Opinion: IL&FS को बचाने के लिए आयुष्मान योजना से 3 गुना ज्यादा बजट की जरूरत!

IL&FS के नए चेयरमैन उदय कोटक (फाइल फोटो)
IL&FS के नए चेयरमैन उदय कोटक (फाइल फोटो)

IL&FS समूह में बीमा कंपनी एलआईसी और जापान के ओआरआईएक्स निगम के इस साल 31 मार्च तक क्रमश: 25.34% और 23.54% पर सबसे बड़े शेयरधारक थे. अन्य प्रमुख शेयरधारकों में एडीआईए (12.56%), एचडीएफसी (9.02%), सीबीआई (7.67%) और एसबीआई (6.42%) शामिल थे.

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  • Last Updated: October 9, 2018, 1:14 PM IST
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सिंधु भट्टाचार्य

सरकार ने IL&FS कंपनी के निदेशक मंडल का बेहतर तरीके से अधिग्रहण किया. हालांकि जिस तरह से  IL&FS की अन्य स्थितियां बाहर आ रही है उससे ऐसा लग रहा है कि जैसा पहले सोचा गया था परिस्थितियां उससे ज्यादा खराब हैं. IL&FS के संचालन से जुड़ी जटिलताओं और चूर हो सकी कंपनी की आर्थिक स्थिति के चलते ही नहीं बल्कि इस समूह को दोबारा उसके पैरों पर खड़ा करने के लिए बड़ी राशि चाहिए. पिछले अनुमानों के मुताबिक बैंकों और अन्य संस्थानों को कितना बकाया है क्योंकि यह आकड़े बढ़ते जा रहे हैं और इससे कंपनी को बचाने को लिए सरकार को बड़ी राशि झोंकनी पड़ सकती है.

एक रिपोर्ट के अनुसार अनुमान लगाया जा रहा है कि IL&FS को बचाने लिए तीस हजार करोड़ रुपए लग सकते हैं. यह आयुष्मान योजना से भी तीन गुणा ज्यादा बड़ी राशि है. यह राशि देश के कुल स्वास्थ्य बजट के आधे से भी अधिक है और साल 2018-19 में ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम, मनरेगा को आवंटित फंड का लगभग 55% है.



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इतना पैसा कहां से आएगा? IL&FS समूह के स्वामित्व वाली संपत्तियों को बेचने से कुछ पैसे आ सकते हैं लेकिन कम से कम इसके कुछ हिस्से को आपके द्वारा किए गए करों से दिया जा सकता है. ऐसे में जब सिस्टम अनिवार्य जांच के बिना IL&FS जैसे जटिल परिचालनों को चलाने के लिए चुनता है तो एक बार फिर आम आदमी अनजाने में जोखिम उठा रहा है.

रेड इंटेलिजेंस ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, ' हमारा अनुमान है कि इक्विटी के लिए आवश्यक बैलेंस शीट का सही आकार 295 अरब रुपये (29, 500 करोड़ रुपये) है, जो IL&FSऔर ITNL (सहायक) के स्टैंडअलोन उधार के बराबर है.'

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IL&FS के नए चेयरमैन उदय कोटक ने पिछले हफ्ते पहली बोर्ड बैठक के बाद कहा, 'बोर्ड ने IL&FS की 348 इकाइयों की खोज की थी, जो पहले से मिली जानकारी के मुकाबले 'काफी अधिक' थी. कोटक ने यह भी संकेत दिया कि 31 मार्च तक के अनुमान के मुताबिक समूह का कर्ज 91,000 करोड़ रुपये से ज्यादा हो सकता है.'

रेड की रिपोर्ट में कहा गया है कि समूह की कुल देनदारियां पहले की रिपोर्ट की तुलना में 26,000 करोड़ रुपये अधिक हो सकती हैं. IL&FS के पास सड़क में 13,493 किमी की संपत्ति है, 2800 मेगावाट बिजली संयंत्र संचालित करता है और 218 अरब रुपये (21,800 करोड़ रुपये) की संपत्ति के साथ गैर-बैंकिंग वित्त सहायक है.

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हालांकि क्या यह संपत्ति देनदारियों को अदा करने के लिए पर्याप्त होंगी? जितना अनुमान लगाया गया था ऋण उससे अधिक है. फंड की आवश्यकता अनुमान से ज्यादा है. कंपनी में नकदी पाने के लिए परिसंपत्तियों को बेचना एक समाधान नहीं हो सकता है क्योंकि इन संपत्तियों को उधार के बदले रखा जा सकता है. सरकार द्वारा नियुक्त बोर्ड कैसे संकटों से पार पाएगा.

यह स्पष्ट है कि IL&FS का प्रस्ताव केवल गैर बैंकिंग वित्त कंपनी (एनबीएफसी) क्षेत्र के हित में नहीं है. देश की इक्विटी के साथ-साथ बॉन्ड मार्केट्स पर चलने से रोकने में यह संकटपूर्ण था. IL&FS के पतन ने म्यूचुअल फंड उद्योग से भी धन निकासी का डर पैदा किया है जिसमें इस तरह की वित्त पोषण कंपनियों के लिए बड़ा जोखिम है. पहले से ही बड़े पैमाने पर आउटफ्लो हो हुए हैं.

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IL&FS के संकट का खुलासा तब हुआ जब पैरेंट और कुछ अन्य संबंधित संस्थाएं कुछ महीनों में ऋण अदा करने से चूक गईं. रेटिंग एजेंसियां, हितधारकों या पूर्ववर्ती बोर्ड ऑफ डायरेक्टरों में से कोई भी डिफ़ॉल्ट शुरू होने से पहले यह मुद्दा सामने नहीं लाता जिससे बाद में सिस्टम चौंक जाता है.

यदि IL&FS के गिरने या अधिक ऋण न दे पाने पर डिफाल्टर के रूप में, बड़ा प्रभाव राज्य के स्वामित्व वाले बैंकों पर पड़ सकता है. सरकारी अधिग्रहण में यह भी एक कारक था. ब्रोकरेज एलारा की एक रिपोर्ट ने पंजाब और सिंध बैंक, यूसीओ बैंक, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ इंडिया, विजया बैंक, सिंडिकेट बैंक, इलाहाबाद बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, पंजाब नेशनल बैंक और यूनियन बैंक को IL&FS में ऋणदाता के रूप में सूचीबद्ध किया है.

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विश्लेषकों ने कहा है कि क्षेत्रीय और मध्यम आकार के राज्य के स्वामित्व वाले बैंक नेटवर्थ में संभावित कमी के चलते महत्वपूर्ण प्रभाव देखेंगे. वास्तव में, मध्यम आकार के राज्य के स्वामित्व वाले बैंक और छोटे निजी बैंकों के बारे में यह आशंका जाहिर की जाती रही है कि वे किसी भी डिफॉल्ट से ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं.

IL&FS समूह में बीमा कंपनी एलआईसी और जापान के ओआरआईएक्स निगम के इस साल 31 मार्च तक क्रमश: 25.34% और 23.54% पर सबसे बड़े शेयरधारक थे. अन्य प्रमुख शेयरधारकों में एडीआईए (12.56%), एचडीएफसी (9.02%), सीबीआई (7.67%) और एसबीआई (6.42%) शामिल थे.

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं. यह उनके निजी विचार है.)

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