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इस साल चावल उत्पादन में एक करोड़ टन से ज्यादा की गिरावट आ सकती है, भाव पर क्या होगा असर?

पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे प्रमुख चावल उत्पादक राज्यों में औसत से कम बारिश ने चावल के उत्पादन पर चिंता पैदा कर दी है.

पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे प्रमुख चावल उत्पादक राज्यों में औसत से कम बारिश ने चावल के उत्पादन पर चिंता पैदा कर दी है.

पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे प्रमुख चावल उत्पादक राज्यों में औसत से कम बारिश ने चावल के उत्पादन पर चिंता पै ...अधिक पढ़ें

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हाइलाइट्स

इस खरीफ सीजन में अब तक धान का रकबा 38 लाख हेक्टेयर कम है.
खरीफ मौसम भारत के कुल चावल उत्पादन में लगभग 80 प्रतिशत का योगदान देता है.
फसल वर्ष 2021-22 (जुलाई-जून) के दौरान कुल उत्पादन 13.29 करोड़ टन होने का अनुमान है.

नई दिल्ली. सरकार ने शुक्रवार को कहा कि धान की बुवाई क्षेत्र में गिरावट के कारण इस साल के खरीफ सीजन के दौरान भारत के चावल उत्पादन में एक करोड़ से 1.12 करोड़ टन की गिरावट आ सकती है. इस संबंध में खाद्य सचिव सुधांशु पांडे ने कहा कि देश में चावल का अधिशेष उत्पादन होगा.

उन्होंने बताया कि कई राज्यों में कम बारिश के कारण इस खरीफ सीजन में अब तक धान का रकबा 38 लाख हेक्टेयर कम है. खरीफ मौसम भारत के कुल चावल उत्पादन में लगभग 80 प्रतिशत का योगदान देता है. उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘चावल के उत्पादन में एक करोड़ टन का नुकसान होने की आशंका है. वहीं सबसे खराब स्थिति में यह इस साल 1.2 करोड़ टन कम हो सकता है.’

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उत्पादन में गिरावट कम हो सकती है
सचिव ने कहा कि हालांकि, यह एक शुरुआती अनुमान है जो रकबे में गिरावट और औसत उपज पर आधारित है. पांडे ने कहा कि उत्पादन में गिरावट कम हो सकती है क्योंकि जिन राज्यों में अच्छी बारिश हुई है वहां उपज में सुधार हो सकता है.

चावल का कुल उत्पादन 13.29 करोड़ टन होने का अनुमान
फसल वर्ष 2021-22 (जुलाई-जून) के दौरान चावल का कुल उत्पादन 13.29 करोड़ टन रिकॉर्ड होने का अनुमान है. यह पिछले पांच वर्षों के 11.64 करोड़ टन के औसत उत्पादन से 1.38 करोड़ टन अधिक है. सचिव ने इस सवाल का जवाब नहीं दिया कि क्या सरकार मुफ्त खाद्यान्न कार्यक्रम प्रधान मंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना का विस्तार करेगी या नहीं.

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महंगाई की संकट
देश में बढ़ती महंगाई और धान की कम बुवाई को लेकर सरकार पहले से ही एक्शन में है. भारत ने कल ही चावल के विभिन्न ग्रेड के निर्यात पर 20% शुल्क लगा दिया है. चालू खरीफ सत्र में धान फसल का बुवाई रकबा काफी घट गया है. ऐसे में घरेलू आपूर्ति बढ़ाने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है. साथ ही स्थानीय कीमतों को नियंत्रित रखने का भी इसे एक प्रयास माना जा रहा है.

पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे प्रमुख चावल उत्पादक राज्यों में औसत से कम बारिश ने चावल के उत्पादन पर चिंता पैदा कर दी है. इस साल पहले ही गेहूं के निर्यात और प्रतिबंधित चीनी शिपमेंट पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. भारत दुनिया में चावल का सबसे बड़ा निर्यातक है, जबकि उत्‍पादन में वह चीन के बाद दूसरे नंबर पर आता है. भारत कुल वैश्विक निर्यात का 40 फीसदी शिपमेंट अकेले करता है. उसके पास चावल का पर्याप्‍त भंडार भी है.

कीमतों पर असर
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, उत्पादन में कमी का असर कीमतों पर देखने को मिल सकता है और चावल के रेट बढ़ सकते हैं. बढ़ते इंफ्लेशन के बीच चावल का भाव बढ़ना समस्या को और बढ़ा सकता है. लिहाजा सरकार अभी से इसके लिए उपाय कर रही है. निर्यात पर प्रतिबंध और शुल्क लगाना इसी का हिस्सा है.

Tags: Import-Export, Inflation, RBI, Rice

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