TRAI के इस कदम से मोबाइल का टैरिफ, वाउचर और वैलिडिटी बदल जाएंगे, जानें यह जरूरी बात

ट्राई ने विभिन्न उपभोक्ताओं की शिकायतों और चिंताओं पर गौर करते हुए यह कदम उठाया

ट्राई ने विभिन्न उपभोक्ताओं की शिकायतों और चिंताओं पर गौर करते हुए यह कदम उठाया

दूरसंचार नियामक ट्राई (TRAI) ने दूरसंचार कंपनियों को रिचार्ज प्लान की वैलिडिटी पीरियड बदलने के लिए डिस्कशन पेपर जारी किया है.

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नई दिल्ली. मोबाइल फोन की रिचार्ज का वैलिडिटी पीरियर 28 दिन होना चाहिए या 30 दिन. मोबाइल टैरिफ पर ऐसी ही कई बातों पर विचार के लिए टेलीकॉम नियामक ट्राई (TRAI) ने दूरसंचार कंपनियों को डिस्कशन पेपर जारी किया है. इसमें ग्राहकों के लिए पेश योजनाओं में शुल्क दर यानी टैरिफ की वैधता अवधि पर कदम उठाया जाना है.

विभिन्न उपभोक्ताओं की शिकायतों और चिंताओं पर गौर करते हुए यह कदम उठाया गया है. भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने कहा कि उसे दूरसंचार सेवा प्रदाताओं द्वारा शुल्क दरों के मामले में एक माह के बजाय 28 दिन की पेशकश को लेकर ग्राहकों से शिकायतें मिली हैं. ट्राई ने कहा कि दूरसंचार सेवाओं के शुल्क निर्धारण के मुद्दे पर वह कुछ अपवादों को छोड़कर कार्रवाई में संयम बरतने की नीति अपनाता है.

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वैलिडिटी टाइम से खुश नहीं है ग्राहक

ट्राई ने संबंधित पक्षों, ग्राहकों और उद्योग से पूछा है कि क्या उसे वैधता अवधि के मुद्दे पर हस्तक्षेप करना चाहिए या उसे मौजूदा व्यवस्था के तहत संयम बनाए रखना चाहिए. ट्राई ने एक बयान में कहा कि ग्राहकों से मिली प्रतिक्रियाओं के आधार पर, यह महसूस किया जा रहा है कि दूरसंचार कंपनियों द्वारा पेश की जाने वाली कुछ शुल्क/वाउचर तथा उसकी वैधता अवधि से बड़ी संख्या में उपभोक्ता संतुष्ट नहीं हैं.

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ग्राहकों की आकांक्षाओं और जरूरतों के हिसाब से होना चाहिए प्लान

ताजा परिचर्चा पत्र का मकसद दूरसंचार सेवा प्रदाताओं द्वारा पेश किये जाने वाले शुल्क या वाउचर तथा वैद्यता की पहचान करना है जो ग्राहकों की आकांक्षाओं और जरूरतों के अनुरूप हो. नियामक ने शुल्क पेशकश की वैधता अवधि से संबंधित परिचर्चा पत्र जारी कर उस पर 11 जून तक सुझाव देने को कहा है. जवाबी प्रतिक्रिया के लिए समयसीमा 25 जून है.

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यह है वजह

दरअसल, मोबाइल कंपनियों द्वारा अपनी स्कीम में 24 दिन, 28 दिन, 54 दिन जैसी अवधि होती है. इससे ग्राहकों को असुविधा होती है. यदि यह मासिक हो जाए तो ग्राहकों के सामने पारदर्शिता बनी रहेगी. जबकि कंपनियों को मकसद होता है कि ग्राहक को महीने की बजाय कुछ कम दिन रखे जाएं तो उन्हें बाद में अतिरिक्त दिनों का पैसा मिल जाएगा.

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