कोरोना संकट के बीच कर्ज के बोझ में दबे ये राज्य, जानिए अपने स्टेट का हाल

कोरोना संकट के बीच कर्ज के बोझ में दबे ये राज्य, जानिए अपने स्टेट का हाल
कोरोना संकट के बीच देश के कई राज्‍यों का कर्ज दोगुना तो कई का 3 से 5 गुना तक पहुंच चुका है.

केयर रेटिंग्‍स (Care Ratings) की रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्‍ट्र, कर्नाटक, सिक्किम, तमिलनाडु और नगालैंड इस साल सबसे ज्‍यादा कर्ज मांगने (Borrowed Massively) वाले राज्‍यों में हैं. कोरोना संकट (Coronavirus Crisis) के बीच कई राज्‍यों पर पिछले साल के मुकाबले दोगुना कर्ज (Double Debt) हो चुका है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 12, 2020, 5:38 PM IST
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नई दिल्‍ली. कोरोना संकट (Coronavirus in India) के बीच कई राज्‍यों की आर्थिक हालत चरमरा (Economic Crisis) गई है. यहां तक कि उनके सामने खर्च के लिए पैसे की तंगी की चुनौती खड़ी हो गई है. ऐसे में उन्‍हें भारी-भरकम कर्ज (Debt) लेना पड़ा है. देश के पांच राज्‍य ऐसे हैं, जिनका मौजूदा साल में कर्ज दागुना (Double Debt) हो चुका है. इस साल सबसे ज्‍यादा कर्ज लेने वाले राज्‍यों में महाराष्‍ट्र (Maharashtra), तमिलनाडु (Tamil Nadu), कर्नाटक (Karnatak), नगालैंड (Nagalnd) और सिक्किम (Sikkim) हैं.

7 अप्रैल से 11 अगस्‍त के बीच महाराष्‍ट्र का कर्ज 3 गुना
वैश्विक महामारी की सबसे ज्‍यादा मार झेल रहे महाराष्‍ट्र ने 7 अप्रैल से 11 अगस्‍त के बीच पिछले साल के मुकाबले तीन गुना (3 Times) कर्ज लिया है. वहीं, कर्नाटक ने कोविड-19 से निपटने और अन्‍य खर्च सुचारू रखने के लिए इस दौरान पिछले साल के मुकाबले पांच गुना (5 Times) ज्‍यादा कर्ज लिया है. केयर रेटिंग्‍स (Care Ratings) की रिपोर्ट के मुताबिक, कोविड-19 की रोकथाम के लिए मार्च 2020 के आखिरी में लगाए गए लॉकडाउन के बाद राज्‍यों के राजस्‍व में लगातार भारी गिरावट देखने को मिली. इसके बाद सरकारों ने राज्‍य विकास कर्ज (SDLs) की जरूरतों को पूरा करने के लिए बाजारों का तेजी से दोहन किया है.

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13 राज्‍यों पर कर्ज के बोझ में हुई 50 फीसदी की वृद्धि


देश के 26 में से 13 प्रदेशों ने मौजूदा वित्‍त वर्ष के दौरान राज्‍य विकास कर्ज जारी किया है. केयर रेटिंग्‍स के मुताबिक, इन राज्‍यों पर कर्ज को बोझ पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 50 फीसदी बढ़ा है. वैश्विक महामारी को देखते हुए केंद्रीय वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण (FM Nirmal Sitharaman) ने मौजूदा वित्‍त वर्ष के लिए राज्‍यों की कर्ज सीमा बढ़ाकर सकल घरेलू उत्‍पाद (GDP) की 5 फीसदी कर दी है. इससे पहले ये सीमा जीडीपी की 3 फीसदी थी. उन्‍होंने विशेष सुधारों के लिए राज्‍यों को 4.28 करोड़ रुपये के कर्ज की अनुमति दे दी है. केंद्र सरकार ने तमाम आर्थिक दबावों के बीच अप्रैल और मई में राज्यों को 12,390 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा अनुदान दिया था.

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रिजर्व बैंक की ओर से भी राज्‍यों को दी गई बड़ी राहत
केंद्र सरकार ने अप्रैल के पहले सप्‍ताह में राज्‍य आपदा राहत कोष (SDRF) के लिए 11,092 करोड़ रुपये की अग्रिम राशि जारी की थी. इसके अलावा कोविड-19 के खिलाफ सीधी लड़ाई के लिए स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय (Health Ministry) को 4,113 करोड़ रुपये जारी किए गए थे. इस बीच, राज्‍यों को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की ओर से भी राहत मिली. केंद्रीय बैंक ने राज्‍यों के कर्ज की सीमा में 60 फीसदी वृद्धि कर दी. साथ ही राज्‍यों की ओवरड्राफ्ट की अवधि भी 14 दिन से बढ़ाकर 21 दिन कर दी गई. इसी के साथ एक तिमाही (Quarter) में राज्‍य के ओवरड्राफ्ट की अवधि भी 32 दिन से बढ़ाकर 50 दिन कर दी गई.
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