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Union Budget 2020: मिडिल क्लास पर फोकस कर अर्थव्यवस्था की सुस्ती दूर करेगी मोदी सरकार!

Union Budget 2020: मिडिल क्लास पर फोकस कर अर्थव्यवस्था की सुस्ती दूर करेगी मोदी सरकार!

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (डिजाइन फोटो).

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (डिजाइन फोटो).

आर्थिक मामलों के जानकारों की मानें तो आगामी बजट (Budget) में मांग और खपत बढ़ाने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (nirmala sitharaman) 5 लाख रुपये तक की आय (Income) को करमुक्त (Tax Free) कर सकती है.

    नई दिल्ली. देश में चल रही आर्थिक सुस्ती के बीच मोदी सरकार आज अपना बजट देश के सामने रखने जा रही है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज सुबह 11 बजे देश का बही-खाता पेश करेंगी. इस बार लोगों को उम्मीद है कि मोदी सरकार का पूरा फोकस मिडिल क्लास पर होगा. पिछले साल पेश अंतरिम बजट पर नजर दौड़ाएं तो मोदी सरकार का पूरा ध्यान किसानों और गरीबों को आर्थिक रूप से मजबूत करने पर केंद्रित था. इसके बाद जुलाई 2019 में वित्त मंत्री सीता रमण ने अपना पहला बजट पेश किया. इस बजट में कॉरपोरेट और बिजनेस जगत को राहत देने वाली कई घोषणाएं की गईं. ऐसे में इस बार उम्मीद लगाई जा रही है कि अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए मोदी सरकार मिडिल क्लास को राहत देने के लिए कई घोषणाएं कर सकती है.

    जानकारों की मानें तो देश की सुस्त अर्थव्यवस्था को देखते हुए लगता है कि वित्त मंत्री भले ही बजट में खुलकर खर्च न कर सकें लेकिन वह लोगों की खरीदारी करने की क्षमता बढ़ाने की पूरी कोशिश करेंगे. इसी के साथ सरकार की कोशिश होगी कि वह बजट में कुछ ऐसी घोषणाएं भी करे, जिससे रोजगार में इजाफा किया जा सके. पिछले बजट में जिस तरह से कॉरपोरेट टैक्स में कटौती की गई थी, उसे देखने के बाद आम लोगों की निगाहें वित्त मंत्री पर टिकी हुई हैं. ऐसे में नौकरी-पेशा लोगों को उम्मीद है कि सरकार टैक्स के मोर्चे पर उन्हें राहत दे सकती है. टैक्स राहत देने से ही खरीदारी बढ़ेगी और अर्थव्यवस्था में तेजी के आसार भी बनेंगे.

    मांग और खपत बढ़ाने की आवश्यकता
    अर्थशास्त्रियों के मुताबिक इस समय अर्थव्यवस्था में सबसे ज्यादा मांग और खपत बढ़ाने की आवश्यकता है. मांग बढ़ने से ही आर्थिक गतिविधियों में तेजी आयेगी. इसके लिये पूंजीगत खर्च बढ़ाने के साथ ही आम आदमी की जेब में अधिक पैसा होना जरूरी है. सरकार पूंजीगत खर्च के मोर्चे पर कई ढांचागत योजनाओं पर काम कर रही है. इसके साथ ही आम नौकरीपेशा लोगों को इनकम टैक्स में राहत दी जानी चाहिये ताकि उनकी जेब में खर्च करने के लिये अधिक पैसा बचे. बेंगलुरु स्थित इंस्टिट्यूट फॉर सोशल एंड इकनॉमिक चेंज के प्रोफेसर डॉ. प्रमोद कुमार ने कहा, 'अर्थव्यवस्था में सुस्ती दूर करने के लिये सरकार को सुधारों को बढ़ाने के साथ ही रोजगार सृजन के उपाय करने और पूंजीगत खर्च बढ़ाने की जरूरत है. इससे लोगों की जेब में अधिक पैसा आएगा और मांग बढ़ेगी.

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    इंडीविजुअल इनकम टैक्स छूट सीमा बढ़ाकर 5 लाख रु की जाए
    उन्होंने कहा कि मध्यम वर्ग खासकर नौकरीपेशा निश्चित रूप से इनकम टैक्स में कटौती की उम्मीद कर रहे हैं. इस समय अर्थव्यवस्था में मौजूदा नरमी का कारण मांग में कमी है न कि आपूर्ति. ऐसे में मूल इंडीविजुअल इनकम टैक्स छूट सीमा को मौजूदा 2.50 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर मध्यम वर्ग को कर राहत दी जा सकती है. फिलहाल 2.50 से 5 लाख रुपये तक 5 प्रतिशत, 5 से 10 लाख रुपये पर 20 प्रतिशत और 10 लाख रुपये से अधिक की आय पर 30 प्रतिशत की दर से कर लगता है. इसके अलावा 5 लाख रुपये तक की आय वाले को 12,500 रुपये की छूट दी गयी है. यानी 5 लाख रुपये तक की आय पर कोई कर नहीं लगेगा. इस बार विशेषज्ञों का मानना है कि इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव किया जा सकता है और 5 लाख रुपये तक की आय को टैक्स फ्री किया जा सकता है.

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    धारा 80C के तहत सीमा बढ़ाकर 2.50 रुपये करने की मांग
    कुमार ने यह भी कहा है कि इनकम टैक्स कानून की धारा 80C के तहत जीवन बीमा प्रीमियम, ट्यूशन फीस और अन्य बचत पर मौजूदा 1.50 लाख रुपये की सीमा को बढ़ाकर 2.50 लाख रुपये करने की आवश्यकता है. इससे वेतनभोगी तबके की जेब में अधिक धन बचेगा और अर्थव्यवस्था में मांग बढ़ेगी.

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    Tags: Budget, Budget 2020, Business news in hindi, Finance Minister, Income tax, Income tax slab, Modi Government Budget, Nirmala sitharaman, Taxpayer, Union budget

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