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नोटबंदी पर उदय कोटक बोले- तरीका खराब था, 2000 रुपये के नोट की क्‍या जरूरत थी

देश के निजी क्षेत्र के चौथे सबसे बड़े बैंक कोटक महिंद्रा बैंक के कार्यकारी वाइस चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक कोटक ने कहा कि छोटी फर्में इस समय मुश्किलों का सामना कर रही हैं.

देश के निजी क्षेत्र के चौथे सबसे बड़े बैंक कोटक महिंद्रा बैंक के कार्यकारी वाइस चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक कोटक ने कहा कि छोटी फर्में इस समय मुश्किलों का सामना कर रही हैं.

देश के निजी क्षेत्र के चौथे सबसे बड़े बैंक कोटक महिंद्रा बैंक के कार्यकारी वाइस चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक कोटक ने कहा कि छोटी फर्में इस समय मुश्किलों का सामना कर रही हैं.

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    नरेंद्र मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले पर करीब दो साल बाद प्रमुख बैंकर उदय कोटक ने कहा है कि ‘कुछ सीधी सी बातों’ पर ध्यान दे दिया गया होता तो बड़े मूल्य के नोटों पर पाबंदी के निर्णय का परिणाम ‘काफी अच्छा होता.’ इसी संबंध में उन्होंने 2000 का नया नोट चलन में लाने के पर सवाल उठाया लेकिन कहा कि वित्तीय क्षेत्र के लिए यह एक ‘बड़ा वरदान’ रही.

    देश के निजी क्षेत्र के चौथे सबसे बड़े बैंक कोटक महिंद्रा बैंक के कार्यकारी वाइस चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक कोटक ने कहा कि छोटी फर्में इस समय मुश्किलों का सामना कर रही हैं. हालांकि, उन्होंने सरकार द्वारा इस क्षेत्र पर ध्यान देने का स्वागत किया.

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    नोटबंदी पर उन्होंने कहा कि यदि इसकी बेहतर तरीके से योजना बनाई जाती तो इसका नतीजा कुछ और होता. कोटक ने पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सु्ब्रमण्यम की पुस्तक के विमोचन के मौके पर सप्ताहांत कहा, ‘मुझे लगता है कि यदि हम कुछ चीजों पर सोचा होता, तो इसका नतीजा उल्लेखनीय रूप से बेहतर होता. यदि आप 500 और 1,000 का नोट बंद कर रहे हैं, तो 2,000 का नोट शुरू करने की क्या जरूरत थी?’

    कोटक ने कहा कि क्रियान्वयन रणनीति के तहत यह सुनिश्चित करना जरूरी था कि सही मूल्य के नोट बड़ी संख्या में उपलब्ध कराए जाते. उन्होंने कहा कि यदि ये सब चीजें की गई होतीं तो आज हम कुछ अलग तरीके से बात कर रहे होते. हालांकि, कोटक ने दावा किया कि नोटबंदी वित्तीय क्षेत्र के लिए वरदान साबित हुई. उन्होंने कहा कि वित्तीय बचत में वृद्धि अविश्वसनीय है. इससे जोखिम प्रबंधन की चुनौती भी खड़ी हुई है.

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