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इन्फोसिस के शेयर्स में बड़ी गिरावट, जानिए आपको इससे हो सकता है कितना बड़ा नुकसान

News18Hindi
Updated: October 22, 2019, 5:01 PM IST
इन्फोसिस के शेयर्स में बड़ी गिरावट, जानिए आपको इससे हो सकता है कितना बड़ा नुकसान
मंगलवार को इन्फोसिस का शेयर 16 फीसदी गिरकर 643 रुपये के भाव पर बंद हुआ है.

वित्तीय सलाहकार कहते हैं कि इन्फोसिस (Infosys Stock) के शेयर में भारत ही नहीं सऊदी अरब और दुनिया के कई बड़े निवेशकों ने पैसा लगाया हुआ है. ऐसे में शेयर के गिरने से निवेशकों को 45 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का झटका लगा है.

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  • Last Updated: October 22, 2019, 5:01 PM IST
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नई दिल्ली. देश की दिग्गज कंपनी इन्फोसिस (Infosys Stock) के स्टॉक में आई गिरावट से शेयर खरीदने वालों को ही नुकसान नहीं होगा. बल्कि, SIP के जरिए म्यूचुअल फंड (Mutual Fund Scheme) की इक्विटी स्कीम में लगाए पैसों पर भी इसका असर पड़ेगा. वित्तीय सलाहकार कहते हैं कि इन्फोसिस (Infosys Share Price) के शेयर में भारत ही नहीं सऊदी अरब और दुनिया के कई बड़े निवेशकों ने पैसा लगाया हुआ है.

ऐसे में शेयर गिरने से निवेशकों को 45 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का झटका लगा है. लेकिन ऐसे में आपको घबराना नहीं चाहिए, क्योंकि शेयर के गिरने से सस्ते दाम में ज्यादा यूनिट्स खरीद पाएंगे. यही वह समय होता है, जब कम दाम में रियल कॉस्ट एवरेजिंग की जा सकती है.अगर आप समझदारी दिखाते हैं और एसआईपी जारी रखते हैं तो मार्केट में रिकवरी होने पर आपको एसआईपी का असल फायदा दिखेगा.आपको बता दें कि मंगलवार को इन्फोसिस का शेयर 16 फीसदी गिरकर 643 रुपये के भाव पर बंद हुआ है.

घट जाएगा SIP के जरिए म्यूचुअल फंड में पैसा लगाने वालों का मुनाफा!- देश के बड़े म्यूचुअल फंड हाउस जैसे HDFC म्यूचुअल फंड, SBI म्यूचुअल फंड, ICICI प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड, UTI म्यूचुअल फंड की 1 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी इन्फोसिस में है. BSE पर जारी आंकड़ों के मुताबिक, 30 सितंबर 2019 तक सभी म्यूचुअल फंड्स ने इन्फोसिस के कुल 55 करोड़ शेयर खरीदे हुए है. इस तरह से कुल हिस्सेदारी 12.92 फीसदी बैठती है. नीचे दिए लिंक के जरिए चेक करें कौन से म्यूचुअल फंड ने कितने शेयर इन्फोसिस के खरीदे हुए हैं. https://www.moneycontrol.com/mf/user_scheme/mfholddetail_sec.php?sc_did=IT



इन्फोसिस में किसकी कितनी हिस्सेदारी- BSE पर दी गई जानकारी के मुताबिक, LIC के पास इन्फोसिस के 25.81 करोड़ शेयर (हिस्सेदारी 6.06 फीसदी) हैं. वहीं, ICICI  प्रूडेंशियल इंश्योरेंस लाइफ के पास 1.32 फीसदी हिस्सेदारी है. इसके अलावा एफपीआई यानी फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स के पास 33.51 फीसदी हिस्सेदारी है. इन एफपीआई में सिंगापुर सरकार, वनगार्ड, सऊदी की सरकार का अबुधाबी गवर्नमेंट पेंशन फंड, ग्लोबल पेंशन फंड बडे़ हिस्सेदार हैं. मतलब साफ है कि इन सभी का पैसा भी इन्फोसिस में लगा हुआ है.

क्यों आई शेयर में गिरावट- इन्फोसिस को लेकर व्हिसलब्लोअर्स ने कंपनी के बोर्ड को इस मामले से जुड़ी एक चिट्ठी 20 सितंबर को लिखी है. चिट्ठी में बताया गया कि इन्फोसिस ने अपने मुनाफे और आय को बढ़ाने के लिए अनौतिक कदम उठाए हैं. कंपनी के मौजूदा सीईओ सलिल पारेख भी इसमें शामिल हैं. रिपोर्ट का दावा है कि सलिल पारेख बड़ी डील में मार्जिन्स को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने के लिए दबाव बनाते हैं और आमदनी और मुनाफे का गलत अनुमान बताने को कहते हैं.

आपको बता दें कि ऐसी ही एक चिट्ठी 27 सितंबर को अमेरिकी शेयर बाजार के रेग्युलेटर यूएस सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (US Securities and Exchange Commission) को भी दी गई है. दरअसल इन्फोसिस का एडीआर (अमेरिकी डिपॉजिटरी रिसीप्ट) न्यूयॉर्क एक्चेंज पर लिस्ट है. सोमवार को ADR 12 फीसदी से ज्यादा लुढ़क गया था. इसीलिए मंगलवार की सुबह इन्फोसिस का शेयर 15 फीसदी से ज्यादा गिर गया है.
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अब क्या करें निवेशक- वीएम पोर्टफोलियो के हेड विवेक मित्तल ने न्यूज18 हिंदी को बताया है कि शेयर में गिरावट का असर म्यूचुअल फंड स्कीम में लगे पैसों पर भी होगा. लेकिन गिरावट से बिल्कुल भी घबराना नहीं चाहिए. निवेशकों को चाहिए कि वह गिरावट से बिना घबराएं एसआईपी के जरिए निवेश से एवरेजिंग से फायदा लेते रहें.



शेयर में उतार-चढ़ाव का असर एसआईपी के निवेश पर कम होता है. क्योंकि म्यूचुअल फंड के पोर्टफोलियो में अन्य शेयर मुनाफा दे रहे होते है. इसीलिए अपने लक्ष्य हासिल करने के लिए निवेश में अनुशासन रखना जरूरी है. एसआईपी का निवेश से लंबी अवधि में फायदा मिलता है. निवेशक अपने लक्ष्य को निवेश से जोड़ें.

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First published: October 22, 2019, 3:44 PM IST
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