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पाकिस्तान से आए इस आतंक ने सरकार की उड़ाई नींद! जानें क्या है मामला

पाकिस्तान से आए इस आतंक ने सरकार की उड़ाई नींद! जानें क्या है मामला

पाकिस्तान रच रहा नई साजिश

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गुजरात और राजस्थान के अधिकतर इलाकों में टिड्डों (Locust Attack) के आक्रमण ने किसानों और ग्रामीणों को परेशान कर दिया है. राज्य सरकारों ने इससे निपटने के लिए जरूरी कदम उठाने का निर्देश दिया है.

    नई दिल्ली. गुजरात और राजस्थान की फसलों पर टिड्डे (Locust Attack) के आक्रमण ने किसानों की नींद उड़ा दी है. करीब 10 दिनों से इन दोनों राज्यों के किसान (Farmers) टिड्डों से परेशान हैं. कुछ दिन पहले ही राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इसका संज्ञान लिया और पश्चिमी जिलों में इस परेशानी से निपटने के लिए जरूरी कदम उठाने का निर्देश दिया है.

    इस साल मई के बाद करीब 10 बार इस तरह से टिड्डों का आक्रमण देखने को मिला है. हालांकि, मौजूदा समय में गुजरात के किसानों को इससे सबसे अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

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    गुजरात कि किन हिस्सों में टिड्डों के आक्रमण का असर देखने को मिल रहा?
    मौजूदा समय में, बनासकांठा के वाव, थारड़ और सुइगाम तालुका में ​इन टिड्डों का सबसे अधिक प्रभाव देखने को मिल रहा है. अक्टूबर माह के शुरुआत से ही इन इलाकों में टिड्डों ने किसानों को परेशान करना शुरू कर दिया था. टिड्डों को सबसे पहले कच्छ जिले में देखा गया था, जिसके बाद अब इनकी मौजूदगी पाटन और बनासकांठा में देखा जा रहा है. सबसे प्रभावित गांवों की बात करें तो इसमें वाव तालुका का दैयप, अंतरोल, भारदसार, कसावी, ताखुवा और राडका ​गांव में देखने को मिल रहा है. इन टिड्डों का प्रकोप करीब 15 से 20 किलोमीटर के दायरे में देखने को मिल रहा है.



     

    गुजरात सरकार ने इससे निपटने के लिए क्या कदम उठाया ?
    सरकार ने 27 टीम बनाई है जो इन ​क्षेत्रों में कीटनाशकों को छीड़काव कर रही है, खासतौर से बनासकांठा और उत्तरी गुजरात के क्षेत्रों में यह छीड़काव किया जा रहा है. सरकार ने उन किसानों का सर्वे करने को भी निर्देश दिया है,​ जिनकी फसलों पर इन टिड्डों का असर पड़ा है.

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    इसके लिए करीब 20 ट्रैक्टर का इस्तेमाल किया जा रहा है. बुधवार तक बनासकांठा के 99 जिलों के 1,815 हेक्टेयर जमीन पर कीटनाशकों को ​छीड़काव किया जा चुका है. बनासकांठा के लोकल कृषि विभाग ने एक सर्कुलर जारी कर किसानों व ग्रामीणों को कहा है कि वो लकड़ी की मदद से मेटल प्लेट्स को अपने खेतों और इलकों में बजाएं. अधिकारियों का कहना है कि इससे ये टिड्डे एक ही जगह पर अधिक देर तक नहीं बैठ सकेंगे.

    अक्टूबर माह में कच्छ के क्षेत्र में जब ऐसा हुआ था, तब अधिकारियों ने कहा था कि किसान अपने खेतों के आसपास कुछ गड्ढें खोद दें ताकि उनकी फसल बच सके. उस दौरान लखपत तालुका के चार गांवों में इन टिड्डों का प्रकोप देखा गया था. इस दौरान कुल प्रभावित में से 96 फीसदी इलाकों में मेलाथियान कीटनाशक का छीड़काव किया गया था.

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    टिड्डों के इस हमले से अब तक कितना नुकसान हुआ?
    केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले फरीदाबाद के एक संस्थान के मुताबिक, इस तरह के टिड्डे का एक झुंड एक दिन में इतनी फसल खा जाता है, जितना 10 हाथी या 25 उंट या 2,500 लोगों खा सकते हैं. ये टिड्डे पत्ते, फूल, फल, बीज और पौधे की शाखा आदि पर हमला करते हैं.



     

    डायरेक्टरेट के मुताबिक साल 1926 से 31 के प्लेग साइकिल के दौरान करीब 10 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था. साल 1940 और 1960 के बीच 2 करोड़ रुपये रहा था. साल 1959 और 1962 के बीच 50 लाख रुपये का नुकसान हुआ था. बनासकांठा के ​किसानों को सबसे अधिक खतरा सरसों, जीरा और गेहूं की फसलों के नुकसान का डर है.

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    कब होता है टि​ड्डों के हमलों का सबसे अधिक खतरा?
    हालांकि, इसके लिए लोकस्ट वॉर्निंग संस्था समय-समय पर इसके लिए सर्वे करती रहती है. लेकिन, मई से नवंबर माह के बीच सबसे अधिक इनका खतरा होता है. माना जाता है कि यही समय इनके प्रजनन के लिए सबसे अनूकुल होता है. इसी दौरान राजस्थान और गुजरात में मॉनसून का सीजन होता है. गुजरात में अधिकतर टिड्डों का झुंड राजस्थान और पाकिस्तान के रास्ते हवा के बहाव के साथ लंबी दूरी तय कर आते हैं.

    गुजरात सरकार ने कहा है कि बीते 10 दिनों से पैदा हुआ यह खतरा भी कुछ और दिनों के लिए रहेगा. जैसे ही हवा की दिशा बदलेगी, वैसे ही इससे राहत मिलेगी. सरकार ने इन टिड्डों से प्रभावित इलाकों का सर्वे करने का भी निर्देश दिया है.

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    Tags: Agriculture ministry, Business news in hindi, India agriculture, Ministry of Agriculture

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