गिल्ट फंड की बड़ी डिमांड, आप भी इसमें पैसा लगाकर हो सकते हैं मालामाल, जानें सबकुछ

महज पांच साल में जी-सेक से 8.2 का रिटर्न मिला है जो कि बैंकों की एफडी से ज्यादा है.

महज पांच साल में जी-सेक से 8.2 का रिटर्न मिला है जो कि बैंकों की एफडी से ज्यादा है.

निवेशकों को भा रहे गिल्ट फंड( Gilt Fund), निवेशकों ने गिल्ट फंडों में अप्रैल में 1,647 करोड़ रुपए लगाए

  • Share this:

नई दिल्ली. गोल्ड, बैंक के फिक्स डिपॉजिट, करेंसी, क्रिप्टोकरेंसी, शेयर और बॉन्ड आदि में आप निवेश करते रहे रहे होंगे. आज हम आपको गिल्ट फंड (Gilt Fund) के बारें में बता रहे हैं. यह सुरक्षित यानी कम जोखिम वाला निवेश है. साथ ही इसमें हायर रिटर्न भी मिलता है.

गिल्ट फंड ऐसी म्युचुंअल फंड योजनाएं होती हैं जो सरकारी प्रतिभूतियों (Government Securities) यानी जी-सेक में निवेश करती हैं. गिल्ट फंडों ने अप्रैल महीने में दिसंबर के बाद से पहली बार शानदार शुद्घ प्रवाह दर्ज किया. बाजार कारोबारियों का कहना है कि आरबीआई का अनुकूल रुख निवेशकों को इस श्रेणी के प्रति आकर्षित करने में मददगार रहा.

यह भी पढ़ें : सोने में निवेश के लिए इस टिप्स को अपनाएं, हो जाएंगे मालामाल


केंद्रीय बैंक द्वारा जी-सेक खरीद कार्यक्रम की घोषणा से गिल्ट फंडों को मजबूती

एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) के आंकड़े से पता चलता है कि गिल्ट फंडों को अप्रैल में 1,647 करोड़ रुपए का शुद्घ पूंजी प्रवाह हासिल हुआ. दिसंबर और मार्च के बीच की अवधि में, गिल्ट श्रेणी में करीब 4,000 करोड़ रुपए की निकासी दर्ज की गई थी. बीएस को मिरे एमएफ में मुख्य निवेश अधिकारी (फिक्स्ड इनकम) महेंद्र जाजू ने बताया कि अप्रैल में आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने वृद्घि की रफ्तार बरकरार रखने के लिए अनुकूल रुख लंबे समय तक बरकरार रखे जाने का निर्णय लिया था. केंद्रीय बैंक द्वारा जी-सेक खरीद कार्यक्रम की घोषणा ने भी गिल्ट फंडों को मजबूती प्रदान की है.

यह भी पढ़ें : नौकरी की बात : महामारी में साइकोमेट्रिक्स टेस्ट और वर्चुअल इंटरव्यू की ट्रिक से पक्की करें अपनी जॉब



गिल्ट फंड : 10 साल में 8.7 प्रतिशत का औसत रिटर्न मिला

मौजूदा समय में, 10 वर्षीय जी-सेक का रिटर्न करीब 6 प्रतिशत के आसपास है. हालांकि पिछले रिकॉर्ड की बात करें तो पिछले एक साल में, गिल्ट फंडों ने 4.33 प्रतिशत का औसत प्रतिफल दिया है. हालांकि पांच वर्षीय और दस वर्षीय अवधि में इन फंडों ने 8.2 और 8.7 प्रतिशत का औसत रिटर्न दिया है . गिल्ट फंड डेट श्रेणी में सबसे ज्यादा उतार-चढ़ाव वाले फंडों में शामिल हैं. इनकी परिपक्वता अवधि लंबी होती है जिससे वे ब्याज दरों में बदलाव को लेकर ज्यादा संवेदनशील होते हैं. जब ब्याज दरें नीचे जाती हैं, तो उन्हें ज्यादा फायदा मिलता है, वहीं दरें ऊपर चढऩे पर इनमें कमजोरी आती है. फंड प्रबंधकों को आने वाले महीनों में ब्याज दरों में ज्यादा वृद्घि की संभावना नहीं दिख रही है.

यह भी पढ़ें :  हाई क्वालिटी LPG से खाना जल्दी पकेगा व गैस भी कम लगेगी, जानिए नई सुविधा के बारे में सब कुछ


जब ब्याज दरें घटती हैं, निर्धारित आय वाली सिक्युरिटी महंगी होती है

अक्सर, निर्धारित आय सिक्युरिटीज की कीमतें वर्तमान ब्याज दरों पर निर्भर होती हैं. ब्याज दरें और कीमतों का विपरीत संबंध है. जब ब्याज दरें घटती हैं, निर्धारित आय वाली प्रतिभूतियों के कीमतें बढ़ती हैं. इसी तरह, जब ब्याज दरें चढ़ती हैं, इन प्रतिभूतियों की कीमतें नीचे आ जाती हैं. जाजू ने कहा, 'लंबे वक्त में गिल्ट फंडों ने आकर्षक रिटर्न दिया है और यदि आप लंबी अवधि के लिए निवेश कर रहे हैं जो अल्पावधि अस्थिरता से चिंतित नहीं होना चाहिए.'

यह भी पढ़ें : Success Story : कचरा बीनने वालों के साथ काम कर हैंडबैग बनाए, आज 100 करोड़ का टर्नओवर 

10 साल से ज्यादा वक्त के लिए निवेश करने वालों के लिए गिल्ट फंड बेहतरीन

फाइनेंसियल एडवाइजर्स का सुझाव है कि गिल्ट फंड सिर्फ उन्हीं निवेशकों के लिए उपयुक्त हैं जो 10 साल से ज्यादा समय तक निवेश से जुड़े रहना चाहते हैं. यदि निवेशक कम निवेश अवधि तक जुड़े रहना चाहते हैं तो उन्हें इनके बजाय अल्पावधि और मध्यावधि फंडों जैसी अन्य डेट श्रेणियों में पैसा लगाना चाहिए. लैडर-7 फाइनैंशियल एडवायजरीज के संस्थापक सुरेश सदगोपन ने कहा, 'आप ऐसे गिल्ट फंडों में निवेश पर विचार कर सकते हैं जिनमें स्ट्रेटजिक डेट पत्रों की खरीदारी और उन्हें बनाए रखने पर केंद्रित हो.'

अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज