ऐसे जमा हो गए 200 से 250 करोड़ अंडे, अब क्या करें पोल्ट्री मालिक

किसान आंदोलन और बर्ड फ्लू के कारण पॉल्‍ट्री फार्म में अंडे इकट्ठे होते जा रहे हैं.

किसान आंदोलन और बर्ड फ्लू के कारण पॉल्‍ट्री फार्म में अंडे इकट्ठे होते जा रहे हैं.

कभी किसान आंदोलन (Farmer Protest) तो कभी बर्ड फ्लू (Bird Flu) के चलते अंडा बाज़ार कमजोर पड़ता जा रहा है. रही-सही कसर अंडे की डिमांड कम होने से पूरी हो गई. नतीजा यह हुआ कि पोल्ट्री (Poultry) फार्म में अंडा जमा होता चला गया. जानकारों के मुताबिक आज की तारीख में 200 से 250 अंडा जमा हो गया. अब भी बाज़ार में न तो अंडे (Egg) की डिमांड आ रही है और न ही अभी तक अंडे के रेट में सुधार आया है. बर्ड फ्लू के करीब हफ्ते के हो-हल्ले के बाद अभी तक अंडा और चिकन बाज़ार में कोई सुधार नहीं आया है. अभी भी बहुत सारे लोग बर्ड फ्लू के डर से अंडा और चिकन नहीं खा रहे हैं. जिसके चलते बाजार में अंडे की डिमांड नहीं आ रही है. डिमांड नहीं है तो पोल्ट्री फार्म मालिकों को अंडे के अच्छे दाम भी नहीं मिल पा रहे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 29, 2021, 5:05 PM IST
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नई दिल्ली. कभी किसान आंदोलन (Farmer Protest) तो कभी बर्ड फ्लू (Bird Flu) के चलते अंडा बाज़ार कमजोर पड़ता जा रहा है. रही-सही कसर अंडे की डिमांड कम होने से पूरी हो गई. नतीजा यह हुआ कि पोल्ट्री (Poultry) फार्म में अंडा जमा होता चला गया. जानकारों के मुताबिक आज की तारीख में 200 से 250 अंडा जमा हो गया. अब भी बाज़ार में न तो अंडे (Egg) की डिमांड आ रही है और न ही अभी तक अंडे के रेट में सुधार आया है. बर्ड फ्लू के करीब हफ्ते के हो-हल्ले के बाद अभी तक अंडा और चिकन बाज़ार में कोई सुधार नहीं आया है. अभी भी बहुत सारे लोग बर्ड फ्लू के डर से अंडा और चिकन नहीं खा रहे हैं. जिसके चलते बाजार में अंडे की डिमांड नहीं आ रही है. डिमांड नहीं है तो पोल्ट्री फार्म मालिकों को अंडे के अच्छे दाम भी नहीं मिल पा रहे हैं.

23 से 25 करोड़ अंडे का रोज होता है उत्पादन

यूपी एग एसोसिएशन के अध्यक्ष नवाब अली ने न्यूज18 हिंदी को बताया कि देश में हर रोज 23 से 25 करोड़ अंडे का उत्पादन होता है. लेकिन किसान आंदोलन और बर्ड फ्लू के चलते अंडा बाज़ार में गिरावट आई हुई है. एक बड़ा वर्ग अभी भी अंडा नहीं खा रहा है.ऐसे में जब अंडे के दाम कम होते हैं तो पोल्ट्री फार्म मालिक यह सोचकर अंडे को रोक लेता है कि अगले दो-चार दिन में जब रेट सही हो जाएंगे तो इकट्ठे बेच दूंगा. लेकिन इस महीने ऐसा मौका अभी तक नहीं आया है. जबकि जनवरी में सीजन पीक पर होता है. इस चक्कर में जमा अंडों की संख्या करोड़ों में पहुंच गई है.

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सीजन में भी 3.5 रुपये तक आ गया अंडा

मान्या एग ट्रेडर्स के संचालक राजेश राजपूत बताते हैं कि अंडा बाज़ार के सीजन में जनवरी को पीक सीजन माना जाता है. यह वो वक्त होता है जब अंडा कम होता है और डिमांड ज्यादा. लेकिन इस जनवरी में तो उल्टा ही हो रहा है. जिस जनवरी में अंडे थोक में 600 रुपये के 100 तक बिक जाते हैं, ऐसे वक्त में अंडा 350 रुपये के रेट से बिक रहा है. अगर ओपन मार्केट की बात करें तो हालात और भी खराब है. अजमेर में तो अंडे की हालात और भी खराब है.
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