'डोसा किंग' और सर्वना भवन के फाउंडर पी राजगोपाल को इस गलती ने किया बर्बादी! जानें पूरा मामला

तमिलनाडु के एक छोटे गांव के प्याज व्यापारी में जन्में पी राजगोपाल उर्फ 'डोसा किंग' की कहानी काफी फिल्मी है.

News18Hindi
Updated: July 18, 2019, 1:21 PM IST
'डोसा किंग' और सर्वना भवन के फाउंडर पी राजगोपाल को इस गलती ने किया बर्बादी! जानें पूरा मामला
ऐसे अर्श से फर्श पर पहुंच गए 'डोसा किंग' पी राजगोपाल!
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Updated: July 18, 2019, 1:21 PM IST
तमिलनाडु के एक छोटे गांव के प्याज व्यापारी में जन्में पी राजगोपाल उर्फ 'डोसा किंग' की कहानी काफी फिल्मी है. 1947 में जन्में पी राजगोपाल तब सुर्खियों में आए जब उनका साउथ इंडियन रेस्तरां सर्वना भवन की विदेश में धूम मची. उन्होंने जुलाई 2019 में अंतर्राष्ट्रीय सुर्खियां बटोरीं जब सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें एक मर्डर केस में उम्र कैद की सजा बरकरार रखी. लेकिन आज सर्वना भवन रेस्‍तरां के संस्थापक पी. राजगोपाल का निधन हो गया. सुप्रीम कोर्ट के आदेश में हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काटने के लिए बीते मंगलवार को ही सत्र अदालत में राजगोपाल ने समर्पण किया था. जेल में दिल का दौरा पड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उन्‍होंने अंतिम सांस ली.

ऐसे बने डोसा किंग
1981 में उन्होंने चेन्नै में एक किराने की दुकान खोली. उन्होंने उस समय अपना पहला रेस्त्रां खोला जबकि अधिकतर भारतीयों के लिए बाहर खाना आम बात नहीं होती थी. इस रेस्त्रां की कामयाबी की नुस्खा था कि उन्होंने दक्षिण भारत के डोसा पैनकेक, तला हुआ बड़ा, इडली राइस केक जैसे लजीज व्यंजन परोसे, जिनका स्वाद एकदम घर में बने हुए खाने जैसा था और यह बहुत महंगा भी नहीं था. दक्षिण भारतीय रेस्त्रां का यह कॉन्सेप्ट भारत में ही सीमित नहीं रहा बल्कि आज दुनियाभर में ऐसें 80 आउटलेट्स हैं. भारतीय खाने के शौकीन अमेरिका, खाड़ी देशों, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया जैसी जगहों पर सर्वना भवन जाकर आनंद ले सकते हैं. ये भी पढ़ें: अलर्ट, IOC ने कहा- ये गलती पड़ेगी भारी होगा लाखों का नुकसान



डोसा किंग की बर्बादी की कहानी
ऐसा कहा जाता है कि राजगोपाल ने एक ज्योतिष की सलाह ली और अपने कर्मचारी की बेटी से शादी करने का फैसला किया. राजगोपाल की नजर कर्मचारी की बेटी पर कई दिनों से थी. राजगोपाल कर्मचारी की बेटी के लिए जुनूनी था. वह युवती पहले से शादीशुदा थी और उसने पहले ही राजगोपाल का प्रस्ताव ठुकरा दिया था. लेकिन राजगोपाल को ना सुनने की आदत नहीं थी. राजगोपाल महिला, उसके पति और परिवार पर कई महीनों तक धमकी, मारपीट और जादू-टोने से नियंत्रण करने में असफल रहा. 2001 में एक बार नाकाम कोशिश के बाद राजगोपाल के आदेश पर महिला के पति की हत्या कर दी गई.

2004 में राजगोपाल को दोषी पाया गया और उसे 10 साल की सजा सुनाई गई. सुप्रीम कोर्ट में अपील करने पर उसे हत्या का दोषी पाया गया और शीर्ष कोर्ट ने सजा को उम्रकैद में बदल दिया. राजगोपाल के पतन की वजह महिलाओं के लिए उसकी कमजोरी और उसका यह मानना कि वह इतना ताकतवर है कि किसी की हत्या कर किसी को भी पा सकता है.
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First published: July 18, 2019, 1:05 PM IST
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