माइक्रोफाइनेंस सेक्टर में भी आई रिकवरी, दिसंबर तिमाही में 1.18 प्रतिशत की ग्रोथ

पिछली तिमाही के मुकाबले डिस्‍बर्समेंट में 80 फीसदी की तेजी आई है. यह 56090 करोड़ रुपए रहा.

सीआरआइएफ माइक्रोलेंड की तिमाही रिपोर्ट के मुताबिक दिसंबर 2020 की तिमाही में ग्रॉस लोन पोर्टफोलियो (जीएलपी, GLP) में 1.18 फीसदी की वृद्धि हासिल हुई है.

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    नई दिल्ली. पिछली दो तिमाहियों के दौरान आई गिरावट के बाद आखिरकार माइक्रोफाइनेंस (Microfinance) के क्षेत्र में तेजी आई है. दिसंबर 2020 की तिमाही में ग्रॉस लोन पोर्टफोलियो (जीएलपी, GLP) में 1.18 फीसदी की वृद्धि के साथ यह 226.6 हजार करोड़ रुपए के स्तर पर पहुंच गया. सीआरआइएफ माइक्रोलेंड (CRIF MicroLend) की तिमाही रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है.
    रिपोर्ट के मुताबिक बीती दो तिमाहियों की तुलना में दिसंबर 2020 तिमाही में ग्राहकों की संख्या में भी रिकवरी देखने को मिली है. हालांकि दिसंबर 2019 के मुकाबले यह सात फीसदी कमजोर रहा. रिपोर्ट में बड़ा इशारा मोराटोरियम पीरियड खत्म होने के बाद की स्थिति की ओर किया गया है. इसके मुताबिक वित्त वर्ष 2020-21 की तीसरी तिमाही के दौरान लोन के रीपेमेंट यानी कर्ज पुनर्भुगतान की स्थिति दबाव में दिखी है.
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    कंपनियाें ने दिखाई लोन डिस्‍बर्समेंट में तेजी
    पिछली तिमाही के मुकाबले डिस्‍बर्समेंट में 80 फीसदी की तेजी आई है. यह 56090 करोड़ रुपए रहा. हालांकि यह वित्‍त वर्ष 2019-20 की तीसरी तिमाही के मुकाबले 11.5 फीसदी कम है. वॉल्यूम के आधार पर देखा जाए तो पिछली तिमाही के 175 लाख रुपए के मुकाबले वित्त वर्ष 2020-21 की तीसरी तिमाही में डिस्‍बर्समेंट दोगुना रहा. यह कोरोना महामरी से पूर्व वित्त वर्ष 2019-20 की तीसरी तिमाही के मुकाबले मात्र चार फीसदी कम है. वहीं, वित्त वर्ष 2020-21 की तीसरी तिमाही में डिस्‍बर्समेंट का 20.1 फीसदी हिस्सा छोटे कर्ज (दस हजार रुपए से कम) का रहा. इसकी वजह कर्ज पुनर्गठन और गारंटीड आपातकालीन ऋण के हिस्‍से के रूप में दिए गए नया लोन रहे.
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    भुगतान में चूक 8.3 फीसदी पर आया
    मोराटोरियम पीरियड खत्म होने के बाद भी चार महीने तक रीपेमेंट यानी लोन की किस्तों के भुगतान में दबाव नजर आया. दिसंबर 2020 में कर्ज के शुरुआती भुगतान में चूक (पीएआर 1-30 फीसदी) 8.3 फीसदी रहा. जबकि पीएआर 31-180% में 12.7 फीसदी का इजाफा हुआ. करंट/गुड पोर्टफोलियो के मामले में संग्रह में सुधार देखा गया. इसकी वजह से सितंबर 2020 से दिसंबर 2020 के दौरान मासिक फॉरवर्ड फ्लो में करीब 10 फीसदी की गिरावट रही.

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