केंद्र का बड़ा ऐलान! अब टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए अलग से लाई जाएगी प्रोत्‍साहन योजना

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी. (फाइल फोटो)

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी (Smriti irani ) ने बताया कि सरकार देश में कपड़ा उद्योग (Textile industry) को बढ़ावा देने के लिए जल्द ही नई कपड़ा नीति भी लाने की तैयारी कर रही है.

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    नई दिल्ली. कपड़ा मंत्रालय तकनीकी कपड़ों और मानव निर्मित कपड़े के उत्पादन के लिए जल्द ही प्रोत्साहन योजना की घोषणा कर सकता है. केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने एसोचैम के एक कार्यक्रम में बताया कि इस क्षेत्र के लिए प्रोत्साहन योजना की रुपरेखा तैयार की जा रही है. उन्होंने बताया कि सरकार देश में कपड़ा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए जल्द ही नई कपड़ा नीति भी लाने की तैयारी कर रही है. स्मृति ईरानी के अनुसार इससे पहले देश में कपड़ा नीति दो दशक पहले लाई गई थी. जो कि वर्तमान परिस्थियों के अनुरूप नहीं है. आपको बता दें स्मृति ईरानी के पास कपड़ा मंत्रालय और महिला एवं वाल विकास मंत्रालय का प्रभार है.
    एमएसपी पर खरीदी का दिया भरोसा- भारतीय उद्योग पर कृषि क्षेत्र के सुधारों के प्रभाव का उल्लेख करते हुये ईरानी ने कहा, ‘भारत सरकार ने पूरी प्रतिबद्धता के साथ यह सुनिश्चित किया है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के तहत खरीदी कार्य प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करते हुये आगे बढ़ाया जाये. जो भी एमएसपी के परिचालन में भागीदारी करता है उसे धन की प्राप्ति सीधे उसके बैंक खाते में प्राप्त हो.’ उन्होंने कहा, ‘वर्ष 2013- 14 में कपास के मामले में एमएसपी के तहत केवल 90 करोड़ रुपये की खरीदारी की गई थी. जबकि पिछले साल कपास की 28,500 करोड़ रुपये की खरीदारी की गई. वहीं चालू सत्र के दौरान कपास क्षेत्र में 14,659 करोड़ रुपये का खरीद कार्य हो चुका हो चुका है और देश में कपास का उत्पादन करने वाले 9.63 लाख किसानों के बैंक खाते में सीधे 11,799 करोड़ रुपये का हस्तांतरण किया जा चुका है.

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    नए कृषि कानूनों का किया बचाव- ईरानी ने कहा कि इससे तात्पर्य यह है कि जब हम नीतिगत सुधारों पर गौर करते हैं. तो आत्मनिर्भर भारत जैसे विचार को लेकर आगे बढ़ते हुये सीमित दायरे वाले अलग अलग खांचों में रहकर सफलता हासिल नहीं की जा सकती है. कृषि सुधारों की बात करते हुये उन्होंने कहा कि, जब किसी एक क्षेत्र में सुधार किये जाते हैं. तो उसका असर भारतीय अर्थव्यवस्था की समूची मूल्य श्रृंखला पर पड़ना है. उन्होंने कहा कि कृषि सुधारों को कोई एक झटके में नहीं किया गया. यह 19 साल तक चले विचार विमर्श और चर्चा के बाद किया गया. उद्योगों, कृषि क्षेत्र, किसान संगठनों और कृषि क्षेत्र में प्रौद्योगिकी का लाभ देने वाले विशेषज्ञों के साथ विचार विमर्श के बाद यह हुआ है. ताकि इससे मिलने वाले लाभ न केवल किसानों तक पहुंचे बल्कि उद्योग और लोगों को भी इसका लाभ मिले.

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