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बैंकों में लावारिस पड़े हैं आम लोगों के 32 हजार करोड़ रुपए, सरकार ने दी जानकारी

5 से 10 करोड़ रुपये बैंक से निकालने के अब तक 40 मामले सामने आयें

5 से 10 करोड़ रुपये बैंक से निकालने के अब तक 40 मामले सामने आयें

सरकार ने दी लावारिस पड़े रुपयों की जानकारी जिनको लेने के लिए कोई दावा नहीं कर रहा है.

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    सरकार ने दी लावारिस पड़े रुपयों की जानकारी जिनको लेने के लिए कोई दावा नहीं कर रहा है. बैं​कों में पड़े गैर दावे वाले अनक्लेम्ड डिपॉजिट का आंकड़ा 2018 में 26.8 फीसदी बढ़कर 14578 करोड़ रुपये हो गया है. यह जानकारी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में दी है. आपको बता दें कि 2017 में अनक्लेम्ड डिपॉजिट का आंकड़ा बढ़कर 11494 करोड़ रुपये था, जबकि 2016 में यह 8928 करोड़ रुपये था. वहीं इंश्योरेंस कंपनियों में कुल 17877.28 करोड़ रुपये लावारिस हैं.

    वित्त मंत्री ने बताया कि 2018 के आखिर में अकेले SBI में अनक्लेम्ड डिपॉजिट का आंकड़ा 2156.33 करोड़ रुपये था. इंश्योरेंस सेक्टर को लेकर उन्होंने कहा कि सितंबर 2018 के आखिर तक लाइफ इंश्योरेंस सेक्टर में 16887.66 करोड़ रुपये का अनक्लेम्ड अमाउंट था, ज​बकि नॉन-लाइफ इंश्योरेंस सेक्टर में यह अमाउंट 989.62 करोड़ रुपये था.

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    बैंकों में पड़े अनक्लेम्ड अमाउंट का क्या होता है?
    जहां तक बैंकों में पड़े अनक्लेम्ड डिपॉजिट की बात है तो बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट 1949 में हुए संशोधन और इसी एक्ट के सेक्शन 26ए के इन्सर्शन के अनुरूप आरबीआई ने डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड (DEAF) स्कीम 2014 को बनाया है. इस स्कीम के तहत बैंक 10 साल या उससे ज्यादा समय से ऑपरेट नहीं किए गए सभी अकाउंट में मौजूद क्यूमुलेटिव बैलेंस को उसके ब्याज के साथ कैलकुलेट करते हैं और उस अमाउंट को DEAF में ट्रांसफर कर देते हैं.

    अगर DEAF में ट्रांसफर हो चुके अनक्लेम्ड डिपॉजिट का कस्टमर आ जाता है तो बैंक ब्याज के साथ कस्टमर को भुगतान कर देते हैं और DEAF से रिफंड के लिए दावा करते हैं. DEAF का इस्तेमाल डिपॉजिट के इंट्रेस्ट के प्रमोशन और इससे जुड़े अन्य आवश्यक उद्देश्यों के लिए होता है, जो कि आरबीआई सुझा सकता है.

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    इंश्योरेंस कंपनियों के लावारिस पड़े पैसों का यहां होता है इस्तेमाल
    इंश्योरेंस कंपनियों में पड़े अनक्लेम्ड अमाउंट की बात है तो इन कंपनियों को 10 साल से ज्यादा समय से पड़े अनक्लेम्ड अमाउंट को सीनियर सिटीजन वेलफेयर फंड (SCWF) में हर साल 1 मार्च या उससे पहले ट्रांसफर करना होता है. SCWF का इस्तेमाल सीनियर सिटीजन के कल्याण को प्रमोट करने वाली स्कीम्स में होता है. अगर बाद में कोई अनक्लेम्ड अमांउट के लिए क्लेम करता है तो इंश्योरेंस कंपनियों को प्रक्रिया के मुताबिक इन्वेस्टमेंट इनकम के साथ अनक्लेम्ड अमाउंट को भुगतान करना होता है.

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