सैलरी के मामले में मालिक से भी आगे हैं इन कंपनियों के CEO, जानिए किसकी है सबसे ज्यादा कमाई

सैलरी के मामले में मालिक से भी आगे हैं इन कंपनियों के CEO, जानिए किसकी है सबसे ज्यादा कमाई
कई ऐसे एग्जीक्युटिव्स हैं, जिन्हें प्रोमोटर्स से ज्यादा सैलरी मिलती है.

Promoters V/S Executives Salary: कई ऑटोमोटिव कंपनियों के सालाना रिपोर्ट से पता चलता है कि उनकी एग्जीक्युटिव्स को प्रोमोटर्स की तुलना में ज्यादा सैलरी मिलता है. आमतौर पर माना जाता है कि प्रोमोटर्स को ही सबसे ज्यादा सैलरी मिलती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 14, 2020, 5:43 PM IST
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नई दिल्ली. आमतौर पर किसी भी कंपनी के प्रोमोटर्स को लेकर माना जाता है कि उन्हें सबसे ज्यादा सैलरी मिलती है. लेकिन, कुछ कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) भी सैलरी के मामले में पीछे नहीं हैं. यहां तक की कुछ कंपनियों के सीईओ को प्रोमोटर या चेयरमैन की तुलना में कहीं ज्यादा सैलरी मिलती है. आइए जानते हैं कि भारत की किन कंपनी सीईओ को उनके प्रोमोटर से ज्यादा सैलरी मिलती है.

गुएंटनर बश्चेक और एन चंद्रशेखरन
टाटा मोटर्स के प्रबंध निदेशक और CEO गुएंटनर बश्चेक (Guenter Butschek) भारत के ऑटोमो​टीव इंडस्ट्री (Automotive Industry) में दूसरी सबसे ज्यादा सैलरी पाने वाले नॉन-प्रोमोटर हैं. 19.27 करोड़ रुपये के साथ उनकी सैलरी एन चंद्रशेखरन से भी ज्यादा है. एन चंद्रशेखर (N Chandrashekharan) कंपनी के बोर्ड में नॉन-एग्जीक्युटिव निदेशक हैं और उन्हें 4.8 लाख रुपये की फीस एक बोर्ड मीटिंग या कमिटी मीटिंग के लिए मिलती है. टाटा संस के चेयरमैन के तौर पर वो टाटा ग्रुप की कई कंपनियों की बोर्ड मीटिंग में शामिल होते हैं.

पवन गोयनका और आनंद महिंद्रा
इसी प्रकार महिंद्रा एंड महिंद्रा (Mahindra & Mahindra) के प्रबंध निदेशक पवन गोयनका (Pawan Goenka) को वित्त वर्ष 2020 में 10 करोड़ रुपये सैलरी के तौर पर मिला. यह महिंद्रा एंड महिंद्रा के चेयरमैन आनंद महिंद्रा (Anand Mahindra) की तुलना में ज्यादा है. आनंद महिंद्रा को पिछले वित्त वर्ष 2020 में 8.71 करोड़ रुपये की सैलरी मिली. इस कंपनी की स्कॉर्पियो 65 वर्षीय गोयनका की ही देन मानी जाती है. स्कॉर्पियो एमएंडएम की सबसे ज्यादा पॉपुलर एसयूवी है.



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विनोद दसारी और सिद्धार्थ लाल
इंडियन ऑटोमोटिव कंपनियों में सबसे ज्यादा सैलरी पाने वाले नॉन-प्रोमोटर विनोद दसारी (Vinod Dasari) हैं. दसारी को पिछले वित्त वर्ष में 24.6 करोड़ रुपये की सैलरी मिली थी. पिछले वित्त साल ही अशोका लेलैंड (Ashoka Leyland) के पूर्व प्रबंध निदेशक को रॉयल एनफील्ड (Royal Enfield) का सीईओ बनाया गया था. इस तुलना में कंपनी के प्रोमोटर और प्रबंध निदेशक सिद्धार्थ लाल (Siddharth Lal) को 19.41 करोड़ रुपये की ही सैलरी मिली.

विपिन सोंधी और धीरज हिंदुजा
जेसीबी इंडिया (JCB India) के पूर्व प्रबंध​ निदेशक विपिन सोंधी (Vipin Sondhi) को दिसंबर 2019 में अशोका लेलैंड का एमडी व सीईओ बनाया गया था. दिसंबर से मार्च तक 100 दिनों के लिए उन्हें 2.2 करोड़ रुपये की सैलरी मिली. यह कंपनी के चेयरमैन धीरज हिंदुजा (Dheeraj Hinduja) की तुलना में ज्यादा है. हिंदुजा को पिछले वित्त वर्ष में पूरे साल के लिए 1.16 करोड़ रुपये की सैलरी मिली. सोंधी को​ वित्त वर्ष 20 में 70.1 लाख स्टॉक ऑप्शन भी दिया गया.

पिछले वित्त वर्ष में कुछ ऐसे भी प्रोमोटर्स रहे जो कंपनी में एग्जीक्युटिव्स रहे हैं, वो भी सबसे ज्यादा पेमेंट पाने वालों में से हैं. बजाज ऑटो के प्रबंध निदेशक राजीव बजाज (Rajiv Bajaj) की सैलरी 23 फीसदी बढ़कर 40 करोड़ रुपये रही. हीरो मोटोकॉर्प (Hero Motocorp) के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक पवन मुंजाल (Pawan Munjal) को 85 करोड़ रुपये मिले, जो इसके पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 5 फीसदी ज्यादा है.

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केनिचि अयुकवापा
मारुति सुजुकी (Maruti Suzuki) के प्रबंध निदेशक केनिचि अयुकावा (Kenichi Akuwaya) को वित्त वर्ष 20 में 4.66 करोड़ रुपये की सैलरी मिली. ऑटो इंडस्ट्रीज के ही अन्य एग्जीक्युटिव की तुलना में कम है. ध्यान देने योग्य है कि अन्य कंपनियों की तुलना में मारु​ति सुजुकी का ऑपरेशंस बहुत बड़ा है. वित्त वर्ष 20 में मारुति सुजुकी का कुल रेवेन्यू 7,900 करोड़ रुपये रहा था, जबकि कंपनी का शुद्ध मुनाफा 5,650 करोड़ रुपये रहा था. इसी साल आयशर मोटर्स (Eicher Motors) को रेवेन्यू 9,153 करोड़ और शुद्ध मुनाफा 1,827 करोड़ रुपये रहा था. (इस खबर का अनुवाद मनीकंट्रोल से किया गया है. इंग्लिश में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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