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दिल्ली में सीलिंग के मुद्दे पर CAIT ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखी चिट्ठी, मांगी मदद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) को एक लैटर लिखा है. लैटर में दिल्ली में 14 साल से चले आ रहे सीलिंग के पुराने मुद्दे का ज़िक्र किया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 3, 2020, 4:01 PM IST
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नई दिल्ली. देश के कारोबारियों के सबसे बड़े संगठन कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) को एक लैटर लिखा है. लैटर में दिल्ली में 14 साल से चले आ रहे सीलिंग के पुराने मुद्दे का ज़िक्र किया है. लैटर में पीएम से मांग की है कि जिस प्रकार से केंद्र सरकार (Central Government) ने दिल्ली में 1700 से अधिक अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित किया है, उसी आधार पर दिल्ली के व्यापारियों को सीलिंग और तोड़फोड़ से बचाने के लिए केंद्र सरकार एक एमनेस्टी स्कीम लाए. स्कीम के तहत 31 दिसंबर 2020 तक दिल्ली (Delhi) में "जो है जहाँ है जैसा है "के आधार पर यथास्तिथि बरकरार रखी जाए. दिल्ली में वर्षों से जो भी दुकानें सील हैं उनकी सील खोली जाए.

कैट ने सील खोलने के लिए पीएम को दिए यह सुझाव

कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने बताया कि पीएम को लिखे लैटर में सीलिंग के संबंध में कुछ सुझाव दिए गए हैं. जैसे सभी दुकानों को नियमित करने के लिए एक डेवलपमेंट नियम बनाये जाएं. व्यापारियों से बेहद वाज़िब नियमित शुल्क लेकर उन्हें नियमित किया जाए. एमनेस्टी स्कीम लाई जाए. उनका कहना है कि दिल्ली नगर निगम क़ानून, 1957 के अंतर्गत केंद्र सरकार को ऐसा आदेश जारी करने का पूर्ण अधिकार है. सरकार के इस कदम से दिल्ली के लगभग 10 लाख से अधिक व्यापारियों और उनके लगभग 30 लाख से अधिक कर्मचारियों को सीलिंग और तोड़फोड़ से राहत मिलेगी.



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लैटर में व्यापारियों ने लगाए हैं यह आरोप

राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल और कैट के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष विपिन आहूजा का कहना है कि दिल्ली के व्यापारियों द्वारा वर्ष 2006 से सीलिंग और तोड़फोड़ का सामना किया जा रहा है. हजारों व्यापारियों और उनके कर्मचारियों को रोजी-रोटी से वंचित कर दिया है. दिल्ली में सीलिंग की वजह से दिल्ली का व्यापार काफी हद तक तबाह गया है. पिछले कई सालों से दिल्ली की हजारों दुकानें सील पड़ी है और व्यापारियों की कोई सुनने वाला नहीं है.

दिल्ली नगर निगम क़ानून 1957 के अंतर्गत विभिन्न धाराओं के तहत कोई भी कार्रवाई करने से पहले नोटिस देने और व्यापारियों को उसका जवाब देने के लिए पर्याप्त समय देने, ट्रिब्यूनल में अपील करने और उसके बाद भी प्रशासक मतलब उपराज्यपाल के समक्ष एक और अपील करने दायर करने के मौलिक अधिकार से मॉनिटरिंग कमेटी ने वंचित किया है.
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