टेरर फंडिंग से जुड़ा है ट्रेन टिकट का काला कारोबार, दुबई तक फैले हैं तार

दुबई तक फैले हैं तार

रेलवे प्रोटेक्शन फ़ोर्स यानी RPF की तफ़्तीश में पाया गया है कि इस खेल का मास्टर माइंड दुबई में बैठा हुआ है. हामिद अशरफ नाम के एक शख़्स को 2016 में RPF ने रेलवे टिकटों की कालाबाज़ारी के लिए गिरफ़्तार किया था.

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नई दिल्ली. ये ख़बर आप सभी को चौंका सकती है. भारत में रेलवे टिकटों (Rail Ticket) का काला कारोबार टेरर फंडिंग से जुड़ा हुआ है. रेलवे प्रोटेक्शन फ़ोर्स यानी RPF की तफ़्तीश में पाया गया है कि इस खेल का मास्टर माइंड दुबई में बैठा हुआ है. हामिद अशरफ नाम के एक शख़्स को 2016 में RPF ने रेलवे टिकटों की कालाबाज़ारी के लिए गिरफ़्तार किया था. ये उत्तर प्रदेश की बस्ती का रहने वाला है और इस पर 2019 में गोंडा में बम ब्लास्ट करने का भी आरोप है. हामिद अशरफ बेल पर रिहा होकर नेपाल के रास्ते संभवतः दुबई भाग गया है. इसी हामिद अशरफ के नीचे भारत में क़रीब 20 हजार लोग रेलवे के ई-टिकटों की कालाबाज़ारी का काम करते हैं. इन्हें शायद ये पता भी न हो कि उनके कारोबार की काली कमाई आतंकवाद को बढ़ावा देने में लग रही है.

हामिद अशरफ के नीचे भारत में गुलाम मुस्तफ़ा नाम का एक शख्स काम करता है. दरअसल, इसे 10 दिन पहले ही रेलवे के ई-टिकट की कालाबाज़ारी में RPF ने ओडिशा से गिरफ़्तार किया था. इसके पास बरामद लैपटॉप और मोबाइल फ़ोन से जो जानकारी मिली उसने RPF के साथ ही बेंगलुरु पुलिस को हैरानी में डाल दिया है. इसका लैपटॉप और मोबाइल पूरी तरह से इन्क्रिप्टेड था. लेकिन जब सुरक्षा एजेंसियों ने इसे क्रैक किया तो कई ऐसी जानकारी मिली जो पूरी गिरोह के मंसूबे को बताने के लिए काफ़ी है.

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इस गिरोह में 'गुरुजी' नाम का एक शख़्स भी जुड़ा हुआ है. हालांकि इसका मूल नाम कुछ और है, लेकिन यह इस गिरोह के लिए रेलवे के टिकट बुकिंग के सॉफ्टवेयर में घूसपैठ करता है. जहां आमतौर पर टिकट बुकिंग की पूरी प्रक्रिया में 3 मिनट तक लग जाते हैं, वहां गुरुजी ऐसे प्रोग्राम तैयार करता था जिससे एक मिनट में तीन टिकट बुक हो रहे हैं. इसी टाइमिंग से RPF को सबसे पहले कुछ गड़बड़ होने का शक हुआ और फिर जब इन टिकटों की जांच की गई तब बेंगलुरु से मुस्तफ़ा की गिरफ़्तारी हुई. इनके ऊपर गुलाम मुस्तफ़ा है जो मूल रूप से झारखंड के गिरीडीह का रहने वाला है. इसकी पढ़ाई-लिखाई ओडिशा के केन्द्रपाड़ा के मदरसों में हुई है. बाद में यह बेंगलुरु चला गया जहां इसने 2015 में रेलवे के काउंटर टिकट की दलाली शुरू की. फिर इसके सॉफ्टवेयर की ट्रेनिंग ली और ई-टिकटों की कालाबाज़ारी से जुड़ गया. इसके लैपटॉप से पता चलता है कि इसका संपर्क पाकिस्तान के कई संगठनों से हो सकता है. गुलाम मुस्तफ़ा के साथ कई सॉफ्टवेयर डेवलपर हैं और इनके नीचे 200-300 लोगों का पैनल 28,000 रुपये महीने पर काम करता है. यही लोग देशभर के 20,000 टिकट एजेंट्स से संपर्क में रहते हैं.

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इस काले कारोबार से होने वाली कमाई कई बार भारत की एक सॉफ्टवेयर कंपनी में भी इन्वेस्ट की गई है. इस कंपनी पर पहले से ही सिंगापुर में एक आपराधिक मामला दर्ज़ है और इसकी जांच चल रही है. यह गिरोह भारत से हवाला के ज़रिए भी विदेशों तक रकम भेजता है. वहीं कई बार इसने बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरंसी के ज़रिए भी पैसे विदेश तक भेजे हैं. इस रकम का इस्तेमाल टेरर फंडिग के लिए हो रहा है और इस जानकारी ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है. मुस्तफ़ा पिछले 10 दिन से बेंगलुरु में जुडिशियल कस्टडी में था और उसे अब पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया है. अभी तक की जांच से RPF का अनुमान है कि हर महीने क़रीब 10-15 करोड़ रुपये की कमाई देश से बाहर अलग-अलग अलग तरीकों से भेजी जा रही थी.

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