दुनियाभर में भारत से हल्दी की मांग बढ़ी, इम्युनिटी बूस्टर के​ लिए हो रहा इस्तेमाल

दुनियाभर में भारत से हल्दी की मांग बढ़ी, इम्युनिटी बूस्टर के​ लिए हो रहा इस्तेमाल
कोरोना काल में हल्दी का सेवन बढ़ गया है.

कोरोना वायरस से बचने के लिए इम्युनिटी बूस्टर (Immunity Booster) के तौर पर हल्दी की मांग (Turmeric Demand) बढ़ गई है. घरेलू बाजार ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर हल्दी का सेवन बढ़ा है. ​भारत से​ ​हल्दी आयात करने के लिए अमेरिका, यूरोप, मीडिल ईस्ट तक के कारोबारी कॉन्ट्रैक्ट साइन कर रहे हैं.

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नई दिल्ली. घरेलू स्तर पर हल्दी की मांग (Turmeric  Use) बढ़ने के बाद अब इसकी निर्यात (Turmeric Export) की मांग भी बढ़ गई है. दुनियाभर में कोरोना वायरस महमारी की वजह से इम्युनिटी बूस्ट करने की सलाह दी जा रही है. यही कारण है कि हल्दी को इम्युनिटी बूस्टर (Immunity Booster) के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है और इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है. भारत में हल्दी निर्यात के लिए मीडिल ईस्ट, अमेरिका, यूरोप और दक्षिणपूर्व एशियाई देशों से हल्दी की मांग बढ़ी है. इसके बाद पिछले एक सप्ताह में हल्दी का दाम 4 फीसदी तक बढ़कर 60-62 रुपये प्रति किलोग्राम तक हो गया है.

जानकारों का कहना है कि सितंबर तक हल्दी के दाम में 10 फीसदी तक इजाफा हो सकता है. दुबई, मलेशिया, ईरान, अमेरिका और यूरोपीय बाजार के लिए निर्यातक लगातार नये कॉन्ट्रैक्ट साइन कर रहे हैं. पिछले सप्ताह तो बांग्लादेश से भी हल्दी की मांग आई है. बांग्लादेश में हल्दी का निर्यात रेलवे रूट से होता है.

सितंबर तक बढ़ सकते हैं दाम
दरअसल, कोरोना वायरस संक्रमण से बचने के​ लिए मसालों को इम्युनिटी बूस्टर के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है. यही कारण है कि इनकी मांग (Demand for Turmeric) में इजाफा हो रहा. लॉकडाउन के बाद मसालों की फैक्ट्रियां भी खुलने लगी हैं. केड़िया एडवाइजरी के अजय केड़िया ने कहा, 'डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी से मसालों के निर्यात को सपोर्ट मिल रहा है. फिलहाल कुछ प्रमुख मंडियो में एक्सपोर्ट क्वॉलिटी के हल्दी का दाम 60 रुपये प्रति किलोग्राम है. अगस्त-सितंबर तक यह 66 रुपये प्रति किलोग्राम तक बढ़ सकता है.'
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सबसे बड़ा हल्दी उत्पादक देश है भारत
वित्त वर्ष 2019-20 के दौरान देश में कुल 9,38,955 टन हल्दी का उत्पादन हुआ था, जिसमें से दिसंबर 2019 तक 1,01,500 टन का निर्यात हुआ था. पुरी दुनिया में सबसे ज्यादा हल्दी का उत्पादन (Largest Producer of Turmeric) भारत में ही होता है, जोकि कुल वैश्विक उत्पादन (Global Production of Turmeric) का 70 से 75 फीसदी है. एक अनुमान में बताया गया है कि वित्त वर्ष 2020-21 तक हल्दी का निर्यात बढ़कर 15 फीसदी तक हो सकता है. हालांकि, इस साल की पहली तिमाही में हल्दी की बिक्री कुछ खास नहीं थी.

हल्दी के निर्यात बढ़ने में मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट इनसेन्टिव स्कीम (MEIS- Merchandise Export Incentive Scheme) के तहत 3 फीसदी की छूट भी मददगार रही है. आयुष मंत्रालय (Ministry of AYUSH) द्वारा कोविड-19 को लेकर जारी गाइडलाइंस में भी हल्दी के सेवन को बढ़ाने की बात कही गई है. इसके बाद घरेलू बाजार में भी हल्दी की मांग बढ़ी है.

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निर्यात कॉन्ट्रैक्ट में सूखे और ताजे हल्दी की भी मांग बढ़ी है. यूनाइटेड किंग्डम, जर्मनी, और हॉलैन्ड के रिटेल चेन्स में हल्दी की मांग बढ़ी है. स्टारबक्स भी हल्दी दूध बेच रहा है, जिसके बाद यह ट्रेन्ड वैश्विक स्तर पर बढ़ा है. ताजी हल्दी की मांग में करीब 5 गुना तक इजाफा हुआ है.
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