बाजार से 63 हजार करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी में Uber, हड़ताल पर बैठे कैब ड्राइवर्स

ऐप बेस्ड कैब सर्विस देने वाली अमेरिकी कंपनी Uber 10 मई को 9 अरब डॉलर (करीब 63000 करोड़ रुपये) का IPO ला रही है. लेकिन इस फैसले से दुनियाभर में कंपनी के साथ काम कर रहे ऊबर ड्राइवर्स हड़ताल पर चले गए हैं. आइए जानें पूरा मामला...

News18Hindi
Updated: May 9, 2019, 10:18 AM IST
बाजार से 63 हजार करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी में Uber, हड़ताल पर बैठे कैब ड्राइवर्स
Uber के 63 हजार करोड़ जुटाने से क्यों नाखुश है कैब चलाने वाले ड्राइवर! हड़ताल पर बैठे
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Updated: May 9, 2019, 10:18 AM IST
ऐप बेस्ड कैब सर्विस देने वाली अमेरिका की कंपनी Uber 10 मई को 9 अरब डॉलर (करीब 63000 करोड़ रुपये) का IPO ला रही है. इस आईपीओ के आने से पहले ही कंपनी और कैब चालने वाले ड्राइवर्स के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है. कम आमदनी और अनिश्चित वर्किंग कंडीशंस को लेकर अमेरिका और ब्रिटेन के कई बड़े शहरों के कैब ड्राइवर्स हड़ताल पर चले गए हैं. इन ड्राइवर्स का कहना है कि वे लोगों से इस ऐप का बहिष्कार करने के लिए अभियान चलाएंगे. अमेरिका के सैनफ्रांसिस्को में स्थित कंपनी के मुख्यालय पर भी ड्राइवर्स हड़ताल कर रहे हैं.

पांच साल का सबसे बड़ा IPO ला रही है कंपनी


ऊबर का IPO 10 मई को आ सकता है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 'कंपनी इसके जरिये 63 हजार करोड़ रुपये (900 करोड़ डॉलर) जुटाने की योजना बना रही है. यह पिछले पांच साल में सबसे बड़ा आईपीओ होगा.

>> इसके पहले 2014 में चीन की ई-कॉमर्स कंपनी अलीबाबा ने 1.74 लाख करोड़ रुपये (2500 करोड़ डॉलर) जुटाए थे.

>> ऊबर का आईपीओ अमेरिका में अब तक के टॉप 10 बड़े आईपीओ में शुमार हो सकता है.(ये भी पढ़ें-कहीं आपकी दवा तो नहीं हैं जहरीली! हुआ ये बड़ा खुलासा)

क्यों नाखुश है कैब चलाने वाले ड्राइवर
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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हड़ताल के चलते कुछ शहरों में सुबह के ऑफिस टाइम वाले लोगों को ज्यादा परेशान होने की आशंका है.
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>> ये कैब ड्राइवर कम आमदनी और अनिश्चित वर्किंग कंडीशंस को लेकर बेहद परेशान है. इसीलिए एक दिन पहले उबर ने एक बयान जारी कर कहा कि कैब ड्राइवर उनकी कंपनी की सेवाओं के दिल के समान हैं और कंपनी उनके बिना सफल नहीं हो सकती है.

>> कंपनी ने कहा कि वह कैब ड्राइवरों के हितों के लिए लगातार काम कर रही है. इसमें उनकी बेहतर आय सुनिश्चित करने के अलावा उनके लिए बेहतर बीमा कवर देना भी शामिल है.(ये भी पढ़ें-अमेरिका का बड़ा फैसला! चीन के सामान पर लगाया ज्यादा टैक्स, भारत पर होगा असर)

भारत में भी घट रही है उबर कैब चालकों की आय
>> साल 2018 में रिसर्च ऐंड अडवाइजरी फर्म रेडसीअर की ओर से जारी रिपोर्ट में कहा गया था कि कैब ड्राइवर्स की औसत मासिक आय जुलाई से सितंबर 2016 के दौरान 30 हजार रुपये से ज्यादा थी, जो साल 2018 में  घटकर 20 हजार रुपये के आसपास रह गई है. इसमें इंसेटिव्स शामिल हैं जबकि व्हीकल्स की ईएमआई पेमेंट्स शामिल नहीं है.

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>> पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम का असर भी उनकी आमदनी पर हुआ है. दो साल पहले बुकिंग वैल्यू पर करीब 60 प्रतिशत इंसेंटिव्स मिलते थे जो पिछले साल घटकर 18 से 20 फीसदी पर आ गए. रेडसीअर ने कहा कि इंसेंटिव्स घटकर 14 से 15 के आसपास रह गए हैं.

क्‍या होता है आईपीओ- आईपीओ का मतलब इनीशियल पब्लिक ऑफर्स होता है. इसके लिए कंपनियां बाकायदा स्टॉक मार्केट में खुद को लिस्ट कराकर अपने शेयर निवेशकों को बेचने का प्रस्ताव लाती हैं.

>> शेयर बाजार में लिस्टेड होने के लिए कंपनी को अपने बारे में तमाम जानकारियां सार्वजनिक करनी होती हैं.

>> अगर हम इसे आसान शब्‍दों में कहें तो कंपनी आईपीओ के माध्यम से अपने शेयर जारी करती है. दरअसल आईपीओ के जरिए कंपनियों के प्रमोटर पूंजी जुटाने के लिए अपनी कंपनी की कुछ हिस्‍सेदारी को बेचते हैं.
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