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टूरिज्म सेक्टर को रास नहीं आया सरकार का राहत पैकेज, सिर्फ 20 फीसदी को ही मिल पाएगा मामूली फायदा

वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण और वित्‍त राज्‍यमंत्री अनुराग ठाकुर.

वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण और वित्‍त राज्‍यमंत्री अनुराग ठाकुर.

कोरोना की वजह से टूरिज्म (Tourism) सेक्टर को हुए नुकसान की भरपाई के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आर्थिक राहत पैकेज का ऐलान किया है.

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    नई दिल्ली. कोरोना महामारी का सबसे ज्यादा असर टूरिज्म एंड ट्रेवल सेक्टर पड़ा है. कई होटल, ट्रेवल एजेंसियां बंद हो गई हैं और इनमें काम करने वाले कर्मचारी बेरोजगार. बीते एक साल से यह सेक्टर सरकार से मदद की उम्मीद लगाए लेकिन सोमवार को जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) ने आर्थिक राहत पैकेज (covid stimulus measures) का ऐलान किया तो इसमें ट्रेवल एंड टूरिज्म सेक्टर (Travel & Tourism sector) को मामूली राहत मिल पाई.
    आर्थिक राहत पैकेज में 10700 टूरिस्ट गाइड को सरकारी गारंटी पर एक लाख रुपए और टूरिस्ट एजेंसी को 10 लाख रुपए तक का कर्ज मिलेगा. ट्रेवल एजेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष प्रदीप लुल्ला कहते हैं कि सरकार ने सिर्फ टूरिज्म मिनिस्ट्री में 904 रजिस्टर्ड ट्रेवल एजेंट्स को शामिल किया है. जबकि, यूएफटीएए (Universal Federation of Travel Agent Association) में ही 3 हजार से ज्यादा टूर एंड ट्रेवल्स एजेंसियां है. उन्होंने कहा कि वे सरकार से पैकेज में सभी टूर एंड ट्रेवल एजेंट्स को शामिल करने के लिए ज्ञापन देंगे. ट्रैवल एजेंट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (टीएएआई​) के उपाध्यक्ष जय भाटिया भी यही बात दोहराते हैं. वे कहते हैं कि सरकार ने न तो स्टेट टूरिज्म से जुड़े एजेंट्स को शामिल किया और न ही उनकी एसोसिएशन के. सरकार को ट्रेवल एजेंट्स का अांकड़ा ही चाहिए था तो वह जीएसटी रजिस्ट्रेशन से भी मिल सकता है. टूरिज्म मिनिस्ट्री ने रजिस्ट्रेशन कुछ ही वक्त पहले शुरू किया है. इसलिए, रजिस्ट्रेशन की संख्या कम है. इसी वजह से महज 20 फीसदी को ही सरकार की इस स्कीम को फायदा मिल पाएगा.
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    टूर और ट्रैवल ऑपरेटर को सालाना करीब 20 हजार करोड़ रुपए की आय
    टूर और ट्रैवल ऑपरेटर भारत और विदेशों में हवाई/बस टिकटिंग, अवकाश और कॉर्पोरेट यात्रा दोनों के लिए होटल/पैकेज जैसी सेवाएं प्रदान करते हैं. क्रिसिल की एक रिपोर्ट के मुताबिक इनका रेवेन्यू करीब 11 हजार करोड़ रुपए का है. जबकि, टीएएआई​ के जय भाटिया के मुताबिक छोटे-बड़े सभी एजेंट्स को शामिल किया जाए तो यह करीब 20 हजार करोड़ रुपए बैठता है. क्रिसिल के मुताबिक सिर्फ तीन कंपनियों ने पिछले वित्त वर्ष में राजस्व में 2,300 करोड़ रुपए की गिरावट हुई. यह कुल रेवेन्यू का महज 20% था. देशव्यापी लॉकडाउन और अन्य प्रतिबंधों के कारण यात्राओं की संख्या बेहद कम रह गई है.
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    सरकार और देश की जीडीपी के लिए टूरिज्म को बढ़ावा देना जरूरी

    वित्त मंत्री सीतारमण ने पैकेज का ऐलान करते हुए बताया कि साल 2019 में देश में करीब एक करोड़ विदेशी टूरिस्ट घूमने (Tourism) आए और उन्होंने 30 अरब डॉलर से अधिक की रकम खर्च की. भारत आने वाले विदेशी पर्यटक आमतौर पर 21 दिनों के लिए आते हैं और वे रोजाना औसतन 34 डॉलर (करीब 2500 रुपए) की रकम खर्च करते हैं. इनमें रहना, खाना पीना और घूमना फिरना आदि शामिल है. विशेषज्ञ मानते हैं कि टूरिज्म सेक्टर को उचित राहत दी जाए तो रोजगार के मौके बढ़ने के साथ ही सरकार के रेवेन्यू में भी इजाफा होगा.

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