चीन समानों का उपयोग खत्म करने के लिए, भारत को अपनाना होगा जैक मा का 996 फार्मूला!

भारत कई बार चीन को पीछे छोड़ने और चीनी सामानों के बहिष्कार करने की बात करता है, लेकिन क्या भारत ऐसा करने में सच में सक्षम है?

News18Hindi
Updated: May 15, 2019, 12:18 PM IST
चीन समानों का उपयोग खत्म करने के लिए, भारत को अपनाना होगा जैक मा का 996 फार्मूला!
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Updated: May 15, 2019, 12:18 PM IST
भारत कई बार चीन को पीछे छोड़ने और चीनी सामानों के बहिष्कार करने की बात करता है, लेकिन क्या भारत ऐसा करने में सच में सक्षम है. चीनी मीडिया हमेशा भारत को चीन की मैन्युफैक्चरिंग पावर के सामने कमजोर बताती है. चीनी मीडिया का अखबार ग्लोबल टाइम्स ने भारत को चीन की बराबरी करने के लिए कड़ी मेहनत करने की नसीहत दे डाली. चीन के सबसे धनी शख्स अलीबाबा के फाउंडर जैक मा के हालिया सुझाव का हवाला दिया और कहा कि भारत को सप्ताह के 6 दिन 9 बजे सुबह से 9 बजे रात तक काम करने की संस्कृति अपनानी चाहिए. जैक मा ने इसे 996 का फॉर्म्युला बताया था जिसकी कड़ी आलोचना हुई थी.

चीनी अखबार ने कहा कि भारत का अकुशल विनिर्माण क्षेत्र (इनएफिशंट मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर) सुनिश्चित करेगा कि वह चीन से बराबरी नहीं कर पाएगा. इस कारण से चीन सामानों पर पाबंदी लगाने की भारत की कोशिश भी बेकार जाएगी.



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भारत 996 अपनाकर अपना कारोबारी माहौल सुधार सकता है

ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक भारत अगर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में चीन से मुकाबला करना चाहता है तो उसे 996 फॉर्म्युले को गंभीरता से अपनाना चाहिए. इसमें कहा गया है कि भारत 996 अपनाकर अपना कारोबारी माहौल सुधार सकता है, विदेशी निवेश आकर्षित कर सकता है और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में प्रतिस्पर्धा की क्षमता बढ़ा सकता है.

अखबार ने कहा है कि चीनी सामानों पर भारतीय प्रतिबंध से चिंता की कोई वजह नहीं है. लेख कहता है, भारत का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर चीन से मुकाबले के योग्य बिल्कुल नहीं है. चीन रोजमर्रा के अच्छे सामान, कम कीमत पर उपलब्ध कराने में सक्षम है, लेकिन भारत में यह क्षमता नहीं है.

ये भी पढ़ें: सावधान! अगर यूज नहीं कर रहे हैं आधार तो हो जाएगा डीएक्टिवेटचीनी का कहना है कि कुछ लोगों को लगता है कि मोदी ने चतुराई से भारत में चीनी सामानों के बहिष्कार की मांग पर सहमति जताई, लेकिन हमें ऐसा नहीं लगता है. मोदी आखिर लोगों की सूझबूझ पर भरोसा क्यों करेंगे? चूंकि बहिष्कार का अभियान असफल ही होना है, इसलिए भारतीय दोबारा चीनी सामानों का ही रुख करेंगे. ग्लोबल टाइम्स का दावा है कि भारतीयों पर राष्ट्रवाद का भूत लंबे समय तक चढ़ा नहीं रह सकता. कुछ लोग, कुछ वक्त तक चीनी सामानों का बहिष्कार कर सकते हैं, लेकिन आखिर में उन्हें कम कीमत पर अच्छे चीनी सामान अपनी तरफ दोबारा खींच लाएंगे.

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चीन में बहुत से अरबपति ज्यादा-से-ज्यादा घंटे काम करते हैं
भारत अगर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को दुनिया के अग्रणी देशों की लिस्ट में ऊपर बढ़ना चाहता है तो उसे चीन से सबक लेना होगा. लेख कहता है कि इस उपलब्धि का कुछ श्रेय चीनी कर्मचारियों के कठिन परिश्रम और कुछ रिसर्च और डिवेलपमेंट में लगे लोगों तथा आंट्रप्रन्योर्स को जाता है. ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक, 996 शेड्यूल चीन में आम बात है. कई चीनी कामगारों ने इसे अपनाया और यहां बहुत से अरबपति ज्यादा-से-ज्यादा घंटे काम करते हैं. आर्टिकल में कहा गया है, लेकिन, भारत में विदेशी निवेशक अक्सर तुलनात्मक तौर पर कम कामकाजी घंटे और स्थानीय कामगारों को बहुत ज्यादा सामाजिक कल्याण का लाभ देने की शिकायत करते हैं.

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इस आर्टिकल कहा गया है कि भारत को इस कार्यसंस्कृति को 996 जैसे फॉर्म्युले से बदलनी होगी ताकि चीनी सामानों को टक्कर देने योग्य उत्पादन की उम्मीद जग सके. ग्लोबल टाइम्स इस लेख के आखिर में कहा गया है, 'भारत के आगे कठिन चुनौती मुंह बाए खड़ी है. 996 शेड्यूल और कठिन परिश्रम करने के जुनून के बिना भारत चीन से मुकाबला नहीं कर सकता.
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