अमेरिका-चीन की इस लड़ाई में भारत को होगा ये बड़ा नुकसान! आम आदमी पर बढ़ेगा ये बोझ

दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाों को बीच जारी ट्रेड वॉर का असर जल्द चीन के साथ-साथ भारत पर भी दिखने लगा है. ऐसे माहौल में भारतीयों की जेब पर बोझ पड़ेगा और आम जरुरतों के सामान महंगा हो सकता है.

News18Hindi
Updated: May 15, 2019, 11:07 AM IST
अमेरिका-चीन की इस लड़ाई में भारत को होगा ये बड़ा नुकसान! आम आदमी पर बढ़ेगा ये बोझ
अमेरिका की ट्रेड वॉर से चीन के साथ भारत को भी हो सकता है ये बड़ा नुकसान
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Updated: May 15, 2019, 11:07 AM IST
अमेरिकी की ओर से जारी ट्रेड वॉर के असर से भारतीय रुपये में कमज़ोरी बढ़ने लगी है. एक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 2 महीने के निचले स्तर 70.50 पर आ गया है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर चीन और अमेरिका में ट्रेड वॉर और गहराती है तो भारत के रुपये में तेज़ गिरावट आ सकती है. आपको बता दें कि पिछले छह महीने में भारतीय रुपया दुनिया में सबसे ज्यादा मज़बूत होने वाली करेंसी थी. वहीं, पिछले साल ट्रेड वॉर जैसे हालात में चीन की करेंसी युआन में 11 मई से 31 अक्टूबर के बीच 10 फीसदी की गिरावट आई थी और डॉलर की तुलना में रुपया भी इतना ही कमजोर हुआ था. भारत में निवेश करने वालों को लग रहा है कि फिर से वैसा ही होने जा रहा है. पिछले साल 11 अक्टूबर को डॉलर के मुकाबला रुपया 74.48 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया था.

रुपये की कमजोरी के पीछे-भारतीय करंसी पर चुनाव संबंधी अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों के पैसा निकालने से भी बुरा असर पड़ रहा है.



>> विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने इस महीने 2,555 करोड़ रुपये निकाले हैं, जबकि एक महीना पहले उन्होंने 16,728 करोड़ का निवेश किया था. (ये भी पढ़ें-अमेरिका को कड़ी टक्कर देने की तैयारी में भारत! 16 जून को लेगा ये फैसला)

क्यों कमज़ोर होगा रुपया- एक्सपर्ट्स बताते हैं कि चीन की करेंसी युआन और रुपये की वैल्यू के बीच एक्सपोर्ट की वजह से सीधा रिश्ता है. युआन की वैल्यू में उतार-चढ़ाव होता है तो रुपया उससे बेअसर नहीं रह सकता.

>> अगर चीन की करंसी कमजोर होती है और रुपये की वैल्यू उसके मुताबिक नहीं गिरती तो देश के निर्यातकों को नुकसान होगा. ऐसे  में पूरी संभावना है कि भारतीय रुपया कमजोरी का नया रेकॉर्ड बना सकता है कि क्योंकि डॉलर के मुकाबले युआन में कमजोरी आ रही है.

लेकिन मज़बूत सरकार से संभल सकता है रुपया- चीन में आर्थिक मंदी की वजह से अगर युआन की वैल्यू घटती है तो रुपये पर भी उसका असर होगा.  लेकिन केंद्र में स्थायी सरकार बनती है तो इससे भारत की मैक्रो-इकॉनमी के लिए अच्छे हालात बनेंगे. तब रुपया कुछ स्थिर रह सकता है.

भारतीय रुपये की कमजोरी से आम आदमी का क्या बिगड़ेगा


(1) रुपए में गिरावट से बढ़ सकती है महंगाई: भारत अपनी जरूरत का करीब 80 फीसदी पेट्रोलियम प्रोडक्‍ट आयात करता है. रुपए में गिरावट से पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का आयात महंगा हो जाएगा. तेल कंपनियां पेट्रोल-डीजल की घरेलू कीमतों में बढ़ोत्‍तरी कर सकती हैं. डीजल के दाम बढ़ने से माल ढुलाई बढ़ जाएगी, जिसके चलते महंगाई में तेजी आ सकती है. इसके अलावा, भारत बड़े पैमाने पर खाद्य तेलों और दालों का भी आयात करता है. रुपए के कमजोर होने से घरेलू बाजार में खाद्य तेलों और दालों की कीमतें बढ़ सकती हैं.

ये भी पढ़ें-दुनिया की वो करेंसियां जो रुपए के मुकाबले काफी कमजोर हैं

एक अनुमान के मुताबिक डॉलर के मूल्य में एक रुपए की बढ़ोतरी से तेल कंपनियों पर 8,000 करोड़ रुपए का बोझ बढ़ जाता है. इससे उन्हें पेट्रोल और डीजल की कीमते बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ता है. पेट्रोलियम उत्पाद की कीमतों में 10 फीसदी बढ़ोतरी से महंगाई करीब 0.8 फीसदी बढ़ जाती है. इसका सीधा असर आपने खाने-पीने और परिवहन लागत पर पड़ता है.

(2) विदेश में पढ़ाई हो जाएगी महंगी: विदेश में पढ़ने वाले बच्चों पर खर्चा रुपए की गिरावट के साथ-साथ बढ़ता जाता है. भारतीय छात्रों के लिए यूएस, ब्रिटेन, कनाडा, सिंगापुर और ऑस्ट्रेलिया जैसी जगाहें पढ़ाई के लिहाज से सबसे पसंदीदा ऑप्शन्स हैं. विदेश की यूनिवर्सिटीज में ज्यादा ट्यूशन फीस होती है और अब रुपए की कमजोरी से इन देशों की करेंसी के मुकाबले ज्यादा रुपए आपको खर्च करने होंगे. इससे पढ़ाई का खर्चा बढ़ जाएगा

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(3) महंगी होगी विदेश यात्रा: अगर आप अपने परिवार के साथ विदेश यात्रा की तैयारी कर रहे हैं तो निश्चित तौर पर आपके लिए रुपए की गिरावट एक चिंता की बात है. ऐसा इसलिए क्योंकि अब रुपए के मुकाबले किसी भी करेंसी में बदलवाने पर आपको ज्यादा रुपए का भुगतान करना होगा. हालांकि आपने चाहें फ्लाइट या होटल की बुकिंग करा ली हो लेकिन विदेश में होने वाले खर्चों पर आपको अतिरिक्त रुपए देने होंगे.

(4) दवाओं के दाम पर असर: देश में कई जरूरी दवाएं बाहर से आती हैं. डॉलर के मुकाबले रुपए में गिरावट की वजह से दवाओं के आयात के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ती है जिससे वह महंगी हो जाती हैं.

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(5) सरकारी खजाने पर भी दबाव: रुपए में कमजोरी आने से देश के खजाने पर बड़ा असर होता है, क्योंकि इससे सरकार का इंपोर्ट महंगा हो जाता है. जिसके लिए इंपोर्ट पर अधिक पैसे खर्च करने पड़े है. इससे देश के खजाने पर निगेटिव असर होता है. साथ ही उन कंपनियों पर भी निगेटिव असर होता है. जिन्होने डॉलर में कर्ज लिया हुआ है. ऐसे में ब्याज बोझ अधिक होता और कंपनी का मुनाफा गिर जाता है.

...लेकिन इनको होता है फायदा: रुपए में गिरावट का फायदा निर्यातकों खासकर आईटी, फार्मा, टेक्‍सटाइल, डायमंड, जेम्‍स एवं ज्‍वैलरी सेक्‍टर को मिलेगा. इसके अलावा देश से चाय, कॉफी, चावल, गेहूं, कपास, चीनी, मसाले का भी अच्‍छा खासा निर्यात होता है. यानी कृषि और इससे जुड़े उत्‍पाद के निर्यातकों को भी रुपए में गिरावट का लाभ होगा.
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