टेनेंसी एक्ट को सिर्फ दस प्वाइंट में समझे, कैसे यह आपकी जिंदगी पर असर डालेगा

Model Tenancy Act के बाद अब नियम बनेंगे और फिर रेंट कोर्ट और ट्रिब्यूनल. यानी इनमें लंबा वक्त लगेगा.

Model Tenancy Act के बाद अब नियम बनेंगे और फिर रेंट कोर्ट और ट्रिब्यूनल. यानी इनमें लंबा वक्त लगेगा.

आदर्श किराएदारी अधिनियम 2021 (Model Tenancy Act) सिर्फ मॉडल या नमूना है. इसे लागू करने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है.

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नई दिल्ली. आखिरकार मोदी सरकार का बहुप्रतिक्षित मॉडल टेनेंसी एक्स यानी आदर्श किराएदारी अधिनियम 2021 (Model Tenancy Act)जारी हो गया है. बीते सात सालों से इस पर मश्क्कत जारी थी. हालांकि अभी भी जो एक्ट जारी किया गया है, वह सिर्फ मॉडल या नमूना है.

तुरंत इस एक्ट से आपकी जिंदगी में कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है. यदि आप मकान मालिक ( Landlord) हैं या किराएदार (Tenant) हैं तो जैसे पहले थे, वैसे ही अभी भी हैं. यह राज्य सरकार पर निर्भर है कि वह इस मॉडल एक्ट को लागू करें या न करें. यही नहीं वह इसमें बदलाव करने के लिए भी स्वतंत्र है. हालांकि इस एक्ट के मोटा-माटी प्रावधान जरूर शामिल रहेंगे. आइए हमारे रियल एस्टेट एक्सपर्ट मनोज सिंह मीक से समझते हैं इसके प्रावधान और उनका असर...

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सवाल : यह एक्ट कब तक लागू होगा
जवाब : जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है कि यह मॉडल एक्ट है. इसे लागू करने की जिम्मेदारी राज्य सरकार पर है. एक्ट के बाद नियम बनेंगे और फिर रेंट कोर्ट और ट्रिब्यूनल. यानी इनमें लंबा वक्त लगेगा.

सवाल : मौजूदा किराएदारों और मकान मालिकों पर इसका क्या असर पड़ेगा.

जवाब : अभी कुछ नहीं. जब राज्य सरकारें इसे लागू करेंगी तब नए मकान मालिकों और किराएदारों में एग्रीमेंट होगा.



सवाल : क्‍या किराए के लिए लिखित एग्रीमेंट होना जरूरी है?

जवाब: हां. लिखित एग्रीमेंट अनिवार्य हो जाएगा. एग्रीमेंट में मकान मालिक और किरायेदार के बीच सहमति के आधार पर ही किराया और उसकी अवधि तय की जाएगी. एग्रीमेंट की कॉपी को संबंधित जिला के रेंट अथॉरिटी के पास सबमिट भी करना होगा.

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सवाल : मकान की रिपेयरिंग कौन करेगा?

जवाब : वॉटर लाॅगिंग को ठीक कराने, इलेक्ट्रिक स्‍विच या सॉकेट रिपेयर, किचर फिक्‍स्‍चर रिपेयर करने, खिड़की-दरवाजों के शीशे बदलवाने, गार्डन या खुली जगहों के मेंटेनेंस, प्रॉपर्टी को जानबूझकर होने वाले नुकसान से बचाने आदि की जिम्‍मेदारी किरायेदार की ही होगी. प्रॉपर्टी को होने वाले किसी भी नुकसान पर मकान मालिक को जरूर इस बारे में बताना होगा. जबकि पुताई आदि की जिम्मेदारी मकान मालिक की होगी.

सवाल: अधिकतम कितने महीने का एडवांस किराया देना होगा?

जवाब: मकान के लिए अधिकतम 2 महीने का किराया ही सिक्‍योरिटी एडवांस के तौर पर लिया जा सकता है. कॉमर्शियल प्रॉपर्टी के लिए यह लिमिट अधिकतम 6 महीने के लिए होगी.

सवाल: रिपेयरिंग को लेकर मकान मालिक व किराएदार में विवाद को कौन सुलझाएगा?

जवाब: अगर मकान मालिक किराए पर दी गई प्रॉपर्टी पर कुछ अतिरिक्‍त ढांचागत काम करवाना चाहता है और किरायेदर इससे मना कर देता है तो इस मामले को रेंट कोर्ट में सुलझाया जा सकेगा. इसके लिए मकान मालिक को रेंट कोर्ट में अर्जी देनी होगी.

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सवाल : मकान मालिक बिजली या पानी सप्लाई बंद कर दे तो?

जवाब: कोई भी मकान मालिक या प्रॉपर्टी किरायेदार के लिए जरूरी सप्‍लाई नहीं रोक सकता है. इसमें इलेक्ट्रिसिटी, पावर, गैस आदि शामिल है.

सवाल: यदि किराएदार ने घर पर कब्जा कर लिया है तो?

जवाब: रेंट एग्रीमेंट पूरा होने के बाद 6 महीने की अवधि बढ़ाए जाने के बाद भी अगर किरायेदार घर नहीं छोड़ रहा तो इसे डिफॉल्‍ट माना जाएगा और उन्‍हें हर्जाना देना होगा. हर्जाने की यह रकम दो महीने के लिए मासिक किराये की दोगुनी होगी और इसके बाद घर किराये का चार गुना होगा.

सवाल : किराए की अधिकतम लिमिट भी रखी गई है?

जवाब : इसका जिम्मा राज्य सरकारों पर छोड़ा गया है. वह सर्किल रेट या कलेक्टर गाइडलाइन की तरह एरिया विशेष में किराए की दरों को तय कर सकती है.

सवाल: क्‍या रेंट एग्रीमेंट में तय अवधि के बीच किराया बढ़ाया जा सकता है?

जवाब: रेंट एग्रीमेंट में तय अवधि के बीच में किराया नहीं बढ़ाया जा सकता है. अगर रेंट एग्रीमेंट में किराये को लेकर कोई सहमति बनी है तो उसके आधार पर किराया बढ़ाने का फैसला लिया जा सकता है.

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