इन कारणों से विशाल सिक्‍का को देना पड़ा इस्‍तीफा!

इन कारणों से विशाल सिक्‍का को देना पड़ा इस्‍तीफा!
इन्‍फोसिस के सीईओ विशाल सिक्‍का का इस्‍तीफा किसी आकस्मिक घटना का नतीजा नहीं है, बल्कि इसकी पृष्‍ठभूमि लंबे समय से बनती आ रही थी.

इन्‍फोसिस के सीईओ विशाल सिक्‍का का इस्‍तीफा किसी आकस्मिक घटना का नतीजा नहीं है, बल्कि इसकी पृष्‍ठभूमि लंबे समय से बनती आ रही थी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 18, 2017, 10:56 AM IST
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इन्‍फोसिस के सीईओ विशाल सिक्का का इस्‍तीफा किसी आकस्मिक घटना का नतीजा नहीं है, बल्कि इसकी पृष्‍ठभूमि लंबे समय से बनती आ रही थी. भारत की दूसरी सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर सेवा निर्यातक कंपनी इन्‍फोसिस में आंतरिक कलह लगातार चल रही थी. सिक्का के कामकाज को लेकर कई कर्मचारियों ने भी बगावती तेवर अपनाए थे.

इस लड़ाई में सबसे बड़ी भूमिका इनफोसिस के संस्थापक सदस्य रहे एन नारायणमूर्ति की रही. वैसे तो नारायणमूर्ति का कहना है कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से विशाल सिक्का से कोई परेशानी नहीं है, लेकिन कारपोरेट गवर्नेंस को लेकर उन्‍होंने कई सवाल उठाए थे.

हम यहां सिक्‍का को लेकर उठे सवालों को गिना रहे हैं:
गवर्नेंस में गड़बड़ी



इनफोसिस के सीईओ विशाल शिक्का के कामकाज को लेकर कंपनी के संस्थापकों ने शिकायत दर्ज कराई थी. इन्‍फोसिस के संस्थापक एन नारायणमूर्ति, क्रिस गोपालकृष्णन और नंदन निलेकणी ने निदेशक मंडल से की गई शिकायत में कहा था कि कंपनी के भीतर कॉरपोरेट गवर्नेंस के मानकों का पालन नहीं हो रहा है. नारायणमूर्ति का कहना है कि मनमाने ढंग से अधिकारियों को सुविधाएं दी जा रही हैं. इससे अन्य कर्मचारियों का मनोबल पर बुरा असर पड़ा.



सेवरेंस पे पर तकरार
इनफोसिस में नियम है कि कंपनी के कर्मचारी को तीन महीने का सेवरेंस पे दिया जाए. सेवरेंस पे वह रकम है जो कंपनी किसी कर्मचारी को निर्धारित समय से पहले कॉन्ट्रैक्ट खत्म करने पर देती है. इस नियम को दरकिनार कर कंपनी के पूर्व लीगल हेड केनेडी को 12 महीने और पूर्व सीएफओ राजीव बंसल को 30 महीने का सेवरेंस पे दिया गया था. साथ ही कुछ कर्मचारियों को मोटी रकम सेवरेंस पे के तौर पर देने से भी नाखुशी की बात सामने आई थी.

सैलरी और अन्य सुविधाएं
इनफोसिस के संस्थापक प्रमोटरों ने सीईओ विशाल सिक्का की सैलरी और अन्य सुविधाओं पर भी सवाल उठाए थे. इन लोगों ने कंपनी के भीतर कुछ बेदाग छवि वाले लोगों को रखने की सिफारिश की थी.

विशाल सिक्का ने कंपनी का टर्नओवर 2021 तक 20 अरब डॉलर कर देने का लक्ष्य दिया था. इस आधार पर उन्हें एक करोड़ दस लाख डॉलर के सालाना पैकेज पर रखा गया था. इसमें से 30 लाख डॉलर तो फिक्स्ड सैलरी थी, लेकिन बाकी आठ लाख उनके परफॉरमेंस के आधार पर दिया जाना था.

पूर्व मुख्य वित्त अधिकारी (सीएफओ) राजीव बंसल को भी कंपनी से हटाए जाने के एवज में दिए गए पैसे पर भी आपत्ति दर्ज कराई गई थी. राजीव बंसल को नौकरी छोड़ते समय 17 करोड़ रुपए का पैकेज दिया गया था. कंपनी ने अपने बयान में कहा कि राजीव को दी जाने वाली कुछ राशि रोक ली गई थी और स्पष्टीकरण मांगा गया था.

हालांकि इन्‍फोसिस का कहना था है कि शेयरधारकों ने ही विशाल सिक्का की सैलरी में इजाफे को मंजूरी दी थी. साथ ही कंपनी ने कॉरपोरेट गर्वनेंस एक्सपर्ट को भी नियुक्त कर रखा है. ये सारे फैसले कंपनी के सारे हित में लिए गए. इससे कंपनी को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी.

हालांकि, विशाल सिक्का को लेकर मची हालिया बगावत ने इनफोसिस की इन दलील पर कई सवाल उठाए थे. लगभग 1800 से ज्यादा ई-मेल इनफोसिस के निदेशक मंडल को मिले हैं, जिनमें कर्मचारियों ने अपनी नाखुशी जाहिर की थी.

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