सरसों और रिफाइंड तेल पर दाम कम करने को लेकर आज हो सकता है फैसला, सरकार ने बुलाई कारोबारियों की बैठक

सरकार ने बुलाई कारोबारियों की बैठक

सरकार ने बुलाई कारोबारियों की बैठक

आज केन्द्र सरकार (Central Government) ने तेल व्यापारियों और उनके एसोसिएशन के पदाधिकारियों की एक खास बैठक बुलाई है. उम्मीद है कि इस बैठक में तेल की कीमतें कम करने को लेकर कोई रास्ता निकाला जा सकता है.

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नई दिल्ली. पिछले एक साल से सरसों (Mustard) और रिफाइंड तेल (Refined Oil) के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन बीते 4 महीने से कीमतों में ज्यादा तेजी देखने को मिल रही है. अगर अच्छे ब्रांड की बात करें तो सरसों और रिफाइंड के दाम 200 के आंकड़े को छू चुके हैं. लेकिन सामान्य ब्रांड भी 170 और 180 से कम नहीं हैं. वहीं, राहत की बात यह है कि आज केन्द्र सरकार (Central Government) ने तेल व्यापारियों और उनके एसोसिएशन के पदाधिकारियों की एक खास बैठक बुलाई है. उम्मीद है कि इस बैठक में तेल की कीमतें कम करने को लेकर कोई रास्ता निकाला जा सकता है.

तेल एसोसिएशन का आरोप, तेल में सटोरियों ने कर दिया खेला

अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शंकर ठक्कर का कहना है, “हमने बीते लॉकडाउन के समय सरकार को इस बारे में आगाह किया था कि खाद्य तेल पर कुछ बड़े सटोरियों द्वारा "खेला" किया जाने की संभावनाएं बन रही हैं और सरकार को इसके लिए जरूरी कदम उठाने चाहिए लेकिन सरकार ने इस बात को नजर अंदाज कर दिया और इसका खामियाजा इस कोरोना महामारी के दौरान जनता को भुगतना पढ़ रहा है.

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हाल ही में एक बार फिर अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ द्वारा इस विषय में एक पत्र भेज कर दामों को काबू में करने के लिए सुझाव दिए हैं, जिसमें सबसे अहम यह है कि सरकार द्वारा गत वर्ष रिफाइंड खाद्य तेलों के आयात पर लगाए गए प्रतिबंध को तुरंत हटाया जाए, जिससे भारत के कई राज्यों में रिफाइनरीओ की कमी की वजह से हो रही उपलब्धता और आपूर्ति बाधित नहीं हो.”

तेल व्यापारी महासंघ की डिमांड पर बुलाई बैठक

तेल के बढ़ते दामों पर महासंघ के राष्ट्रीय महामंत्री तरुण जैन का कहना है कि सरकार को तुरंत वायदे और सट्टे पर रोक लगानी चाहिए, जिससे कुछ बड़े सटोरियों द्वारा बाजार और तेल के दाम को ऊपर-नीचे करने के खेल पर रोक लगाई जा सके. इसी संबंध में आज केंद्र सरकार के खाद आपूर्ति और ग्राहक संरक्षण विभाग द्वारा तेल के बढ़ते हुए दामों के संबंध में बैठक बुलाई गई है. बैठक में तेल के बढ़ते दामों को किस तरह से कंट्रोल में लाया जाया इस पर खास चर्चा होगी. साथ ही तेल कारोबारियों से अहम सुझाव भी लिए जाएंगे.



इसलिए लगातार बढ़ रहे हैं तेल के दाम

अध्यक्ष शंकर ठक्कर का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे खाद्य तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण घरेलू खाद्य तेल की कीमतें भी बढ़ रही हैं. भारत की 60 फीसद से ज्यादा खाद्य तेल की डिमांड आयात से पूरी की जाती है. जबकि आयाती तेलों पर सरकार द्वारा आयात शुल्क और कृषि कल्याण सेस लगाया गया है जो तेल के दाम बढ़ने की एक बड़ी वजह है.


सरकार को इस वक्त इन दोनों को कुछ समय तक के लिए हटा देना चाहिए, जिससे दाम काबू में आ सकें. इसके अलावा दाम नियंत्रण में आने तक तेल और तिलहन पर लगे 5 फ़ीसदी जीएसटी को जीरो कर देना चाहिए. इसके अलावा इस साल खाद्य तेलों के दाम बढ़ने से केंद्र सरकार ने आयात शुल्क के माध्यम से तगड़ी कमाई की है जिसके चलते सरकार को टैरिफ वैल्यू को कुछ समय के लिए स्थिर कर देना चाहिए.

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