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फिर उड़ान भर सकती है जेट एयरवेज, इन तीन कंपनियों ने खरीदने में दिखाई दिलचस्पी

जेट एयरवेज

जेट एयरवेज

18 अप्रैल 2019 को परिचालन बंद कर चुकी जेट एयरवेज (Jet Airways) के लिए बोली लगाने वाले नामों में 3 बड़े नाम भी जुड़ गए हैं. बोली लगाने की अंतिम तारीख 15 जनवरी 2020 है.

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    नई दिल्ली. बंद हो चुकी प्राइवेट सेक्टर (Private Sector Airlines) की विमान कंपनी जेट एयरवेज (Jet Airways) एक बार फिर उड़ान भरने के लिए तैयार हो सकती है. दरअसल, जेट एयरवेज के लिए खरीदारों की लिस्ट में तीन नए नाम शामिल हो गए है, जिसके बाद अब कयास लगाया जा रहा है कि बहुत जल्द एक बार आसमान में उड़ान भर सकती है. जेट एयरवेज के संभावित खरीदारों की लिस्ट में हिंदुजा ग्रुप (Hinduja Group), सिनर्जी ग्रुप और दुबई की फंड शामिल हो गए हैं. हालांकि, दुबई की इस कंपनी का नाम अभी तक नहीं पता चलता है.

    नहीं बढ़ेगी बोली लगाने की अंतिम तारीख
    लाइवमिंट ने अपनी एक रिपोर्ट में इस मामले से जुड़े एक शख्स के हवाले से जानकारी दी है. लेंडर्स (Lenders) ने जेट एयरवेज के लिए बोली की अंतिम तारीख 15 जनवरी अंतिम तारीख निर्धारित किया है. उन्होंने यह भी साफ तौर पर कहा है कि इसकी अंतिम तारीख आगे नहीं बढ़ाई जाएगी. उन्होंने कहा कि अगर इस समय तक जेट एयरवेज के लिए यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती है तो इसके बाद कंपनी की लिक्विडेटिंग प्रक्रिया (Liquidating Processing) को शुरू कर दी जाएगी.

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    हिंदुजा ग्रुप की शर्त
    इस रिपोर्ट में कहा है कि गोपीचंद पी हिंदुजा ने कहा है कि अगर जेट एयरवेज पर कानूनी कार्रवाई और देनदारियां खत्म हो जाती है तो ही हिंदुजा ग्रुप जेट एयरवेज को खरीदेगी​. हिंदुजा ग्रुप ऑटोमोबाइल, वित्तीय सेवा, ऑयल एंड गैस समेत कई अन्य बिजनेस करती है.

    हिंदुजा ग्रुप के अलावा, सिनर्जी ग्रुप ने भी अन्या ​बोली लगाने वाले फर्म्स की लिस्ट में है. इस कंपनी के मालिक 69 वर्षीय बोलीविया के अरबपति जर्मेन एफ्रोमोविच हैं.





    सिनर्जी के लिए FDI नियमों के पेंच
    हालांकि, सिनर्जी ग्रुप को बोली लगाने के लिए किसी अन्य भारतीय कंपनी के साथ अनुबंध करना पड़ेगा, क्योंकि भारत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी FDI कानून के तहत कोई भी विदेशी कंपनी भारत की एयरलाइन में 49 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी नहीं खरीद सकती है. इस कानून में यह भी प्रावधान है कि एयरलाइन के कंट्रोल की जिम्मेदारी भारतीय प्रोमोटर्स (Indian Promoters) के हाथ में होनी चाहिए और कंपनी के बोर्ड मेंबर्स में ​अधिकतर सदस्य भारतीय ही होने चाहिए.

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    जेट एयरवेज पर दिवालिया कार्रवाई
    गौरतलब है कि पिछले साल 18 अप्रैल को फंड की कमी की वजह से जेट एयरवेज का परिचालन बंद कर दिया गया था. मुंबई में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्युनल ने जेट एयरवेज को लेकर दिवालिया कानून (Insolvency and Bankruptcy Code) के तहत कार्रवाई करने को भी मंजूरी दिया था. NCLT के नियमों के मुताबिक, जेट एयरवेल के रिजॉल्युशन प्लान को 270 दिनों के अंदर पूरा करना है.

    इसके बाद भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की अगुवाई में 26 बैंकों के एक कंसॉर्टियम ने NCLT से 8,500 करोड़ रुपये रिकवरी करने की बात कही. बीते कुछ साल के दौरान जेट एयरवेज का कुल घाटा बढ़कर 13,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गया था.

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