इन दोनों दोस्तों ने एविएशन कंपनी IndiGo को बनाया नंबर-1, अब इस बात पर छिड़ी जंग

देश की सबसे बड़ी एविएशन कंपनी इंडिगो को लेकर बड़े मतभेद की खबरें आ रही है. आइए जानें पूरा मामला

News18Hindi
Updated: May 17, 2019, 10:50 AM IST
इन दोनों दोस्तों ने एविएशन कंपनी IndiGo को बनाया नंबर-1, अब इस बात पर छिड़ी जंग
कभी दोनों दोस्तों ने ऐसे IndiGo को बनाया नंबर-1, अब इस बात पर छिड़ी जंग
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Updated: May 17, 2019, 10:50 AM IST
देश के एविएशन सेक्टर में मुश्किलें लगातार बढ़ रही है. जेट एयरवेज के अस्थाई तौर पर बंद होने के बाद इंडिगो में मतभेद गहरा गए है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इंडिगो प्रमोटरों के बीच ज्यादा एग्जिक्यूटिव कंट्रोल को लेकर खीचतान चल रही है. अब दोनों प्रमोटर्स राहुल भाटिया और राकेश गंगवाल ने इस विवाद को सुलझाने के लिए लॉ फर्म का सहारा लिया है. इस खबर के बाद कंपनी के शेयर में भारी गिरावट दर्ज की गई है. एनएसई पर इंडिगो (इंटरग्लोब एविएशन) का शेयर 9 फीसदी यानी 142 रुपये गिरकर 1466 रुपये पर बंद हुआ है.

दोनों दोस्तों के पास हैं कंपनी में बड़ी हिस्सेदारी- राकेश गंगवाल एक अमेरिकी नागरिक है. वह इंडिगो में नॉन-एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर के पद पर हैं. उनके पास एविएशन इंडस्ट्री में 30 साल से ज्यादा का अनुभव और एयरलाइन में तकरीबन 37 फीसदी हिस्सेदारी. वहीं, भाटिया की हिस्सेदारी एयरलाइन में 38 प्रतिशत स्टेक्स पर है. (ये भी पढ़ें-ई-वॉलेट में आपके साथ हुआ धोखा! तो ऐसे करें शिकायत)



मीडिया रिपोर्ट्स बताया जा रहा है कि दोनों के बीच एयरलाइंस स्ट्रेटेजी, महत्वाकांक्षा को लेकर मतभेद हुए हैं.अमेरिका के राकेश गंगवाल अब खेतान एंड कंपनी के साथ मिलकर अपने पार्टनर के साथ मतभेद सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं. साथ ही राहुल भाटिया भी JSA लॉ के साथ ही मामला सुलझाने में लगे हैं.

रजत भाटिया, एविएशन कंपनी इंडियो के फाउंडर


दोनों दोस्तों के बीच बढ़ी तकरार-2003-04 में राकेश गंगवाल और भाटिया ने भारत में साथ मिलकर इंडिगो एयरलाइन लॉन्च की. एयरलाइन ने करीब 2-3 साल तक बढ़िया और आसानी से परिचालन किया और इसके बाद कम दाम वाली इस हवाई सेवा ने बड़ा विस्तार किया. देश में मार्केट शेयर के तौर पर यह नंबर-1 एयरलाइन बन गई.

>> विदेशों में टॉप एविएशन प्रफेशनल्स का बड़ा नेटवर्क रखने वाले राकेश गंगवाल ने इंडिगो के विदेशी बाजारों में विस्तार करने के बारे में सोचना शुरू कर दिया. इसी दौरान पिछली गर्मियों में इंडिगो के प्रेजिडेंट आदित्य घोष ने कंपनी छोड़ दी थी. इससे पहले इंडिगो के मुख्य कमर्शल और नेटवर्क चीफ संजय कुमार ने भी कंपनी को बाय-बाय बोल दिया था. (ये भी पढ़ें-घर बेचकर शुरू किया बिजनेस, अब हर महीने कमाती हैं एक करोड़)

राकेश गंगवाल, एविएशन कंपनी इंडिगो के को-फाउंडर
>> अब इंडिगो में कई टॉप पॉजिशन खाली पड़ी हैं. जनवरी में, इंडिगो ने रोनोजॉय दत्ता को सीईओ के तौर पर नियुक्त किया. दत्ता ने अमेरिका में 20 साल तक काम किया है और वह यूएस एयरवेज में अडवाइजर भी रहे हैं. 2 साल तक उन्होंने एयर सहारा के प्रेजिडेंट का तौर पर भी काम किया. इंडिगो के कर्मचारियों ने पहली बार कंपनी में काम करने के माहौल को लेकर भी शिकायत की.

>> एक्सपर्ट्स बताते हैं कि दोनों दोस्तों के बीच ज्यादा एग्जिक्यूटिव कंट्रोल को लेकर खीचतान चल रही है. इसीलिए अब ये मामला लॉ फर्म के पास पहुंच गया है. (ये भी पढ़ें-21 साल के इस लड़के का भारतीय वायु सेना की ड्रेस के साथ है बड़ा कनेक्शन, चारों तरफ है चर्चा)

ऐसे शुरू हुई थी कंपनी
दोनों दोस्तों ने मिलकर शुरू की थी कंपनी-इंडिगो एयरलाइंस के राहुल भाटिया ने कनाडा से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की डिग्री ली और भारत लौटकर परिवार के बिजनेस में शामिल हो गए.

>> सन 1991 में पार्टनर्स ने इस कंपनी पर कब्जा कर लिया और पिता-पुत्र को बाहर का रास्ता दिखा दिया. अपनी डिग्री के दम पर राहुल ने आईटी कंपनी इंटरग्लोब शुरू की.



>> लंबे समय तक इस क्षेत्र में काम करने के बाद उन्होंने अपने गहरे दोस्त राकेश गंगवाल से एक एयरलाइन शुरू करने की बात की.काफी सोच-विचार के बाद 2004 में एयरलाइन लाइसेंस के लिए अर्जी दे दी गई और इंडिगो एयरलाइन की नींव पड़ी.

>> 2004 में लाइसेंस हासिल करने के बाद 2006 तक यह कंपनी उड़ान नहीं भर पाई थी. उस दौर में एविएशन फ्यूल की कीमतें आसमान पर थीं. इंडस्ट्री को लीड करने वाली किंगफिशर, स्पाइस जेट और जेट तक दिक्कत का सामना कर रही थीं.

>> सन 2005 के ऐसे विपरीत माहौल में इस कंपनी ने पेरिस एअर शो में 100 विमानों की शॉपिंग की. जेब में केवल 100 करोड़ रुपए थे. यहां राकेश गंगवाल की साख काम आई जो 35 साल से एयरलाइन बिजनेस में इज्जत कमा चुके थे.

>> एयरबस ने तमाम शर्तें मानते हुए इतने कम एडवांस पर बड़ा ऑर्डर स्वीकारा था. पहले विमान की डिलिवरी 28 जुलाई 2006 को मिली और 4 अगस्त 2006 से कंपनी ने अपनी उड़ान शुरू की.

>> 2007 तक 15 विमान का बेड़ा इनके पास था. 2010 तक मार्केट शेयर 17.3 प्रतिशत हो चुका था और एयर इंडिया को पीछे कर यह तीसरी बड़ी कंपनी बन चुकी थी.

>> 2011 में कंपनी ने तब चौंकाया जब एअरबस को 180 विमानों का ऑर्डर दिया. इसी साल इंटरनेशनल फ्लाइट्स भी शुरू कर दीं. फिर कंपनी का 3200 करोड़ रुपए का आईपीओ आया और यह आगे बढ़ती चली गई.

>> जनवरी 2019 में भारत में मार्केट शेयर 42.5 प्रतिशत है. इसके बेड़े में कई प्लेन हैं.
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