कपड़े की दुकान से इस भारतीय कारोबारी ने बना ली 13 हजार करोड़ रुपये की कंपनी

कंपनी का नाम तोलाराम ग्रुप है और मोहन वासवानी इसके मालिक हैं.

News18Hindi
Updated: October 14, 2018, 7:46 AM IST
कपड़े की दुकान से इस भारतीय कारोबारी ने बना ली 13 हजार करोड़ रुपये की कंपनी
तोलाराम ग्रुप का मुख्‍यालय सिंगापुर में है और यह 18 तरह का कारोबार करती है.
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Updated: October 14, 2018, 7:46 AM IST
भारत के बंटवारे के वक्‍त इंडोनेशिया चले एक शख्‍स का कारोबार आज दुनिया के 75 देशों में है और कंपनी की मार्केट वैल्‍यू 13320 करोड़ रुपये है. कारोबार की शुरुआत 1948 में कपड़े की एक छोटी सी दुकान हुई थी. इस कंपनी का नाम तोलाराम ग्रुप है और मोहन वासवानी इसके मालिक हैं.

ब्‍लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी का नाम मोहन वासवानी के दादा तोलाराम के नाम पर रखा गया है. वासवानी के पिता ने एक बार उनसे कहा था कि एक दिन दुनियाभर के देशों में उनका काम होगा. तोलाराम ग्रुप का मुख्‍यालय सिंगापुर में है और यह 18 तरह का कारोबार करती है. इनमें इंडोनेशिया में बैंक, नाइजीरिया में बंदरगाह का निर्माण, एस्‍तोनिया में कागज बनाना और भारत में बिजली सप्‍लाई करना शामिल है.

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84 साल के वासवानी ने बताया कि कंपनी अफ्रीका में खाद्य निर्माण और वितरण का काम करती है और 75 से ज्‍यादा देशों में इसकी बिक्री होती है. अब डिजीटल दुनिया में भी कदम रखा जा रहा है. हाल ही में कंपनी ने तुनैकु के नाम से ऑनलाइन लोन का बिजनेस भी शुरू किया है. मोहन वासवान ने ब्‍लूमबर्ग को बताया कि वह जोखिम उठाने से डरते नहीं हैं. जहां भी उन्‍हें मौका दिखता है वे जोखिम लेने को तैयार हैं.

तोलाराम ग्रुप के सीईओ साजन असवानी ने बताया कि कंपनी ने करीब 100 तरह के बिजनेस में कदम रखा. इनमें से 75 फीसदी नाकाम रहे. लेकिन बाकी जो कामयाब रहे उन्‍होंने कंपनी को कामयाब कर दिया.


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मूल रूप से सिंधी वासवानी के पिता 1947 में भारत के बंटवारे के बाद इंडोनेशिया आए थे. यहां जावा द्वीप पर मलंग में उन्‍होंने दुकान खोली. बता दें कि 18वीं की शुरुआत से सिंधी लोग व्‍यापार के लिए इंडोनेशिया जाने लग गए थे. इसके बाद यह जगह उनका पसंदीदा कारोबारी ठिकाना बन गया.
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10 साल की उम्र में वासवानी ने कपड़े की दुकान पर पिता का हाथ बंटाना शुरू कर दिया. 19 साल की उम्र में पूरा कामकाज उनके जिम्‍मे आ गया. उन्‍होंने काम को आगे बढ़ाया और अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, दक्षिण अफ्रीका जैसे देशो में वितरण से लेकर निर्माण सरीखे क्षेत्रों में कदम रखा.

मोहन वासवानी ने एक दोस्‍ती की सलाह पर अफ्रीका में कारोबार को शुरू किया. तोलाराम ग्रुप ने कामकाज के लिए बाकी के एशियाई कारोबारी संगठनों से अलग मॉडल अपनाया है.


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कंपनी का जिम्‍मा बाहरी पेशेवर लोगों को दिया गया है. वासवानी इस बारे में बताते हैं कि परिवार के लोगों के पास हिस्‍सेदारी है लेकिन काम का जिम्‍मा पेशेवर लोगों के पास है. इसकी वजह बताते हुए वे कहते हैं कि गलती होने पर बाहरी लोगों को हटाया जा सकता है लेकिन घर के आदमी के साथ ऐसा नहीं किया जा सकता.
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