मजदूरों के खातों से नोटबंदी के दौरान हो रहा था करोड़ों का लेन-देन, जानें क्या है पूरा मामला?

नोटबंदी के दौरान उत्तर प्रदेश के कानपुर महानगर में 40 से ज्यादा खातों में पांच से दस करोड़ रुपये जमा किए गए. जिसके बाद उन्हें धीरे-धीरे निकाला गया.

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Updated: July 23, 2019, 12:38 PM IST
मजदूरों के खातों से नोटबंदी के दौरान हो रहा था करोड़ों का लेन-देन, जानें क्या है पूरा मामला?
5 से 10 करोड़ रुपये बैंक से निकालने के अब तक 40 मामले सामने आयें
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Updated: July 23, 2019, 12:38 PM IST
8 नवंबर 2016 को पीएम मोदी ने रातों रात एक बड़ा ऐलान कर दिया था जिसे शायद ही कोई भूल पाए.  मोदी ने जैसे ही नोटबंदी की घोषणा की तो आधे लोगों को यकीन ही नहीं हुआ है. इसके बाद नोट बदलने का जो सिलसिला शुरु हुआ और जिस तरह अवैध रकम को लोगों ने खपाया और उसकी निकासी की गई. उसकी परतें अब खुल रही है. नोटबंदी के दौरान उत्तर प्रदेश के कानपुर महानगर में 40 से ज्यादा खातों में पांच से दस करोड़ रुपये जमा किए गए. जिसके बाद उन्हें धीरे-धीरे निकाला गया.

जानिए क्या है मामला?
इनकम टैक्स को जब इतनी बड़ी रकम की भनक लगी, तो जांच पड़ताल शुरु कर दी. जांच में पता चला कि ये सभी खाताधारक बिहार के मजदूर हैं, जो कानपुर मजदूरी करने आए थे. उन्हें तो पता भी नहीं है कि उनके नाम का बैंक एकाउंट भी है. इस पूछताछ के बाद इनकम टैक्स को सारा माजरा समझने में देर नहीं लगी. इनकम टैक्स विभाग का कानपुर स्थित जांच निदेशालय नोटबंदी के बाद खातों में जमा और निकासी के मामलों की गहनता से पड़ताल कर रहा है.

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5 से 10 करोड़ रुपये निकालने के अब तक 40 मामले सामने आयें 
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक कानपुर में पांच से 10 करोड़ रुपये तक की जमा निकासी के 40 मामले सामने आए हैं, जबकि समूचे यूपी और उत्तराखंड में ऐसे मामलों की संख्या 174 है. ये सभी मामले फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट ने बैंकों से मिले ऑनलाइन डाटा की छंटनी के बाद पहचान किए हैं.

इनकम टैक्स के अफसर पूरा माजरा समझ चुके हैं कि नोटबंदी के दौरान मजदूरों को मोहरा बनाकर काली कमाई को सफेद किया गया है. इनकम टैक्स के अधिकारी अब हर खाते की जांच में बैंकों को भी शामिल करेंगे. खाता खोले जाने के समय लिए गए दस्तावेज जब्त किए जा रहे हैं.
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इस लेनदेन का सुराग ढूंढने की पूरी कोशिश है  
बैंकों से पूछा जा रहा है कि इतनी बड़ी रकम निकालने के लिए कौन आता था. इसके अलावा मजदूरों से भी यह जानकारी जुटाई जा रही है कि नोटबंदी के दौरान या उससे पहले किस जगह काम करते थे. प्रधान निदेशक अमरेंद्र कुमार का कहना है कि यह जांच बड़ी जटिल है. लेनदेन का कोई सीधा सुराग नहीं मिलने से अब कड़ी से कड़ी जोड़ी जा रही है. मजदूरों और बैंकों से मिल रही एक-एक सूचना के जरिए उन लोगों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है, जिन्होंने नोटबंदी के दौरान अरबों रुपये का काला धन सफेद किया.
First published: July 23, 2019, 12:38 PM IST
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