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Budget 2020: देश के शंभुओं के लिए नई आवाज़ में पुराना राग गांव में रोकने की कोशिश

News18Hindi
Updated: February 2, 2020, 11:03 AM IST
Budget 2020: देश के शंभुओं के लिए नई आवाज़ में पुराना राग गांव में रोकने की कोशिश
बजट से किसान नाखुश (प्रतीकात्मक तस्वीर)

देश का किसान शंभु चाहते तो हैं कि वो अपने घर पहुंच कर गीत गाएं – धरती कहे पुकार के, बीज बिछा ले प्यार के, मौसम बीता जाए... लेकिन बजट सुनकर लगता है कि किसानों (Farmer) के लिए इस बार का बजट (Budget 2020) नई आवाज़ में पुराना राग ही साबित होगा.

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  • Last Updated: February 2, 2020, 11:03 AM IST
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शंभू जब अपने घर अपने खेतों को छोड़ कर कोलकाता जाने की सोचता है. तो वो इस उम्मीद से घर से निकलता है कि उसे एक दिन वापस आना है. जब वो घर से निकलता है तो पीछे किसान गाना गा रहे होते हैं— अपनी कहानी छोड़ जा, कुछ तो निशानी छोड़ जा, कौन कहे इस ओर तू फिर आए ना आए... मौसम बीता जाए.

दो बीघा जमीन का शंभू जब घर से निकला तो वो वापस आने की उम्मीद से निकला था, लेकिन वापस नहीं आ पाया, लेकिन देश के लाखों शंभू ऐसे हैं जो आज अपने खेतों को छोड़कर इसलिए जा रहे हैं क्योंकि उन्हें अब अपनी जमीन में उम्मीद के अंकुर फूटते हुए नजर ही नहीं आते हैं.

सेंटर फॉर स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज़ की एक रिसर्च के मुताबिक, कम कमाई, हताश करता भविष्य और खेती से जुड़े तनाव के चलते अधिकांश किसान किसानी छोड़कर दूसरा काम करने का मन बनाने लगे हैं. 18 फीसद किसानों का तो ये मानना है कि वे खेती सिर्फ पारिवारिक दबाव के चलते ही कर रहे हैं.

शहर जाकर काम करना चाहते हैं कुछ किसान



इन किसानों में से ज्यादातर शहर में जाकर कुछ काम करना चाहते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि वहां उनके बच्चों के लिए अच्छी शिक्षा की व्यवस्था है. स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं कम हैं और रोजगार के भी ज्यादा मौके हैं.  किसानों का मानना है कि लगातार हो रहे नुकसान, मौसम की मार, फसलों के सही दाम नहीं मिलने की वजह से वो लोग ऐसा सोचने पर मजबूर हो रहे हैं.

वित्त मंत्री ने इस बार जब अपना बजट पेश किया, तो उन्होंने एक इतिहास रच दिया, इस बार का बजट इतिहास का सबसे लंबा बोल जाने वाला भाषण है. जिसमें किसी वित्त मंत्री ने इतनी देर तक खडे होकर इतना लंबा भाषण दिया. लेकिन अगर हम उसमे कुछ नयापन ढूंढने निकले तो वो कुछ नजर नहीं आता है. यानि इस बार भी वित्त मंत्री पिछली बार की बातों पर कायम रही या यूं कह सकते हैं उनकी बातों में उन्हीं बातों की पुनरावृत्ति नजर आई. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने पर कायम है. किसानों की आय बढ़ाने के लिए 16 अहम फैसले भी लिए गए हैं. इसके तहत जहां सस्टेनेबल क्रॉपिंग पैटर्न पर काम करने की बात कही गई. वहीं, दलहन पर फोकस रखने की बात पर भी जोर दिया गया है. किसानों के विकास के लिए हालांकि किसानों आय बढ़ाने के लिए 16 एक्शन प्लान पर काम करेगी. इस प्लान के तहत राज्यों को मॉडल दिया जाएगा. उन्होंने कृषि का बजट बढ़ाकर 2.83 लाख करोड़ रुपए करने का ऐलान किया.

बजट पेश करते हुए वित मंत्री निर्मला सीतारमण


इस बार के बजट में सिर्फ किया इतना गया है कि इन्ही घोषणाओं को थोड़ा सा विस्तार दे दिया गया है. मसलन जहां इस बार वित्त मंत्री ने अन्नदाता को ऊर्जादाता बनाने की बात कही है. इसके लिए सौर ऊर्जा के इस्तेमाल पर जोर देने के साथ सोलर पंप योजना का लाभ 20 लाख किसानों को मिलने की पेशकश रखी है. साथ ही 15 लाख किसानों को ग्रिड से जुड़े पंपसेट से जोड़े जाने का प्रावधान भी रखा गया है. वित्त मंत्री ने कहा कि वर्ष 2020-21 में 11,500 करोड़ रुपये हर घर जल योजना के लिए दिए जाएंगे. नाबार्ड पुनर्वित्त योजना का विस्तार किया जाएगा, 2020-21 के लिये 15 लाख करोड़ रुपये के कृषि ऋण का लक्ष्य. समुद्री मत्स्यन संसाधन के विकास, प्रबंधन और संरक्षण की नयी व्यवस्था बनायी जाएगी, मछली उत्पादन 2022-23 तक बढ़ाकर 200 लाख टन किया जाएगा. सरकार ने अगले वित्त वर्ष 2020-21 में 15 लाख करोड़ रुपये का कृषि ऋण देने का लक्ष्य तय किया है.वैकल्पिक ऊर्जा पर सरकार का कदम तो तारीफ करने वाला है, लेकिन साथ ही इस बजट में नया कुछ नज़र नहीं आता है.

नए बजट में क्या है?
कृषि उड़ान लांच किया जाएगा. ये प्लेन कृषि मंत्रालय की तरफ से चलेंगे. दूध, मांस, मछली समेत खराब होने वाली योजनाओं के लिए रेल भी चलाई जाएगी. कृषि उड़ान योजना को शुरू किया जाएगा. साथ ही रेफ्रिजेरेटर के साथ कृषि रेल का इंतजाम करेंगे, ताकि जल्दी खराब होने वाली सब्जियों और फलों को बचाया जा सके.

 किसानों को पीएम कुसुम स्कीम से जोड़ा जाएगा
ब्लू इकॉनोमी के जरिए मछली पालन को बढ़ावा दिया जाएगा. फिश प्रोसेसिंग को बढ़ावा दिया जाएगा. समुद्री इलाकों के किसानों के लिए, फिश उत्पादन का लक्ष्य 208 मिलियन टन, 3077 सागर मित्र बनाए जाएंगे. तटवर्ती इलाकों के युवाओं को रोजगार मिलेगा. 100 जिलों में पानी की व्यवस्था के लिए बड़ी योजना चलाई जाएगी, ताकि किसानों को पानी की दिक्कत ना आए. पीएम कुसुम स्कीम के जरिए किसानों के पंप को सोलर पंप से जोड़ा जाएगा. इसमें 20 लाख किसानों को योजना से जोड़ा जाएगा. इसके अलावा 15 लाख किसानों के ग्रिड पंप को भी सोलर से जोड़ा जाएगा.

पांच साल का बजट और किसान
बीते पांच सालों में भाजपा सरकार ने जो बजट पेश किया है उस पर अगर नज़र डालें तो कुछ छह बजट में कोई विशेष अंतर नज़र नहीं आता है. वो सरकता हुआ सा प्रतीत होता है

2015 के बजट में किसान
2015 में  तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कोई नई घोषणा नहीं करते हुए 2015-16 के लिए कृषि ऋण लक्ष्य को 50,000 करोड़ रुपए बढ़ाकर 8.5 लाख करोड़ रुपए कर दिया गया था. इसके अलावा सूक्ष्म सिंचाई के लिए 5,300 करोड़ रुपए का आवंटन किया और कृषि की आय बढ़ाने के लिए एकीकृत राष्ट्रीय बाजार बनाने का वादा किया.

इस साल जहां कृषि बजट में भारी-भरकम बढ़ोतरी की गई


2016 का बजट और किसान
इस साल जहां कृषि बजट में भारी-भरकम बढ़ोतरी की गई. वहीं  इस क्षेत्र के लिए कुल 47,912 करोड़ रुपये का आवंटन भी किया गया जो साल 2015-16 के बजट की तुलना में 80 प्रतिशत ज्यादा था. कृषि ऋण का लक्ष्य भी बढ़ाकर 9 लाख करोड़ रुपये किया गया. सिंचाई कोष बनाने की भी घोषणा हुई. कृषि क्षेत्र में सुधार करने के लिए पैसों की जरूरत को पूरा करने के लिए योग्य सेवाओं पर 0.5 फीसदी का कृषि कल्याण सेस लगाने का प्रस्ताव भी पारित किया गय.

2017 में क्या मिला?
साल 2015, 16 की तरह ही इस साल भी कृषि ऋण का लक्ष्य में बढ़ोतरी की गई और ये 9 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया. इसी तरह इस साल फसल बीमा योजना के तहत होने वाले कवरेज को को भी 30 फीसदी फसल क्षेत्र से बढ़ाकर 40 फीसदी कर दिया गया.

2018 के बजट में किसान
इस बार किसानों  की आय बढ़ाने पर जोर दिया गया, इस साल घोषणा की गई कि किसानों को लागत का डेढ़ गुना मूल्य दिया जायेगा.  कृषि कर्ज लक्ष्य इस बार भी बढ़ाया गया  और उसे 11 लाख करोड़ रुपए किया गया. इसके अलावा 500 करोड़ रुपए ऑपरेशन ग्रीन के लिए प्रस्तावित किया गया. गांवों में 22 हजार हाटों को कृषि बाजार में तब्दील करने की भी घोषणा हुई. कृषि उत्पादों के निर्यात को 100 अरब डॉलर के स्तर तक पहुंचाने और देश में 42 मेगा फूड पार्क बनाए जाने का ऐलान भी हुआ था .

2019 में क्या था?
इस साल एक नई बात हुई जो थी  जीरो बजट खेती पर जोर. बाकि वही सब पुराना राग था बस उसमें ऑरगेनिक खेती और केमिकल फ्री खेती पर विशेष जोर दिया गया था. इस साल का बजट कुल बज़ट का 4.6 फीसद था. वर्ष 2019-20 का कृषि बजट करीब एक लाख 30 हजार करोड़ रुपए का था जो कुल बजट का केवल 4.6 फीसदी ही था. इसमें से 75,000 करोड़ रुपए पीएम-किसान योजना के लिए आवंटित किए गये थे.

इन पांच सालों के बजट को अगर  देखें तो किसानों की आय बढ़ाने, फसल बीमा, फूड प्रोसेसिंग और कृषि मंडियों पर ज्यादा जोर दिया गया है. लेकिन उनका असर बहुत ज्यादा नज़र आया नहीं. इस बार भी बजट में वित्त मंत्री ने स्टोरेज बनाने की बात कही है पिछली बार भी इसके बारे में विचार रखा गया था लेकिन इस बार बजट से पहले किसानों ने स्टोरेज ना होने की वजह से नुकसान की बात को जाहिर किया था हो सकता है इस बार उन्हें वित्तमंत्री के कथन से अगले साल के लिए कुछ उम्मीद नजर आए.

देश के शंभु चाहते तो हैं कि वो अपने घर पहुंच कर गीत गाएं – धरती कहे  पुकार के, बीज बिछा ले प्यार के, मौसम बीता जाए.. लेकिन बजट सुन कर लगता है कि किसानों के लिए इस बार का बजट नई आवाज़ में पुराना राग ही साबित होगा.

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First published: February 1, 2020, 5:43 PM IST
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स्रोत: स्वास्थ्य मंत्रालय, भारत सरकार
अपडेटेड: April 09 (08:00 AM)
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स्रोत: जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी, U.S. (www.jhu.edu)
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