंस पॉलिसीज में बढ़ी हुई कीमतों को पहले से ही एडजेस्ट कर दिया गया है. इंश्योरेंस ब्रोकिंग पोर्टल Securenow.in के मैनेजिंग डायरेक्टर और प्रिंसिपल ऑफिसर अभिषेक बोंदिया (Abhishek Bondia) का कहना है कि इस सेगमेंट में पहले से ही प्रीमियम 30 से 100 प्रतिशत तक बढ़ चुके हैं. अब समझा जा रहा है कि इंडिविजुअल टर्म प्लान प्रीमियम (Individual term premiums) भी जल्दी ही बढ़ सकते हैं. व्यक्तिगत टर्म प्रीमियम बढ़ाने के लिए रेगुलेटरी से अप्रूवल लेना एक लंबा प्रोसेस है. यही वजह है कि बीमाकर्ताओं ने अभी तक दाम नहीं बढ़ाए हैं, लेकिन देर-सवेर इनका बढ़ना तय माना जा रहा है.

    इस इंडस्ट्री से संबंधित विशेषज्ञों का मानना है कि कोविड-19 के बाद जो कीमतें बढ़ी थी, इस बार उससे ज्यादा बढ़ने वाली है. अभी तक भारत में टर्म इंश्योरेंस की कीमतें काफी कम है, लेकिन यह नई बढ़ोतरी काफी ज्यादा हो सकती है. हालांकि बीमा धारक को यह इंश्योरेंस कितने का पड़ेगा, या उसे कितनी वृद्धि का भार वहन करना पड़ेगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि कंपनियां उन पर कितना बोझ डालेंगी.

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    क्या अब पॉलिसी लेना ठीक है?
    फाइनेंस की प्लानिंग करने के वाले विशेषज्ञों का कहना है कि यह समय पॉलिसी खरीदने के लिए सही है. यदि आप वर्तमान समय में आए बदलाव की वजह से एक और पॉलिसी लेना चाहते हैं तो भी यह उपयुक्त समय है. बेंगलुरु की एक फिनेंशियल प्लानिंग फर्म Investography की फाउंडर श्वेता जैन का कहना है कि भारत में लोग अंडर-इन्श्योर्ड है. लोग अपने निवेश के लिए या फिर टैक्स बचाने के लिए इंश्योरेंस खरीदते हैं लेकिन अपने परिवार की प्रोडक्शन के लिए नहीं. इस तरह लोगों का सम एश्योर्ड (sum assured) आमतौर पर उससे आधा होता है, जितना कि होना चाहिए. तो जैसा कि सुना जा रहा है कि प्रीमियम बढ़ने वाले हैं, तो लोगों को एक बार अपनी जरूरतों के हिसाब से अपने इंश्योरेंस पर नजर डाल लेनी चाहिए.

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