किसानों से जुड़े विवाद वाले तीनों बिल कल राज्यसभा में होंगे पेश, जानिए इससे जुड़ी सभी बातें

आइए जानें कौन से हैं किसानों से जुड़े वो तीन बिल
आइए जानें कौन से हैं किसानों से जुड़े वो तीन बिल

Agriculture Bill 2020- किसानों से जुड़े विवादित बिलों पर गुरुवार को लोकसभा में हुए सियासी महाभारत से अचानक ये मामला सुर्ख़ियों में आ गया. लोकसभा से पारित हो चुका ये बिल अब राज्यसभा में जाएगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 19, 2020, 11:34 AM IST
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नई दिल्ली.लोकसभा के मानसून सत्र (Parliament Monsoon Session) में किसानों के हितों में तीन बिल (विधेयक) पारित हुए हैं. कृषि से जुड़े (Agriculture Bill ) इन तीन अहम विधेयकों पर राजनीति गरमा गई है. पंजाब से लेकर महाराष्ट्र तक कई दल इसका विरोध कर रहे हैं. इन विधेयकों के विरोध में शिरोमणि अकाली दल की हरसिमरत कौर बादल ने केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा तक दे दिया है. लोकसभा में तो दोनों बिल आसानी से ध्वनिमत से पारित हो गए क्योंकि सदन में सरकार के पास जबरदस्त बहुमत है. लेकिन राज्यसभा में मोदी सरकार के पास बहुमत नहीं है. हर बार उसे बिल पारित करवाने के लिए उन्य दलों पर निर्भर रहना पड़ता है. किसी भी विवादित बिल पर उसे उन दलों का सहारा मिलता रहा है जो न तो एनडीए का हिस्सा हैं और न ही यूपीए का.

आइए जानें कौन से हैं किसानों से जुड़े वो तीन बिल 

1-कृषि उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) विधेयक 2020-  इसमें कासानों को फसल बेचने से जुड़ी कई आजादी मिली है. किसान मनचाही जगह पर अपनी फसल बेच सकते हैं. बिना किसी रुकावट दूसरे राज्यों में भी फसल बेच और खरीद सकते हैं.



इसका मतलब है कि एपीएमसी (APMC) के दायरे से बाहर भी फसलों की खरीद-बिक्री संभव है. साथ ही फसल की बिक्री पर कोई टैक्स नहीं लगेगा. ऑनलाइन बिक्री की भी अनुमति होगी. इससे किसानों को अच्छे दाम मिलेंगे.
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(2) मूल्य आश्वासन एवं कृषि सेवाओं पर कृषक (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) अनुबंध विधेयक 2020 - इस बिल में देशभर में कॉन्ट्रेक्ट फार्मिंग को लेकर व्यवस्था बनाने का प्रस्ताव है. फसल खराब होने पर उसके नुकसान की भरपाई किसानों को नहीं बल्कि एग्रीमेंट करने वाले पक्ष या कंपनियों को करनी होगी. किसान कंपनियों को अपनी कीमत पर फसल बेचेंगे. इससे किसानों की आय बढ़ेगी और बिचौलिया राज खत्म होगा.

(3) आवश्यक वस्तु संशोधन बिल- आवश्‍यक वस्‍तु अधिनियम को 1955 में बनाया गया था. अब खाद्य तेल, तिलहन, दाल, प्याज और आलू जैसे कृषि उत्‍पादों पर से स्टॉक लिमिट हटा दी गई है. बहुत जरूरी होने पर ही इन पर स्‍टॉक लिमिट लगाई जाएगी.

ऐसी स्थितियों में राष्‍ट्रीय आपदा, सूखा जैसी अपरिहार्य स्थितियां शामिल हैं. प्रोसेसर या वैल्‍यू चेन पार्टिसिपेंट्स के लिए ऐसी कोई स्‍टॉक लिमिट लागू नहीं होगी. उत्पादन, स्टोरेज और डिस्ट्रीब्यूशन पर सरकारी नियंत्रण खत्म होगा.

क्यों हो रहा है विरोध- किसान और व्यापारियों को इन विधेयकों से एपीएमसी मंडियां खत्म होने की आशंका है. कृषि उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) विधेयक 2020 में कहा गया है कि किसान अब एपीएमसी मंडियों के बाहर किसी को भी अपनी उपज बेच सकता है, जिस पर कोई शुल्क नहीं लगेगा, जबकि एपीएमसी मंडियों में कृषि उत्पादों की खरीद पर विभिन्न राज्यों में अलग-अलग मंडी शुल्क व अन्य उपकर हैं.

इसके चलते आढ़तियों और मंडी के कारोबारियों को डर है कि जब मंडी के बाहर बिना शुल्क का कारोबार होगा तो कोई मंडी आना नहीं चाहेगा. किसानों को यह भी डर है नए कानून के बाद एमएसपी पर फसलों की खरीद सरकार बंद कर देगी.

दरअसल, कृषि उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) विधेयक 2020 में इस संबंध में कोई व्याख्या नहीं है कि मंडी के बाहर जो खरीद होगी वह न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे के भाव पर नहीं होगी.

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नीति आयोग नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने लोकसभा में कृषि क्षेत्र से संबंधित दो विधेयकों के पारित होने का स्वागत करते हुए कहा कि ये किसानों को सशक्त बनायेंगे और कृषि के भविष्य पर इनका व्यापक प्रभाव पड़ेगा.






कुमार ने एक के बाद एक ट्वीट करते हुए कहा, ''लोकसभा में कृषक उत्पाद व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन एवं सरलीकरण) विधेयक 2020 और पारित हुआ. यह एक ऐतिहासिक दिन है. उन्होंने कहा कि ये कानून न केवल किसानों को सशक्त बनायेंगे बल्कि ये किसानों और व्यापारियों के लिये एक समान व मुक्त पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करेंगे.

जिससे अनुकूल प्रतिस्पर्धा की भावना को बढ़ावा मिलेगा और व्यापार पारदर्शिता में सुधार होगा. उन्होंने कहा कि किसान पहली बार अपने खेतों से सीधे बिक्री कर सकते हैं. उनके भीतर व्यापारियों के शोषण के जोखिम के बिना उद्यम स्वतंत्रता की भावना उत्पन्न होगी.
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