कोरोना की सीख: फाइनेंशियल प्लानिंग क्यों जरूरी, टॉप 5 निवेश के विकल्प, ये सबसे बेहतर और सुरक्षित क्यों

top 5 investment option

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सबसे पहले जीवन की आकस्मिक जरूरतों के लिए इमरजेंसी फंड सबसे महत्वपूर्ण है. इसके बाद निवेश की बारी आती है. investment की रणनीति ऐसी बनानी चाहिए कि किसी भी छोटे बड़े काम के लिए दोस्तों-रिश्तेदारों से उधार या बैंक से लोन न लेना पड़े. इसके लिए विशेषज्ञों से जानिए निवेश के लिए सबसे बेहतर पांच विकल्प...

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नई दिल्ली. कोरोना महामारी की वजह से यह समय सबके लिए पहले से ज्यादा मुश्किल हो गया है. लोगों के हेल्थ और वेल्थ दोनों पर काफी असर पड़ा है. हममें से कई सारे लोगों को बेहतर फाइनेंशियल प्लानिंग की वजह से इस मुश्किल में भी कम नुकसान हुआ. वहीं, तमाम लोग ऐसे हैं जो फाइनेंशियल प्लानिंग में चूक गए और उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ा. कोरोना ने लोगों को एक बार फिर समझाया है कि भविष्य को देखते हुए फाइनेंशियल प्लानिंग जीवन के जरुरी कामों में से एक है.

सबसे पहले जीवन की आकस्मिक जरूरतों के लिए इमरजेंसी फंड सबसे महत्वपूर्ण है. इसके बाद निवेश की बारी आती है. investment की रणनीति ऐसी बनानी चाहिए कि किसी भी छोटे बड़े काम के लिए दोस्तों-रिश्तेदारों से उधार या बैंक से लोन न लेना पड़े. इसके लिए विशेषज्ञों से जानिए निवेश के लिए सबसे बेहतर पांच विकल्प, जो सुरक्षित भी हैं और आजमाए हुए भी हैं....

1- पब्लिक प्रॉविडेंट फंड-

पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (पीपीएफ) रिटायरमेंट जैसे लंबी अवधि के लक्ष्य के लिए मुफीद है. निवेश की अवधि 15 साल होने से इसमें टैक्स फ्री ब्याज की कम्पाउंडिंग का जोरदार असर देखा जाता है. फिलहाल इस पर 7.1 फीसदी ब्याज मिलता है. जिसकी रकम हर साल मूल पूंजी में जोड़ दी ( कम्पाउंडिंग) जाती है. यह पूरी तरह सुरक्षित निवेश भी है क्योंकि ब्याज और मूलधन की गारंटी सरकार देती है. इसमें सालाना अधिकतम 1.5 लाख रुपए निवेश किया जा सकता है.
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2- म्यूचुअल फंड एसआईपी

लंबे लमय के लक्ष्य के लिए इक्विटी में निवेश आदर्श माना जाता है. आम निवेशकों के लिए इस बाजार में कदम रखने का सबसे सरल तरीका म्यूचुअल फंड है. इसमें भी एसआईपी ( सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) निवेशकों को हर महीने एक तय रकम इक्विटी में लगाने की सुविधा देते हैं. आपको 3-5 ऐसी स्कीम्स में एसआईपी शुरू करनी चाहिए, जिनका प्रदर्शन लगातार अच्छा रहा हो. बेहतर होगा कि लॉर्ज कैपफंड्, चुनें. कुछ निवेश मिड-कैप स्कीम्स में भी करना बेहतर हो सकता है.



3- नेशनल पेंशन स्कीम

नेशनल पेंशन स्कीम (एनपीएस) खास तौर पर रिटायरमेंट के लिए डिजाइन किया गया लंबी अवधि का इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट है. इसकी देखरेख पेंशन फंड नियामक पीएफआरडीए करता है. एनपीएस टियर-1 अकाउंट को एक्टिव रखने के लिए सालाना न्यूनतम योगदान 6,000 रुपए से घटाकर सिर्फ 1,000 रुपए कर दिया गया है. रिटायर होने पर आप पूरी पूंजी का 60 फीसदी कर हिस्सा एकमुश्त टैक्स फ्री ले सकते हैं. बाकी 40 प्रतिशत फंड से आजीवन पेंशन ले सकते हैं.

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4- हेल्थ इंश्योरेंस कवर

बीमारियों के इलाज की महंगाई सामान्य महंगाई से ज्यादा होती है. कोरोना के दौर में हम देख रहे हैं कि अस्पतालों में भर्ती होने का खर्च हजारों में नहीं, लाखों में बैठता है. ऐसे में प्रर्याप्त हेल्थ इंश्योरेंस कवरेज जरूरी हो जाता है. इसकी लागत आप किस शहर में रहते हैं, आसपास किस तरह के अस्पताल हैं औऱ मेडिकल हिस्ट्री जैसी चीजों पर निर्भर करती है. पर्याप्त मेडिकल इंश्योरेंस कवरेज ( 8-15 लाख रुपए) हो तो अस्पताल में भर्ती होने पर पूरा बिल बीमा कंपनी चुकाती है.

5 - पर्याप्त लाइफ इंश्योरेंस कवरेज -

कामकाजी जीवन शुरू होने के तत्काल बाद लाइफ इंश्योरेंस कवर लेना जरूरी है. इसकी अहमियत इतनी है कि बचत शुरू करने से पहले यह काम कर लेना चाहिए इसलिए यदि आपने अब तक जीवन बीमा नहीं कराया है तो सबसे पहले यह काम निपटाइए. अब सवाल उठता है कि परिवार की फाइनेंशियल सुरक्षा के लिए कितने का लाइफ इंश्योरेंस पर्याप्त होगा. आम तौर पर सालाना आय से कम से कम 15 गुनी रकम का लाइफ इंश्योरेंस कवर लेना चाहिए.

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